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अलग अलग

अलग अलग आती मुश्किलें, अलग अलग जाल हैं. अपने अपने शौक हैं सब के, अपने अपने ख्याल हैं, उलझी उलझी सी राहें, बिखरा बिखरा सा है सफर, टूटी टूटी सी नींद आती, टुकड़े टुकड़े आते ख्वाब हैं. लाख लाख इच्छाएं सबकी,हजार हजार हैं कोशिशें, पाव पाव सब पा लेते, पौने पौने रह जाते सवाल



"अयोध्या - राम"टैम्पल "

"अयोध्या - राम"टैम्पल "--------० ------------------मित्र देश का साथी, था वह बोल रहा ?है हमें बनाने को ,निर्णय मन से लिया | शिव मंदिर यहाँ पर, टैंपल राम अयोध्या || अजब दीवाना जीवन, लौटकर आए न आए, सागर सा यह हृदय, फूल मरुस्थल खिलाए,स्वप्न टीसते रहते,टैंपल राम अयोध्य



ओल्गा लैडिजेनस्काया : ( नफरत करने वालों के लिए है सबक...)

नफरत का जवाब हमेशा नफरत नहीं हो सकताहै, वक्त-वक्त पर बहुत से लोगों ने इस बात को साबित किया है । आज हम आपकोएक महान रशियन गणितज्ञ की कहानी बता रहे हैं, जिनके पिताकी नफरत की वजह से हत्या कर दी गई और उनके परिवार को तमाम दुश्वारियां झेलनी पड़ी। ...बावजूद आज वह पूरी दुनिया



माँ बसुन्धरा

 माँ बसुन्धरा कोनमन करेंदो फूल श्रधा केअर्पण करेंन होने दें क्षरणमाँ कासब मिलकर यह प्रणकरें।कितना सुन्दर धरतीमाँ का आँचलपल रहा इसमें जगसारा,अपने मद के लिएक्यों तू मानवफिरता मारा-मारासंवार नहीं सकतेइस आँचल को तोविध्वंस भी तो नाकरें,माँ बसुन्धरा कोनमन करें।हिमगिरी शृंखलाओंसे निरंतरबहती निर्मल जलधारा





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