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भीषण गर्जना

अत्यंत दुर्बल परिस्तिथि में..एक साहसीय भीषण गर्जना,चारो ओर सन्नाटा..आपस में तांकते महा विभोर, दुःख.. कठिनाई.. तनाव.. समस्या..सब खड़े मौन,विस्मित मन से सोच रहे,अब हो गया इनका विरोध,कैसे करेंगे परेशान अब,सुन कर उसकी गर्जना,पीछे खड़ा.. सहमा हुआ डर..डर रहा था आगे आने को,सोच



17 जनवरी 2019

3 सबसे शक्तिशाली प्रेरणाएँ।

हम सभी के पास ऐसा समय होता है जब हम अपनी योजनाओं से नहीं चिपके होते हैं, हम जो कर रहे हैं उसके बारे में कुछ भी महसूस नहीं कर रहे होते, और जब हम जानते हैं कि हमें बस चलने के लिए कुछ प्रेरणा प्राप्त करने की आवश्यकता है।सामान्य प्रेरक सुझाव हमेशा बहुत मददगार नहीं होते हैं।लेकिन तीन प्रेरणाएँ हैं जो मुझ



“मुक्तक” साहस इनका देखिए झोली में पाषाण।

कहते हैं मेरा वतन बात-बात में वाण। आतंकी के देश से आया कैसे गैर- मिला मंच खैरात का नृत्य कर रहा भाण॥-१ लेकर आओ हौसला हो जाए दो हाथ। क्यों करते गुमराह तुम सबके मालिक नाथ। बच्चे सभी समान हैं तेरे मेरे लाल- उनसे छल तो मत करों खेलें खाएँ साथ॥-२शौर्य तुम्हारा देखता सीधा सकल ज



साहसी बालक

शुभ वर्षा का समय मेघ नभ में छाये थे,त्रण संयुत थी भूमि दृश्य भी मन भाये थे Iथा शुभ प्रात: काल विहग उड़ते बहु सुन्दर,शीतल मंद सुगन्ध सनी थी पवन मनोहर Iनिज-निज शय्या त्याग शौच से छुट्टी पाकर,चले निरावन खेत कृषक मन में हर्षा कर Iपुस्तक ले निज हाथ चले बालक पाठशाला,कर ईश्वर का ध्यान यती-जन फेरे माला Iदेखो





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