'जय भीम' का नारा

जाटव सभा में तय किया गया कि दलित जब भी आपस म



तू कोमल कली

तु वो बाग़ की कोमल कली हैतुझे तोड़ा अधर्मी वो बली हैजिसे तूने तन मन से माना हैउसने ही तुझे ये पापी दाग़ में साना हैमैं माली हूँ बाग़ से टूटे कली कातु कर भरोसा मेरे साँस कीतेरा छोड़ अब किसका होने वाली हूँतुझे डर किस बात कीदेख मुझे हज़ारों ग़म है फिर भी मतवाली हूँतु छंद है मेरे पंक्तियों की मैं नशा



शब्द रूचि

मैं शब्द रूचि उन बातों की जो भूले सदा ही मन मोले-2अँगड़ाई हूँ मैं उस पथ का जो चले गए हो पर शोले-2हर बूँदो को हर प्यासे तक पहुँचाने का आधार हूँ मैं-2मैं बड़ी रात उन आँखो का जो जागे हो बिना खोलें-2जो कभी नहीं बोला खुल कर वो आशिक़ की जवानी हूँ।-2मीरा की पीर बिना बाँटे राधा के श्याम सुहाने हैं।-2



दूरदर्शन पर चर्चा : सोशल साइट, साहित्य और महिलाएं

https://vishwamohanuwaach.blogspot.com/2020/03/blog-post_65.htmlमहिला, साहित्य और सोसिअल साईट https://youtu.be/9RQcAyqOAUc



महाभारत :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस सम्पूर्ण संसार में जब कहीं किसी सभ्यता का अस्तित्व नहीं था तब भारतीय सनातन सभ्यता एवं दिव्य इतिहास ने सकल मानव समाज को एक नई दिशा प्रदान की हमारे धर्मग्रन्थों के प्रणेता भगवान वेदव्यास जी के द्वारा लिखित अनेक ग्रन्थों ने मानव को जीवन जीने की कला सिखाई | सनातन धर्म के चार वेद , अठारह पुराण , छ: श



कविता मौन ही होती है ...(कविता-संग्रह)

'कविता मौन ही होती है...’ मेरे द्वारा लिखित कविताओं का संग्रह है जो भिन्न-भिन्न समय और मानसिक अवस्था में लिखी गयीं हैं. कविता भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है जिसमें व्यक्ति एक अलग ही तरह का मानसिक सुख पाता है. यह सुख व्यक्तिगत होता है लेकिन कई बार यह व्यक्तिगत से सार्वजनिक भाव भी रखता है.भावनाएं कभी स



रश्मि के नाम कुछ खत... (कविता-संग्रह)

रश्मि के नाम कुछ खत... (कविता-संग्रह)‘रश्मि के नाम कुछ खत...’ मेरे द्वारा लिखित कविताओं का संग्रह है जो भिन्न-भिन्न समय और मानसिक अवस्था में लिखी गयीं हैं. कविता भावनाओं की अभिव्यक्ति होती है, जिसमें व्यक्ति एक अलग ही तरह का मानसिक सुख पाता है. यह सुख व्यक्तिगत होता है ल



आलोक कौशिक की कुछ साहित्यिक कृतियां

👇 'आलोक कौशिक' की कुछ साहित्यिक कृतियों को इस लिंक पर Click करके पढ़ें:- 👇Some Literary Works Of Alok Kaushik



धरती करे पुकार - अब मुझे यूं ना सताओ

कहीं कांप रही धरती. कहीं बेमौसम बारिश से बह रही धरती. कहीं ठंड के मौसम में बुखार से तप रही धरती. कभी जल से, तो कभी वायु प्रदूषण से ज़हरीली हो रही प्रकृति. विकास के नाम पर विनाश का दर्द झेलती प्रकृति अपनी ही संतति से अवहेलना प्



बोझ

लघुकथाबोझक्या पुरूष, क्या स्त्री, क्या बच्चे , सब के सब आधुनिकता के घोड़े पर सवार फैशन की दौड़ में भाग रहे थे और वह किसी उजबक की तरह ताक रहा था । गाँव से आया वह पढा लिखा आदमी, भूल से , एक भव्य माल में घुस आया था और अब ठगा-सा खड़ा था।उसकी नजर एक आदमी पर पड़ी जो एक स्टील के बेंच पर बैठा था। उसके पास



