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तुम्हारा बाप आया

बच्चो मैं तुम्हारा पापा हूँ . आप सभी मेरे बचे हो .अगर तुम्हे कोई भी दिक्कत हो मुझे बताओ .साड़ी दिक्कत को ख़तम कर दूंगा रेगार्ड्स तुम्हारा बाप पोपटलाल



जीवन का सत्य ( अतीत से सबक )

जीवन का सत्य (अतीत से सबक )डॉ शोभा भारद्वाज सिकंदर ग्रीक शासक विश्व विजय करने निकला लेकिन भारत से लौटते समय बिमारी से उसकी मृत्यू हो गयी वह स्वदेश लौट नहीं सका नेपोलियन , हिटलर ,मुसौलिनी काल के गाल में समा गये दुनिया जीत कर आपस में बांटना चाहते थे केवल जापान का राजा हिरोहितो बचा रहा कई वर्ष तक जा



सबक

लोगों की दगाबाजी, दोगलेबाजी, से आहत होकर पतन की तरफ बढ़ने से अच्छा है, सबक समझकर परिवर्तन की ओर बढ़े..



कोरोना वायरस महामारी से सीखने वाले सबक

COVID-19 महामारी, जिसे कोरोना वायरस महामारी (corona virus epidemic) नाम से जाना जाता है इसकी शुरुआत चीन के वुहान शहर से हुई थी जहाँ दिसंबर 2019 में इसको पहचाना गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 30 जनवरी को इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (Public Health Emergency)



सबक..!

आज वह फिर खड़ा है ,कठघरे में ,दोषी बन!वह ,जिसनेइंसान के बड़े से बड़े घाव पर मरहम लगाया। आज उसी के आरोपों से घायल यहाँ आया । कहता है – मैंने हँसाया या रुलाया, हर बार,तुझे सबक ही सिखाया । अनुभव भी दिए, आगे बढ्ने का हुनर भी बताया । ये तो तूने मेरी कद्र नहीं की, अपनी नासमझियों के लिए, मुझे ही दोषी ठहराया



ये शहर है… मेरा !

ये शहर है… मेरा !कल तक जहाँ रंगीनियाँ थीं , आज ख़ामोशी है , बेचैनी है । लगता है ,दस्तक दी है फिर किसी तूफ़ान ने ,हर तरफ़ भाग दौड़ है , आज ,धर्म -जाति से परे सब साथ हैं !इस तूफ़ान से लड़ने के लिए सब तैयार !वैसे , शक्ति तो साथ में ही है । तूफ़ान तो हर बार अलग- अलग वेश में आता



अलग अलग

अलग अलग आती मुश्किलें, अलग अलग जाल हैं. अपने अपने शौक हैं सब के, अपने अपने ख्याल हैं, उलझी उलझी सी राहें, बिखरा बिखरा सा है सफर, टूटी टूटी सी नींद आती, टुकड़े टुकड़े आते ख्वाब हैं. लाख लाख इच्छाएं सबकी,हजार हजार हैं कोशिशें, पाव पाव सब पा लेते, पौने पौने रह जाते सवाल



"अयोध्या - राम"टैम्पल "

"अयोध्या - राम"टैम्पल "--------० ------------------मित्र देश का साथी, था वह बोल रहा ?है हमें बनाने को ,निर्णय मन से लिया | शिव मंदिर यहाँ पर, टैंपल राम अयोध्या || अजब दीवाना जीवन, लौटकर आए न आए, सागर सा यह हृदय, फूल मरुस्थल खिलाए,स्वप्न टीसते रहते,टैंपल राम अयोध्य



ओल्गा लैडिजेनस्काया : ( नफरत करने वालों के लिए है सबक...)

नफरत का जवाब हमेशा नफरत नहीं हो सकताहै, वक्त-वक्त पर बहुत से लोगों ने इस बात को साबित किया है । आज हम आपकोएक महान रशियन गणितज्ञ की कहानी बता रहे हैं, जिनके पिताकी नफरत की वजह से हत्या कर दी गई और उनके परिवार को तमाम दुश्वारियां झेलनी पड़ी। ...बावजूद आज वह पूरी दुनिया



माँ बसुन्धरा

 माँ बसुन्धरा कोनमन करेंदो फूल श्रधा केअर्पण करेंन होने दें क्षरणमाँ कासब मिलकर यह प्रणकरें।कितना सुन्दर धरतीमाँ का आँचलपल रहा इसमें जगसारा,अपने मद के लिएक्यों तू मानवफिरता मारा-मारासंवार नहीं सकतेइस आँचल को तोविध्वंस भी तो नाकरें,माँ बसुन्धरा कोनमन करें।हिमगिरी शृंखलाओंसे निरंतरबहती निर्मल जलधारा





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