सच्चाई

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सुविचार

मनुष्य के कथनी और करनी में अन्तर नही होना चाहिए



सच्चाई

कब तक तुम मुंह मोडोगे, आखिर सच्चाई से ; कब तक मुंह छुपाओगे ,सच्चाई जानने वालों से।झूठे ख्वाबों के ढेर पर बैठ,कब तक खुशफहमी पालेंगे;नकली खुशियों के ये ढेर,यूं ही जल्दी से बिखर जाएंगे।वास्तविकता आधार पर टिकी है,गलतफहमी ना पालों;बनावटी बातों का आधार नहीं, कोई खुशफहमी ना पालों



' लम्हा '

इतने लम्बे इंतजार के बाद पल भर के लिए खुशयां आई,पलक झपकते पल बीता और फिर किस्मत ने मेरी हंसी उडाई,किस्मत की बात करू तो किस्मत हँस पड़ती है ,हंसने की बात करू तो आखें छलक पड़ती है,बीतें लम्हों में जिंदगी बीतते है.कितनी पुरानी जिंदगी में हर पल नया पाते है,ख्यालो में जिंदगी को सिर्फ पाते है,इस तलाश में ना



कसैले पन का कसाव

(कसैलेपन का कसाव) मेड़मफोटो खीचेंगी यह लाईन अभद्रता भरी लाईन या अभद्रता की प्रतीक थी। एक चाटा भरी आवाजके साथ प्रतीक वर्दियों से घिर गया। किसी के कमर मे काली बेल्ट पैरो मे काले जूतेजिसमे चेरी की पोलिस ही चमक रही थी। किसी के कमर मे बंधी लाल बेल्ट पैरो मे लालजूता वह दरोगा या कह लो सब इंस्पेक्टर यह ला



जिदंगी खूबसूरत है

जिदंगी जैसी है यारो; खूबसूरत है,है ख़ुशी की भी ग़मों की भी जरुरत है,ना चला है जोड़ जीवन में किसी भी वीर का,वक़्त के साम्राज्य में किसकी हुकूमत है ?बचपना, क्या बुढ़ापन,कैसी जवानी है,तेरी-मेरी, यार सबकी इक कहानी है,मुस्कुराहट खिल रही थी जिन लबों पे कल तलक ,आज उन आँखों में भी खामोश पानी है,था कही जिन आँखों



जीवन की सच्चाई





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