हमारी संस्कृति :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*प्राचीन काल से ही सनातन धर्म की मान्यताएं एवं इसके संस्कार स्वयं में एक दिव्य धारणा लिए हुए मानव मात्र के कल्याण के लिए हमारे महापुरुषों के द्वारा प्रतिपादित किए गए हैं | प्रत्येक मनुष्य में संस्कार का होना बहुत आवश्यक है क्योंकि संस्कार के बिना मनुष्य पशुवत् हो जाता है | मीमांसादर्शन में संस्कार क



रात को 12 बजे विश करने से बर्थडे शुभ नहीं बल्कि बन जाता है बेहद अशुभ, जानिए क्या है वजह

साल में सबसे प्यारा एक ही दिन मन जाता है जो की होता है बर्थडे का दिन यानि जिस दिन हम पैदा होते हैं। हर किसी के लिए अपना बर्थडे बेहद खास होता है। इस दिन को और भी ज्यादा खास बनाने के लिए हर कोई हर संभव कोशिश करता है। रात 12 बजे ही बर्थडे विश या बर्थडे पार्टी की शुरूआत हो जाती है। बर्थडे से ज्यादा इस ब



नववर्ष :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*जब से सृष्टि का सृजन हुआ तब से लेकर आज तक सनातन धर्म के छांव तले सृष्टि चलायमान हुई | परिवर्तन सृष्टि का नियम है | जो कल था वह आज नहीं है जो आज है वह कल नहीं रहेगा , दिन बदलते जाते हैं और एक दिन ऐसा भी आता है जिसे मनुष्य वर्ष का पहला दिन मानकर नववर्ष मनाने में लग जाता है | विचारणीय विषय है कि हम स



हमारी मान्यतायें :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारा सनातन धर्म एवं साहित्य इतना व्यापक है कि इसे संसार का स्रोत माना जाता है | संसार की सभी सभ्यतायें , सभी धर्म सनातन से ही निकली हैं ! जिस प्रकार एक परिवार की संतानें क्रोधातिरेक या आपसी मनमुटाव से अलग घर बना लेती हैं ! उसी प्रकार सनातन धर्म में भी कुछ लोग अलग हुए ! उन्होंने अपनी मान्यतायें स्थ



मन एक दर्पण :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर ईश्वर की सर्वोत्कृष्ट कृति बनकर आई मनुष्य | मनुष्य की रचना परमात्मा ने इतनी सूक्ष्मता एवं तल्लीनता से की है कि समस्त भूमण्डल पर उसका कोई जोड़ ही नहीं है | सुंदर मुखमंडल , कार्य करने के लिए हाथ , यात्रा करने के लिए पैर , भोजन करने के लिए मुख , देखने के लिए आँखें , सुनने के लिए कान , एवं



शिखा धारण

*शिखा धारण करने का वैज्ञानिक महत्व 👇* *मस्तकाभ्यन्तरोपरिष्टात् शिरासम्बन्धिसन्निपातो रोमावर्त्तोऽधिपतिस्तत्रापि सद्यो मरणम् - सुश्रुत श. स्थान* *सरलार्थ »» मस्तक के भीतर ऊपर की ओर शिरा तथा सन्धि का सन्निपात है वहीं रोमावर्त में अधिपति है। यहां पर तीव्र प्रहार होने पर तत्काल मृत्यु संभावित है। शिख



अगर समलैंगिकता विदेशी संस्कृति, मानसिक विकृति है तो शास्त्रों में 8 जगहों पर इसका वर्णन क्यों है?

भारतीय दंड संहिता का सेक्शन 377, जिसके अंतर्गत आपसी सहमति से बने समलैंगिक संबंध आपराधिक थे, अब आपराधिक नहीं रहेंगे. 6 सिंतबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट के जीफ़ जस्टिस दीपक मिश्रा ने ऐतिहासिक फ़ैसला सुनाते हुए कहा कि Homosexuality या समलैंगिकता अपराध नहीं है.दीपक मिश्रा के शब्द



बिहार में लगेगा साहित्य का कुंभ, राजनगर में होगा मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल

बिहार का मिथिला क्षेत्र अपनी संस्कृति, परंपरा, सामाजिक आचार-विचार और प्राचीन धरोहरों के लिए जाना जाता है. वहीं, साहित्यिक रूप से भी मिथिला का इतिहास समृद्ध रहा है. साहित्य और संस्कृति हमारी वैभवशाली परंपरा को प्रकट करने के माध्यम हैं. इसी परंपरा को मिथिला क्षेत्र में फिर



भारत के लिए क्यों जरूरी है संस्कृत दिवस ? जानिए इसका महत्व

संस्कृत भाषा के महत्व को मनाने के लिए संस्कृत दिवस (sanskrit day) मनाया जाता है। संस्कृत सभी भारतीय भाषाओ की जननी है। यह हिंदू धर्म की पवित्र भाषा है जिसका प्रयोग बौद्ध धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म और हिंदू धर्म के दार्शनिक प्रवचनों के लिए



बळ्यो सम्प रो बूंट

बळ्यो सम्प रो बूंट राजपूत केवल एक जाति ही नहीं है बल्कि यह धैर्य, साहस, शौर्य, त्याग, सच्चरित्रता, स्वामिभक्ति एवं सुशासन का पर्याय भी है । कवियों ने इसे समाज व दीन-दुखियों के हितैषी के रूप में इंगित किया है - रण ख



