आलोक कौशिक की कुछ साहित्यिक कृतियां

👇 'आलोक कौशिक' की कुछ साहित्यिक कृतियों को इस लिंक पर Click करके पढ़ें:- 👇Some Literary Works Of Alok Kaushik



धरती करे पुकार - अब मुझे यूं ना सताओ

कहीं कांप रही धरती. कहीं बेमौसम बारिश से बह रही धरती. कहीं ठंड के मौसम में बुखार से तप रही धरती. कभी जल से, तो कभी वायु प्रदूषण से ज़हरीली हो रही प्रकृति. विकास के नाम पर विनाश का दर्द झेलती प्रकृति अपनी ही संतति से अवहेलना प्



बोझ

लघुकथाबोझक्या पुरूष, क्या स्त्री, क्या बच्चे , सब के सब आधुनिकता के घोड़े पर सवार फैशन की दौड़ में भाग रहे थे और वह किसी उजबक की तरह ताक रहा था । गाँव से आया वह पढा लिखा आदमी, भूल से , एक भव्य माल में घुस आया था और अब ठगा-सा खड़ा था।उसकी नजर एक आदमी पर पड़ी जो एक स्टील के बेंच पर बैठा था। उसके पास



वो बॉलीवुड फ़िल्में जिनमें हिंदी साहित्य बना प्रेरणा

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वो लेखक जिन्होंने वक्त से पहले छोड़ दी दुनिया

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मौजूदा लेखकों की चुनौतियां

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अब हिंदी में भी पसंद किया जा रहा है डिजिटल किताबों को।

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मनुष्य योनि में मानव जीवन का सद्पयोग - सिलिकॉन वैली छोड़ कर रहे आर्गेनिक खेती |

वर्तमान भारतीय शिक्षा व्यबस्था जो की ब्रिटिश हुक़ूमत के समयानुसार भारतीय मूल्यों व् सभ्यता-संस्कृति को सामान्य भारतीय जन-मानस के मन-मष्तिस्क में स्वयं का ही परिहास कराकर पच्छिमी भौतिक वैज्ञानिक शिक्षा को ही सर्वमान्य परपेछित कर आज के भारतीय युवा-वर्ग को सीमित बौद्धिक छमताओ में किसी श्रापबंध से बांध



राहुल सांकृत्यायन जी की जीवनशैली है आपके लिए एक प्रेरणा - Rahul Sankrityayan

Rahul Sankrityayan in Hindi- भारत में एक से बढ़कर एक साहित्यकार हुए और इनकी हमेशा से यही कोशिश रही है कि वे हिंदी भाषा का समय-समय पर प्रचार करता रहता है। यहां हम बात हिंदी साहित्यिक राहुल सांकृत्यायन जी के बारे में बात करने जा रहे हैं। जब साहित्य की किताबें हिन्दी से ज्यादा हिंग्लिश की ओर जोर मारने



चप्पल वाला दुध

रमेश को बहुत आश्चर्य हुआ।मोन उसके हाथ में चप्पल पकड़ा रहा था। रमेश ने लेने से मना किया तो मोनू रोने लगा। रमेश के मामा ने समझाया, भाई हाथ में पकड़ लो, वरना मोनू दुध नहीं पियेगा। रमेश ने चप्पल हाथ में ले लिया। फिर मोनू एक एक करके मामा , फिर मामी के हाथ में चप्पल पकड़ाते गया। ज



पाँच रूपये

बात लगभग अस्सी के दशक की है . जितने में आजकल एक कप आइसक्रीम मिलता है , उतने में उनदिनों एक किलो चावल मिल जाया करता था. अंगिरस 6 ठी कक्षा का विद्यार्थी था. उसके पिताजी पोस्ट ऑफिस में एक सरकारी मुलाजिम थे. साईकिल से पोस्ट ऑफिस जाते थे. गाँव में उनको संपन्न लोगो में नहीं , त



इंडियन कॉमिक्स फैंडम अवार्ड्स 2018 #ICFA_2018

भारतीय कॉमिक्स संसार से जुड़े कलाकारों और प्रशंसकों के कार्य और कल्पना को सलामी देते इंडियन कॉमिक्स फैंडम अवार्ड्स का इस वर्ष का संस्करण शुरू हो चुका है . अपने पसंदीदा कलाकारों को विभिन्न श्रेणियों में नामित करें. अधिक जानकारी के लिए निम्नलिखित लिंक पर जायें - Indian Comi



