सद्ज्ञान

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इन्र्दिय सुख की अधिकता से बचें :- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरा धाम पर जन्म लेने के बाद मनुष्य अपने जीवन में पग पग पर सावधानी के साथ कदम बढ़ाता है | संसार में किससे अपना हित होना है और किससे अहित होना है इस विषय में मनुष्य बहुत ही सावधान रहता है , परंतु जिससे उसे सावधान रहना चाहिए वह उससे सावधान नहीं रह पाता | मनुष्य को किस से सावधान रहना चाहिए ? इसके वि





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