* संधिकाल*

संधिकाल वह समय होता है, जिसमे दोशब्द या ऋतुयें मिलने वाली होती है, जब हम शब्दो केबारे मे बात करते है तो वहां पर भी शब्दो के मिलने से पहले विकार उत्पन्न होता है,और अगर ऋतुयों कि बात करे तो संधिकाल के दौरान वहां भी बिमारिया(व्याधिया) अधिक उत्पन्न होती है, इसी को आगे ले जाते हुएअगर हम समाज और संस्क्रति



करवा चौथ

कार्तिक-कृष्णपक्ष चौथ का चाँद देखती हैं सुहागिनें आटा छलनी से.... उर्ध्व-क्षैतिज तारों के जाल से दिखता चाँद सुनाता है दो दिलों का अंतर्नाद। सुख-सौभाग्य की इच्छा का संकल्प होता नहीं जिसका विकल्प एक ही अक्स समाया रहता आँख से ह्रदय तक जीवनसाथी को समर्पित निर्जला व्रत चंद्रोदय तक। छलनी से छनकर आती



कोई चूक ना होने पाए: शब्द संभार बोलिए...!

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‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का भाव रखने वाली एकमात्र संस्कृति ‘भारतीय संस्कृति’

हमारी प्राचीन भारतीय संस्कृति समूचे विश्व की संस्कृतियों में सर्वश्रेष्ठ और समृद्ध संस्कृति है | भारत विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता का देश है। भारतीय संस्कृति के महत्वपूर्ण तत्व शिष्टाचार, तहज़ीब, सभ्य संवाद, धार्मिक संस्कार, मान्यताएँ और मूल्य आदि हैं। अब जबकि हर एक की जीवन शैली आधुनिक हो रही है भार



Azaad Bharat: संस्कृत भाषा की महानता एवं उपयोगिता

संस्कृत दिवस : 7 अगस्त#संस्कृत में #1700 धातुएं, #70 प्रत्यय और #80 उपसर्ग हैं, इनके योग से जो शब्द बनते हैं, उनकी #संख्या #27 लाख 20 हजार होती है। यदि दो शब्दों से बने सामासिक शब्दों को जोड़ते हैं तो उनकी संख्या लगभग 769 करोड़ हो जाती है। #संस्कृत #इंडो-यूरोपियन लैंग्वेज



नवसंवत्सर एक नये सफर की शुरूआत

नव संवत्सर नववर्ष नवरात्रि नवभोर , समय है अपनी जड़ों को पोषित करने का समय है आगे बढ़ने का।नवरात्रि अर्थात् शक्ति स्वरूप माँ के नौ रूपों के पूजन के नौ विशेष दिन। वैसे तो नवरात्रि साल में दो बार आती हैं लेकिन चैत्र मास में पड़ने वाली नवरात्रि क



Video ! जानिये मैक्स मुलर ने भारतीय ग्रंथो के साथ क्या क्या किया !

मित्रो बहुत कम लोग जानते है की हमारी बहुत सी धार्मिक किताबें,शास्त्र और इतिहास के साथ अंग्रेज़ो ने बहुत छेड़खानी करी है ! आपको सुन कर हैरानी होगी भारत मे एक मूल प्रति है मनुसमृति की जो हजारो वर्षो से आई है और एक मनुस्मृति अंग्रेज़ो ने लिखवाई है ! और अंग्रेज़ो ने इसको लिखवाने



विलुप्त होती भारतीय संस्कृति पैर जमाती विलायती संस्कृति चिंतनीय विषय

वेद पुराणों पर आधारित भारतीय संस्कृति अब विलुप्त होती जा रही है आने वाली पीड़ी पर विलायती संस्कृति हावी होती जा रही है जैसे-जैसे वेद पुराणों पर धूल जमती जा रही है टेलिविजनों पर प्रसारित पश्चिमी संस्कृति युवाओं पर हावी हो रही है भारतीय संस्कृति का विलुप्त होने का ही कारण है घरेलु हिंसा !!!



हिंदी भाषा का इतिहास और विकास

हिन्दी मूलतः फारसी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है- हिन्दी का या हिंद से सम्बन्धित । हिन्दी शब्द की उत्पति सिन्धु-सिंध से हुई है, क्योंकि ईरानी भाषा में ‘स’ को ‘ह’ बोला जाता है । इस प्रकार हिन्दी शब्द वास्तव में सिन्धु शब्द का प्रतिरूप है । कालांतर में हिंद शब्द सम्पूर्ण भारत का पर्याय बनकर उभरा । इस



संस्कृत किसी भाषा की मां नहीं है - दिलीप मंडल

संस्कृत किसी भाषा की मां नहीं है. किसानों ने कभी भी संस्कृत में अपनी फसल नहीं बेची. मछुआरों ने संस्कृत में मछली का रेट नही बताया. ग्वालों ने संस्कृत में दूध नहीं बेचा, सैनिक ने कमांडर से इतिहास में कभी भी संस्कृत में बात नहीं की, किसी मां ने बच्चे को संस्कृत में लोरी नहीं सुनाई, खेल के मैदान में कभी



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