सफाई

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सफाई कर्मचारियों के हक और अधिकारों की दास्तां को बयां करती हुई नरेंद्र वाल्मीकि की कविता 'आखिर कब तक'

आखिर कब तकआखिर कब तककरते रहोगे अमानवीय कामढोते रहोगे मलमूत्रमरते रहोगे सीवरों मेंनिकालते रहोगे गंदी नालियाँढोते रहोगे लाशेंआखिर कब तकसहोगे ये जुल्मकब तक रहोगेखामोश ?सुनो सफाईकर्मियों !अब बजा दोबिगुलइन गंद



सफाई कामगार समुदाय को उनके पुशतैनी कार्यो को छोड़ने की अपील करती हुई नरेन्द्र वाल्मीकि की कविता "छोड़ दो"

छोड़ दोआधुनिकता केदौर मेंनित नई-नईखोज हो रही है।कभी मंगल तोकभी चाँदपर बसने की टोह हो रही है।ये सबदेखते हुए भीतुम -नही सीख रहे हो,अभी भीजीवन ज



युवा कवि नरेन्द्र वाल्मीकि की समाज को प्रेरित करने वाली कविता "उजाले की ओर"

उजाले की ओर हमारे पूर्वजहमारा अभिमान है,हमारे पूर्वज इसदेश की मूल संतान हैं,हमारे पूर्वज कभीशासक हुआ करते थेइस देश के।हमारे पूर्वजों कोगुलाम बनाकरकराये गये घृणित कार्यअब समय आ गया हैइन कार्यों को छोड़ने काअपने पूर्वजों के गौरव कोआगे बढ़ान



वैष्णव जन तो ते नर कहिये पीर पराई जान रे ( स्वच्छता अभियान )

वैष्णव जन तो ते नर कहिये पीरपराई जान रे (स्वच्छता अभियान ) डॉ शोभा भारद्वाज महात्मा गाँधी जी की 150 वींजयंती के अवसर पर सूर्या संस्थान नोएडा में आयोजित सर्वधर्म समभाव गोष्ठी के अवसरपर विभिन्न धर्म गुरु के भाव पूर्ण प्रवचनों को सुनने का अवसर मिला | सफाईकर्मचारियों द्वारा तैयार जलपान सबने गृहण किया



इन तरीकों से चुटकियों में करें फ्रिज की सफाई

अब जैसे-जैसे गर्मियों ने दस्तक देनी शुरू कर दी हैं, हर किसी को एक चीज की सबसे ज्यादा जरूरत महसूस होगी, वह है फ्रिज। ठंडा पानी पीने से लेकर खाना खराब होने से बचाने के लिए फ्रिज का इस्तेमाल किया जाता है। खासतौर से, गर्मी के मौसम में तो इसकी जरूरत हर घर में महसूस होती है। जहां फ्रिज आपकी जरूरतों का ध्य



हमारे अपने सफाई कर्मचारी

हमारे अपने सफाई कर्मचारी डॉ शोभा भारद्वाज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने स्वच्छता अभियान से जोड़नेके लिए जाने माने महानुभावों ,समाज के विभिन्न वर्गों के करीब 2000 लोगों को पत्र लिख कर सफाई अभियान का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया है इनमें पूर्व न्यायाधीश, अवकाश प्राप्त अधिकारी, वीरता पुरस्कार क



कूड़ा तेरे रूप हजार

कूड़े कचरे की बात तो हम बहुत करते है लेकिन सच तो यह है की अगर हमसे कहा जाये की कूड़े को पैदा ही न होने दिया जाये तो शायद हम एक बार बिना सोचे हां कर दे लेकिन ऐसा करना हमारे लिए संभव नहीं तो कम से कम कठिन जरूर है, क्योंकि जिसे हम कूड़ा कहते है वास्तव में वो हमारी सुख





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