त्रिपिण्डी श्राद्ध :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म के अनुयायी अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए धर्म और शास्त्रों के अनुसार हविष्ययुक्त पिंड को प्रदान करते हैं यही कर्म श्राद्ध कहलाता है | जब मनुष्य अपने पितरों के लिए श्रद्धा करते हैं तो इससे उनके पितरों को शांति मिलती हैं और वे सदैव प्रसन्न रहते हुए दीर्घायु, प्रसिद्धि एवं कुसलता प्



दान की परिभाषा :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*दान की परिभाषा:-----**द्विहेतु षड्धिष्ठानाम षडंगम च द्विपाक्युक् !* *चतुष्प्रकारं त्रिविधिम त्रिनाशम दान्मुच्याते !!**अर्थात :-- “दान के दो हेतु, छः अधिष्ठान, छः अंग, दो प्रकार के परिणाम (फल), चार प्रकार, तीन भेद और तीन विनाश साधन हैं, ऐसा कहा जाता है ।”**👉 दान के दो हेतु हैं :--- दान का थोडा होना



श्राद्ध के अधिकारी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में मनुष्य की अंतिम क्रिया से लेकर की श्राद्ध आदि करने के विषय में विस्तृत दिशा निर्देश दिया गया है | प्रायः यह सुना जाता है पुत्र के ना होने पर पितरों का श्राद्ध तर्पण या फिर अंत्येष्टि क्रिया कौन कर सकता है ? या किसे करना चाहिए ?? इस विषय पर हमारे धर्म ग्रंथों में विस्तृत व्याख्या दी ह



श्राद्ध की सरलतम विधि :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में पितृऋण से उऋण होने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को समय समय पर विशेष रूप से श्राद्घपक्ष (पितृपक्ष) में अपने पितरों के लिए तर्पण , श्राद्ध / पिंडदानादि करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है | बिना श्राद्ध / तर्पण किये व्यक्ति सुखी नहीं रह सकता तथा पितृदोष से ग्रसित हो जाता है | वैसे तो हमारे ध



समुद्रमन्थन का रहस्य :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारे सनातन ग्रंथों में एक कथानक पढ़ने को मिलता है जो समुद्र मंथन के नाम से जाना जाता है | देवताओं एवं दैत्यों ने अमृत प्राप्त करने के लिए मन्दाराचल को मथानी एवं वासुकि नाग को रस्सी बनाकर समुद्र का मन्थन किया | अथक परिश्रम से मन्थन करने के बाद समुद्र से अमृत निकला परंतु अमृत निकलने के पहले समुद्र स



अनन्त चतुर्दशी :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में मानव कल्याण के लिए अनेकों व्रत विधान की एक लंबी श्रृंखला है जो कि जो मानव जीवन के कष्टों को हरण करते हुए मनुष्य को मोक्ष दिलाने का साधन भी है | इसी क्रम में भाद्रपद शुक्लपक्ष की चतुर्दशी को "अनंत चतुर्दशी" का व्रत किया जाता है | भगवान श्री हरि विष्णु को समर्पित है यह व्रत | अनन्त अर्



पयोव्रत एवं वामन अवतार :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म ने मानव जीवन में आने वाली प्राय: सभी समस्याओं का निराकरण बताने करने का प्रयास अपने विधानों के माध्यम से किया है | नि:संतान दम्पत्ति या सुसंस्कृत , सदाचारी सन्तति की प्राप्ति के लिए "पयोव्रत" का विधान हमारे शास्त्रों में बताया गया है | दैत्यराजा बलि के आक्रमण से देवता स्वर्ग से पलायन करके



ब्रह्महत्या के दोष से बचाती है ऋषि पंचमी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*चौरासी लाख योनियों में सबसे अधिक बुद्धिमान , विवेकवान , ऐश्वर्यवान , संपत्तिवान अर्थात सर्वगुण संपन्न होने के बाद भी मनुष्य को गलतियों का पुतला कहां गया है | यहां जाने अनजाने में मनुष्य से नैतिक एवं अनैतिक गलतियां होती रहती हैं | यदि मनुष्य से गलतियां होती रहती है तो उसका प्रायश्चित करने का विधान



कलंक चतुर्थी का रहस्य :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*भारत देश पर्व एवं त्यौहारों का देश है , यहाँ प्रतिदिन कोई न कोई पर्व , उत्सव एवं त्यौहार मनाकर आम जनमानस खुशियाँ मनाता रहता है | अभी विगत दिनों छ: दिवसीय "श्रीकृष्ण जन्मोत्सव" का पर्व धूमधाम से मनाने के बाद आज भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी से पूरे देश में अनुपम श्रद्घा एवं विश्वास के साथ दस दिवसीय विघ्न वि



मन्वन्तर क्या हैं?

