अब पछताये क्या होत, जब चिड़ियाँ चुग गयी खेत

अच्छा लग रहा है न आज ऐसे सड़क के किनारे बैठे हुए, इस इंतजार में कि क्या हुआ जो बहु ने निकाल दिया घर से,बेटा तो हमारा है न ,वो हमें लेने जरूर आएगा ।अरे याद करो भाग्यवान आज से 40 साल पहले की बात को मेरे लाख मना करने के बावजूद तुमने मेरी विधवा माँ पर न जाने क्या क्या इल्ज़ाम लगा कर घर से निकाला था। कितनी



चोर की परिभाषा ?

चोर की परिभाषा ?डॉ शोभा भारद्वाजएक प्रसिद्ध चैनल में गरमा गर्म बहस चल रही थी सभी उत्साहित थे ‘भारत सरकार की कूटनीतिक विजय’ पाकिस्तानी आतंकी मसूर अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किया गया चीन ने अपना वीटो वापिस ले लिया |बीच –बीच में नारे लगाये जा रहे थे है हरेक उत्साहित था भारत की कूटनीतिक विजय बहस खत्म



सामूहिक यज्ञोपवीत :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में मनुष्य के जीवन में संस्कारों का बहुत महत्त्व है | हमारे ऋषियों ने सम्पूर्ण मानव जीवन में सोलह संस्कारों का विधान बताया है | सभी संस्कार अपना विशिष्ट महत्त्व रखते हैं , इन्हीं में से एक है :- यज्ञोपवीत संस्कार ! जिसे "उपनयन" या "जनेऊ संस्कार" भी कहा जाता है | ऐसा माना गया है कि मनुष्य



संस्कार - जन्म से पुनर्जन्म

जन्म से पुनर्जन्म – हम बात कर रहेहैं सीमन्तोन्नयन संस्कार की - आज की भाषा में जिसे “बेबी शावर” कहा जाता है | यह संस्कार भी गर्भ संस्कारों का एक महत्त्वपूर्ण अंग है | पारम्परिक रूप से ज्योतिषीय गणनाओं द्वारा शुभ मुहूर्त निश्चित करके उसमुहूर्त में यह संस्कार सम्पन्न किया जाता था | इस संस्कार



संस्कार - जन्म से पुनर्जन्म

जन्म से पुनर्जन्म – बात चल रही थीगर्भ संस्कारों की... उसे ही आगे बढाते हैं...गर्भाधान – आत्मा का पुनर्जन्म – एकशरीर को त्यागने के बाद अपनी इच्छानुसार आत्मा अन्य शरीर में प्रविष्ट होकर नौ माहतक माता के गर्भ में निवास करने का बाद पुनः जन्म लेती है... एक नन्हे से शिशु केरूप



संस्कार - जन्म से पुनर्जन्म

जन्म से पुनर्जन्म –गर्भ संस्कारों में गर्भाधान संस्कार से अगले चरण पुंसवन संस्कार की चर्चा हम कररहे हैं | जैसा कि सभी जानते हैं, जन्म से पूर्व किये जाने वाले संस्कारों में पुंसवन संस्कार का विशेषमहत्त्व माना जाता है और यह गर्भ के तीसरे माह में ज्योतिषी से अच्छे शुभ मुहूर्



संस्कार - जन्म से पुनर्जन्म

जन्म से पुनर्जन्म –गर्भ संस्कार – पुंसवन संस्कार - हमारे मनीषियों ने अनुभव किया कि गर्भ धारण करनेके बाद सबसे पहली आवश्यकता होती है कि माता पिता के आहार-व्यवहार, चिन्तन और भाव सभी को उत्तम और सन्तुलित बनाने का प्रयासकिया जाए | और इसके लिए अनुकूल वातावरण बनाने की भी आवश्यक



संस्कार - जन्म से पुनर्जन्म

जन्म से पुनर्जन्म –गर्भाधान संस्कार की ही बात आगे बढाते हुए अब बात करते हैं गर्भ संस्कारों के अगलेचरण - पुंसवन संस्कार की | गर्भाधाननिर्विघ्न सम्पन्न हो गया, माता पिता दोनों ने स्वस्थ मन औरस्वस्थ शरीर से इस कार्य को सम्पन्न किया तो उसके तीन माह के बाद पुंसवन संस्कार कियेज



संस्कार - जन्म से पुनर्जन्म

जन्म से पुनर्जन्म - बातचल रही है गर्भाधान संस्कार की | यहसंस्कार न तो कोरा धार्मिक अनुष्ठान ही था और न ही काम वासना का प्रतीक था | यह तो एक बहुत ही पवित्र कर्म माना जाता था |उदाहरण के लिए शिव-पार्वती का मंगल मिलन काम वासना के कारण नहीं हुआ था | काम को तो शिव ने कब का जलाक