मैं रथ का टूटा हुआ पहिया हूं - डॉ. धर्मवीर भारती | Hindi Poem | Dharmvir Bharti

श्री धर्मवीर भारति हिंदी साहित्य के प्रयोगवादी कवि थे | डॉ. भारति हिंदी की साप्ताहिक पत्रिका 'धर्मयुग' के प्रधान संपादक थे। भारत सरकार द्वारा 1972 में डॉ. धर्मवीर भारती को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। रथ का टूटा हुआ पहिया हूं धर्मवीर भारति की सर्वश्रेस्ट और लोकप्रिय कविताओं में से एक है | महाभारत



रविंद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कहानियां - भिखारिन (Bhikharin story in hindi by Rabindranath Tagore) अन्धी प्रतिदिन मन्दिर के दरवाजे पर जाकर खड़ी होती,

रविंद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कहानियां - भिखारिन (Bhikharin story in hindi by Rabindranath Tagore)अन्धी प्रतिदिन मन्दिर के दरवाजे पर जाकर खड़ी होती, दर्शन करने वाले बाहर निकलते तो वह अपना हाथ फैला देती और नम्रता से कहती- "बाबूजी, अन्धी पर दया हो जाए।"वह जानती थी कि मन्दिर में आने वाले सहृदय और श्रद्ध



काबुलीवाला - रवींद्रनाथ टैगोर | Rabindranath Tagore story in hindi - Kabuliwala

रविंद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कहानियां - काबुलीवाला (Kabuliwala story in hindi by Rabindranath Tagore)मेरी पाँच वर्ष की छोटी लड़की मिनी से पल भर भी बात किए बिना नहीं रहा जात



महादेवी वर्मा की 11 प्रसिद्ध कवितायेँ - Mahadevi verma poems in hindi

महादेवी वर्मा हिंदी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से एक है |शचीरानी गुर्टू ने भी महादेवी वर्मा की कविता (Mahadevi verma poems) को सुसज्जित भाषा का अनुपम उदाहरण मान



"सोशल मीडिया पर साहित्य, लाभ या हानि"

"सोशल मीडिया पर साहित्य- लाभ या हानि" "हानि लाभ जीवन मरन जस अपजस बिधि हाथ", बाबा तुलसी दास जी ने कुछ भी नहीं छोड़ा, हर विषय पर कटु सत्य को उजागर कर गए। काश उस समय सोशल मीडिया होता तो हमें अपने मन से कुछ भी लिखने की जरूरत न पड़ती और हम कट, पेष्ट या गूगल सर्च करके उन्हीं के विचार छाप देते और सम्मानित हो



साहित्य का महाकुम्भ इस साल और भी बड़ा, और भी भव्य

'साहित्य आज तक' फिर लौट आया है. इसके साथ ही नवंबर के मध्य में राजधानी में फिर से सज रहा है साहित्य के सितारों का महाकुंभ. तीन दिनों के इस जलसे में हर दिन साहित्य और कलाप्रेमी देख और सुन सकेंगे शब्द, कला, कविता, संगीत, नाटक, सियासत और संस्कृति से जुड़ी उन हस्तियों को, जिन्ह



भास्कर मलीहाबादी

पंख लगा देता अगर,छेरी के करतार ।तो हरियाली से रहित, होता यह संसार ।। -भास्कर मलीहाबादी



सबसे अच्छी दोस्त

सबसे अच्छी दोस्त-मनोहर चमोली ‘मनु’निहारिका ने राजेश से कहा-‘‘पापा। कल स्कूल में पेरेंट्स मीटींग है। आप आओगे न?’’राजेश नोटबुक पर झुका हुआ था। निहारिका की ओर देखे बिना बोला-‘‘साॅरी बेटी। कल आॅपिफस में जरूरी मीटींग हैं। बट डोंट वरी। मम्मी से कहो। वो चली जाएंगी।’’निहारिका उदास हो गई। धीरे से बोली-‘‘मम्म



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