मन्वन्तर एक संस्कॄत शब्द है, जिसका संधि-विच्छेद करने पर = मनु+अन्तर मिलता है। इसका अर्थ है मनु की आयु. प्रत्येक मन्वन्तर एक विशेष मनु द्वारा रचित एवं शासित होता है, जिन्हें ब्रह्मा द्वारा सॄजित किया जाता है। मनु विश्व की और सभी प्राणियों की उत्पत्ति करते हैं, जो कि उनकी आयु की अवधि तक बनती और चलती र



क्या सीखें रामायण में वर्णित शबरी प्रसंग से

त्याग, संघर्षपूर्ण जीवन, नि: स्वार्थ सेवा और निष्काम भक्तिरामायण और रामचरित मानस में भगवान श्रीराम की वनयात्रा में माता शबरी का प्रसंग सर्वाधिक भावपूर्ण है। भक्त और भगवान के मिलन की इस कथा को गाते सुनाते बड़े-बड़े पंडित और विद्वान भाव विभोर हो जाते हैं। माता शबरी का त्याग और संघर्षपूर्ण जीवन, नि: स्व



जय श्री राम

देखो ओ दीवानो तुम ये काम ना करो राम का नाम बदनाम ना करो. शायद दशकों पहले किसी गीतकार ने सच ही कहा था. जिस भगवान् राम की मर्ज़ी के बिना पत्ता तक नहीं हिल सकता तो उस भगवान् राम के मंदिर को कोई कैसे तोड़ सकता है. जो इस सम्पूर्ण सृष्टि के रचियेता है,



शादी के बाद क्यों अपनाती हैं महिलाएं पति का गौत्र ?

सनातन धर्म में ऋषियों के आधार पर आगे इनके वंशज स्थापित किए गए। जिसका हम भी हिस्सा हैं। पाणिनीकी अष्टाध्यायी में गोत्र की एक परिभाषा भी मौजूद है - ‘अपात्यम पौत्रप्रभ्रति गोत्रम्’ जिसका मतलब है कि बेटे के ब



त्रिगुणात्मक सृष्टि :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस सृष्टि के जनक जिन्हे ईश्वर या परब्रह्म कहा जाता है वे सृष्टि में घट रही घटनाओं का श्रेय स्वयं न लेकरके किसी न किसी को माध्यम बनाते रहते हैं | परमपिता परमात्मा ने इस सृष्टि की रचना में पंचतत्वों की महत्वपूर्ण भूमिका बनायी और साथ ही इस सृष्टि में तीन गुणों (सत्व , रज एवं तम) को प्रकट किया और सकल स



कर्म और त्याग

सनातन धर्म में कर्म और धर्म दोनों की ही व्याख्या की गई है , पर तथाकथित हिन्दू इन दोनों ही शब्दों का अर्थ अपनी सुविधा के अनुकूल प्रयोग करते रहे है. सनातन धर्म की सुंदरता इसमें है कि उसमे सभी विचार समा जाते है. यही कारण है कि लोग



पूजा का सच्चा अर्थ

पूजा, उपासना जो बिना स्वार्थ के किया जाए, बिना किसी फल की इच्छा से किया जाए, जो सच्चे मन से सिर्फ ईश्वर के लिए किया जाए वो पूजा सात्विक है , सात्विक लोग करते है. जो पूजा किसी फल की प्राप्ति के लिए की जाये, अपने शरीर को कष्ट द



गुरु पूर्णिमा का महत्व

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जाता है| भारतव र्ष में कई विद्वान गुरु हुए हैं, जिन्होंने सनातन धर्म (हिन्दू धर्म) के चारों वेदों की व्याख्या की थी| कहते है जैसे सूर्य की गर्मी से तपती भूमि को



Azaad Bharat: हिन्दुओं को बदनाम और मुसलमानों का बचाने की इंटरनेशनल साजिश तो नही है?

हिन्दुओं को बदनाम और मुसलमानों का बचाव करने की इंटरनेशनल साजिश तो नही है?अंनतनाग में #अमरनाथ यात्रियों पर जो हमला हुआ उसमें #सलीम शेख ने यात्रियों की जान बचा ली और #संदीप शर्मा आतंकवादी पकड़ा गया इस तरह की खबरें मीडिया में चल रही है जो सोची



धंधेबाज दिखाने लगे शैतानियत, हिन्दू धर्मगुरु को धमकी "साईं को भगवान् मानो वरना................ - Dainik Bharat

आप भले ही साई पूजक हों या निंदक, यह आलेख अवश्य पढ़ें।शंकराचार्य जी साँईं बाबा को भगवान नहीं मानते हैं ...और इसलिए नहीं मानते, क्योंकि हमारे वेदों, पुराणों,उपनिषदों या अन्य किसी भी धर्म ग्रंथों में एक "फकीर" की पूजा का निषेध है....मने , उन्हें भगवान नहीं बनाया जा सकता है..



शर्मनाक : राम कृष्ण शिव से महान हो गया अब साईं, हद कर दी हिन्दुओ ने मूर्खता की ! - Dainik Bharat

हिन्दुओ ने मूर्खता की हद ही कर दी है कौन साईं, इसका असली नाम तक नहीं जानते पर मूर्खता में जैसे हिन्दुओ ने पीएचडी ही किया हुआ है ऐसे ही नहीं हिन्दुओ की ये स्तिथि है, की बहुसंख्यक होते हुए भी मार खाते रहते है चाँद मिया पहले तो बन गया साईं, फिर साईं बाबा हो गया पीर ही था, फि



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