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सभी महिलाओं को समर्पित

सभी महिलाओं को समर्पित============================बेटा घर में घुसते ही बोला ~ मम्मी, कुछ खाने को दे दो, बहुत भूख लगी है.यह सुनते ही मैंने कहा ~ बोला था ना, ले जा कुछ कॉलेज. सब्जी तो बना ही रखी थी.बेटा बोला ~ मम्मी, अपना ज्ञान ना ... अपने पास रखा करो. अभी जो कहा है, वो कर दो बस, और हाँ, रात में ढंग क



मातृशक्ति

जननी दर्द सहन कर सृष्टि करती है,जीवन संतति को समर्पित करती है।गृहस्थी के चुल्हे में ईंधन बनती है,जैसे यज्ञवेदी में समिधा जलती है।सुबह-शाम आग से वह खेलती है,तब हमें लजीज व्यंजन परोसती है।वह प्रेम पात्र तो बन जाती है,फिर भी विश्वास नहीं पाती है।अपना सर्वस्व न्यौछावर करती है,फिर भी इतना दुःख क्यों सहती



हे राम तीस जनवरी की शाम बापू के अंतिम शब्द

“हे राम” तीसजनवरी 1948की शाम राष्ट्रपितामहात्मा गांधी के अंतिम शब्द <!--[if !supportLineBreakNewLine]--><!--[endif]-->डॉ शोभाभारद्वाज<!--[if !supportLineBreakNewLine]--><!--[endif]-->संयुक्त भारत दोटुकड़ों में बार चुका था भारत एवं पश्चिमी ,पूर्वी पाकिस्तान (1971 में पाकिस्तानसे अलग बना बंगलादेश ) अफ़स



कसक

लघुकथा कसकदिन ढले काफी देर हो चुकी थी ।शाम, रात की बाहों में सिमटने को मजबूर थी । वो कमरे में अकेला था । सोफे का इस्तमाल बैड की तरह कर लिया था उसने । आदतन अपने मोबाईल पर पुरानी फिल्मों के गाने सुनकर रात के बिखरे अन्धेरे में उसे मासूमियत पसरी सी लगी । वो उन गानों के सुरीलेपन के बीच अपने तल्ख हुए सु



बूढ़े बाबा ---- वृद्ध दिवस पर

वरिष्ठजन दिवस पर मेरी एक रचना उन बुजुर्गो के नाम जो अपने घर आँगन में सघन छांह भरे बरगद के समान है | जो उनकी कद्र जानते हैं उन्ही के मन के भाव ----बाबा की आँखों से झांक



चालीस शहीद

जदों चाली जवानां दी अर्थी उठा के चलनगेमोदी राहुल केजरीवाल सब हुमहुमा के चलनगेचलनगे नाल नाल दोस्त दुशमन सारे वखरी ऐ गल कि अंदरो अंदरी गुर्राकेचलनगेरहीयां होन भावें परिवार दे तन तेंलीरां जख्मी बैडां ते ही मुआवजा चैक थमाके चलनगेकुछ फसली बटेरे इमरान हाफिज दे पोस्टर जलाके चलनगेविशेषज्ञ चैनल



मानव सेवी बाबा आमटे की जीवनी

जीवनी - मानवसेवी बाबा आमटे " अर्पित हो मेरा मनुज काय , बहुजन हिताय ,बहुजन सुखाय " सामान्यतः प्रत्येक मनुष्य का सहज स्वभाव होता है कि वह जीवन में स्वयं के लिए बहुत कुछ करना चाहता है । अपने परिवार ,बंधु - बांधवों के प्रति ज़िम्मेदारियाँ निभाने के प्रति सजग रहता है , प्रतिबद्ध रहता है लेकिन कु



अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस (८ मार्च) के सुअवसर पर नारी को समर्पित कविता : सूखी नदी

सूखी नदी''जब मैं सागर थीतबसमाहित होती थीसैकडों जलधाराएँमुझमें आकर..........विजिट :- http://www.safaltasutra.com/2017/03/8.htmlदोस्तों 'सफलता सूत्र ' के हमारे यूट्यूब चैनेल 'सफलता सूत्र Safalta Sutra' पर महिला दिवस की उक्त कविता व अन्य ज्ञानवर्धक, उपयोगी, रोचक विडियो



सीकचे

बहुत अच्छे है वे लोग जो सीकचो में है उनके हाथो और पैरो में बेड़िया है उन्हें पता है वे किस जुर्म की सजा भुगत रहे है .......पर वोजिनके सीकचे दिखाई नहीं देते और न ही दिखाई देती है उनके हाथो और पैरो की बेड़ियाउन्हें नहीं पता की उनकी सजा किस जुर्म की है......ता उम्र यही ढूँढती रहती है और उम्र कट जाती है .





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