वो बॉलीवुड फ़िल्में जिनमें हिंदी साहित्य बना प्रेरणा

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मौजूदा लेखकों की चुनौतियां

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अब हिंदी में भी पसंद किया जा रहा है डिजिटल किताबों को।

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मनुष्य योनि में मानव जीवन का सद्पयोग - सिलिकॉन वैली छोड़ कर रहे आर्गेनिक खेती |

वर्तमान भारतीय शिक्षा व्यबस्था जो की ब्रिटिश हुक़ूमत के समयानुसार भारतीय मूल्यों व् सभ्यता-संस्कृति को सामान्य भारतीय जन-मानस के मन-मष्तिस्क में स्वयं का ही परिहास कराकर पच्छिमी भौतिक वैज्ञानिक शिक्षा को ही सर्वमान्य परपेछित कर आज के भारतीय युवा-वर्ग को सीमित बौद्धिक छमताओ में किसी श्रापबंध से बांध



राहुल सांकृत्यायन जी की जीवनशैली है आपके लिए एक प्रेरणा - Rahul Sankrityayan

Rahul Sankrityayan in Hindi- भारत में एक से बढ़कर एक साहित्यकार हुए और इनकी हमेशा से यही कोशिश रही है कि वे हिंदी भाषा का समय-समय पर प्रचार करता रहता है। यहां हम बात हिंदी साहित्यिक राहुल सांकृत्यायन जी के बारे में बात करने जा रहे हैं। जब साहित्य की किताबें हिन्दी से ज्यादा हिंग्लिश की ओर जोर मारने



चप्पल वाला दुध

रमेश को बहुत आश्चर्य हुआ।मोन उसके हाथ में चप्पल पकड़ा रहा था। रमेश ने लेने से मना किया तो मोनू रोने लगा। रमेश के मामा ने समझाया, भाई हाथ में पकड़ लो, वरना मोनू दुध नहीं पियेगा। रमेश ने चप्पल हाथ में ले लिया। फिर मोनू एक एक करके मामा , फिर मामी के हाथ में चप्पल पकड़ाते गया। ज



पाँच रूपये

बात लगभग अस्सी के दशक की है . जितने में आजकल एक कप आइसक्रीम मिलता है , उतने में उनदिनों एक किलो चावल मिल जाया करता था. अंगिरस 6 ठी कक्षा का विद्यार्थी था. उसके पिताजी पोस्ट ऑफिस में एक सरकारी मुलाजिम थे. साईकिल से पोस्ट ऑफिस जाते थे. गाँव में उनको संपन्न लोगो में नहीं , त



इंडियन कॉमिक्स फैंडम अवार्ड्स 2018 #ICFA_2018

भारतीय कॉमिक्स संसार से जुड़े कलाकारों और प्रशंसकों के कार्य और कल्पना को सलामी देते इंडियन कॉमिक्स फैंडम अवार्ड्स का इस वर्ष का संस्करण शुरू हो चुका है . अपने पसंदीदा कलाकारों को विभिन्न श्रेणियों में नामित करें. अधिक जानकारी के लिए निम्नलिखित लिंक पर जायें - Indian Comi



मैं रथ का टूटा हुआ पहिया हूं - डॉ. धर्मवीर भारती | Hindi Poem | Dharmvir Bharti

श्री धर्मवीर भारति हिंदी साहित्य के प्रयोगवादी कवि थे | डॉ. भारति हिंदी की साप्ताहिक पत्रिका 'धर्मयुग' के प्रधान संपादक थे। भारत सरकार द्वारा 1972 में डॉ. धर्मवीर भारती को पद्मश्री से सम्मानित किया गया। रथ का टूटा हुआ पहिया हूं धर्मवीर भारति की सर्वश्रेस्ट और लोकप्रिय कविताओं में से एक है | महाभारत



रविंद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कहानियां - भिखारिन (Bhikharin story in hindi by Rabindranath Tagore) अन्धी प्रतिदिन मन्दिर के दरवाजे पर जाकर खड़ी होती,

रविंद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कहानियां - भिखारिन (Bhikharin story in hindi by Rabindranath Tagore)अन्धी प्रतिदिन मन्दिर के दरवाजे पर जाकर खड़ी होती, दर्शन करने वाले बाहर निकलते तो वह अपना हाथ फैला देती और नम्रता से कहती- "बाबूजी, अन्धी पर दया हो जाए।"वह जानती थी कि मन्दिर में आने वाले सहृदय और श्रद्ध



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