संस्कार - जन्म से पुनर्जन्म

जन्म सेपुनर्जन्म – बात चल रही है शिशु के जन्म से पूर्व के संस्कारों की | तो इसे ही आगे बढाते हैं...एक बातस्पष्ट कर दें, कि इसलेख की लेखिका यानी कि हम कोई वैद्य या डॉक्टर नहीं हैं,लेकिन वैदिक साहित्य के अध्येता – Vedic Scholar - अवश्य हैं, और ज्योतिष के ही समान आयुर्वेद भी



संस्कार - जन्म से पुनर्जन्म

गृहस्थ जीवनमें प्रवेश के उपरान्त प्रथम क‌र्त्तव्य के रूप में गर्भाधान संस्कार का हीमहत्त्व है |क्योंकि गृहस्थ जीवन का प्रमुख उद्देश्य श्रेष्ठ सन्तान की उत्पत्ति है | अतः उत्तम सन्तान की कामना करने वाले माता पिता को गर्भाधान से पूर्वअपने तन और मन दोनों को पवित्र तथा स्वस्थ रखने



संस्कार - जन्म से पुनर्जन्म

जन्म से पुनर्जन्म – एकऐसी यात्रा – एक ऐसा चक्र जो निरन्तर गतिशील रहता है आरम्भ से अवसान और पुनः आरम्भसे पुनः अवसान के क्रम में – यही है भारतीय दर्शनों का सार जो निश्चित रूप से आशाऔर उत्साह से युक्त है – समस्त प्रकृति का यही तो नियम है | ये समस्त सूर्य चाँद तारकगण उदित होते हैं, इनका अवसान होता



संस्कार - जन्म से पुनर्जन्म

संस्कारों की बात कररहे हैं तो अनेकानेक पुनर्जन्मों की मान्यता को भी अस्वीकार नहीं किया जा सकता है | अत्यन्त आदिम युग में – जिसे हम Primitive Period कहते हैं – संस्कारों का कोई मूल्य सम्भवतःनहीं था | सभ्यता के विकास के साथ ही परिवार तथा समाज कोसुचारू रूप से गतिमान रखने के



Sanskaar संस्कार जन्म से पुनर्जन्म षोडश संस्कार गर्भाधान संस्कार Astrologer

Sanskaarजन्म से पुनर्जन्म“संस्कारों हि नाम संस्कार्यस्य गुणाधानेन वा स्याद्योषाप नयनेन वा || – ब्रह्मसूत्र भाष्य 1/1/4 अर्थात व्यक्ति में गुणों का आरोपण करने के लिए – गुणों का विस्तार करने के लिए जो कर्म किया जाता है वह संस्कार कहलाता है |संस्कार – जन्म से अन्तिम यात्रा त



पिता हमारे वट वृक्ष समान........

“पिता हमारे वट वृक्ष समान” किसी ने सही ही कहा हैं कि ‘पिता न तो वह लंगर होता हैं जो तट पर बांधे रखे, न तो लहर जो दूर तक ले जाएँ. पिता तो प्यार भरी रौशनी होते हैं,जो जहाँ तक जाना चाहों,वहां तक राह दिखाते हैं.’ऐसे ही मेरे पिता हैं,जो चट्टान की तरह दिखने वाले पर एहसास माँ की तरह.घर-परिवार का बोझ



विडियो : मोदी सरकार के मवेशी ख़रीद रोक के विरोध में केरल कांग्रेस ने सड़क पर किया नीच काम !

मोदी सरकार ने गोहत्या पर कानून बना दिया तो सबसे ज्यादा दर्द किसे हुआ ये विडियो देखने के बाद आपको पता चल जाएगा.कांग्रेस ने ना सिर्फ गाय को काटा बल्कि उसकी हत्या का विडियो भी बनाया.जो हाई कोर्ट अभी कुछ दिन पहले यूपी में कत्लखानों को बैन करने पर टिप्णी कर रहा था वो कोर्ट इस



" यदि पैसे ही नहीं थे तो हमें क्यों पैदा किया ? "

'ओल्‍ड इज गोल्‍ड', पुराने समय में ऐसा क्‍या था , क्‍या है जो उसे संजोया जाए । इसे हम यों भी जान सकते हैं , पुराने समय में ऐसा क्‍या नहीं है जो उसे संजोया न जाए । आज के युवकोंमें सम्‍यक शिक्षा की कमी, संस्‍कारों की कमी एवं विकारों की भरमार है । जिसका सूत्रपात 'प्रोफेशनल क्‍वालीफाइड बहू' से प्रारंभ हो





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