नशा माटो के शराबखाने का

आज काफी दिनों के बाद शब्दनगरी के लेखों परगई तो डॉ दिनेश शर्मा के कुछ और यात्रा संस्मरण देखे... आइये हम भी उनके साथ कुछयात्राएं कर लें...नशा माटो के शराबखाने का समुद्रके किनारे चलते चलते रास्ते में एक शान्त सी दूकान देखी तो कुछ पीने और सुस्तानेके इरादे से उसमें ही घुस गया | यह दरअसल एक शराब खाना था ज



दुनिया के सबसे खूबसूरत राष्ट्रीय उद्यानों में : दिनेश डाक्टर

क्रोएशिया में लैंड होने के बाद बहुत जगह एक बात बहुत सारे क्रोएशयन ने कई बार जो बड़े गर्व से दोहराई वो है यहां के पानी के बारे में उनका विश्वास । ' आप बोतल के पानी में पैसा खराब न करे ! हमारे हर नल का पानी किसी भी बोतल के पानी से ज्यादा अच्छा और शुद्ध है । क्योंकि मेरे अपने देश में बहुत सारी बीमारियों



क्रोएशिया की खूबसूरती और बिंदास लोग : दिनेश डाक्टर

वैसे तो क्रोएशयन लोग तबियत से खासे गर्मजोश होते है पर एकदम नही खुलते । शायद काफी अरसे तक कम्युनिज्म के प्रभाव ने वहाँ के लोगों को अपनी भावनाओं पर काबू पाकर पहले दूसरों को भांपने की आदत डाल दी है । एक बार बातचीत में खुल जाएँ तो बड़े बेतकल्लुफ होकर दोस्ती गांठ लेते हैं । क्रोएशिया में जो लोग सर्बिया य



घुमक्कड़ी का कीड़ा

डॉ दिनेश शर्मा के साथ थोड़ा सा घुमक्कड़ हो जाएँ...घुमक्कड़ी का कीड़ा : दिनेश डाक्टरघुमक्कड़ी का कीड़ा बचपन से ही मुझे ख़ासा परेशान करता रहा है | मुझे याद है कि हमारे पड़ोस में रहने वाले एक किसान का भतीजा कुछ दिन के लिए हमारे गाँव में आया था |मेरी उम्र रही होगी बामुश्किल दस ग्यारह बरस की | वो जर्मनी मे



घुमक्कड़ी का कीड़ा : दिनेश डाक्टर

घुमक्कड़ी का कीड़ा बचपन से ही मुझे ख़ासा परेशान करता रहा है । मुझे याद है कि हमारे पड़ोस में रहने वाले एक किसान का भतीजा कुछ दिन के लिए हमारे गाँव में आया था ।मेरी उम्र रही होगी बामुश्किल दस ग्यारह बरस की । वो जर्मनी में कहीं सेटल था । जैसे ही मुझे पता लगा कि वो जर्मनी में रहता है , मैं घंटो उसके पा



उम्र भर सफ़र में रहा - डॉ दिनेश शर्मा

डॉ दिनेश शर्मा के साथ निकलते हैं आज फिर एक नए सफ़र पर...उम्र भर सफर में रहा : दिनेश डॉक्टरअगलीसुबह मार्ग्रेट का, जो मुझे साल्जबर्ग के किले से उतरते वक़्त टकराई थी और जिसने मुझे वियना कीघूमने वाली जगहों की लिस्ट बना कर दी थी, फोन आ गया | जब मैंने बताया की मैं वियना में ही हूँ तो बहुत खुश हुई और दोपहर क



वाह विएना ! वाह !!

डॉ दिनेश शर्मा का एक और शब्दचित्र - वाह विएना ! वाह !!श्वेडन प्लाटज़बड़ा स्टेशन था |यहां से मुख्य ट्रेन स्टेशन , बस स्टेशन और हवाई अड्डे केलिए अंडर ग्राउण्ड ट्यूब रेलवे के नेटवर्क थे | बगल में हीडेन्यूब के किनारे छोटा सा नाव पोर्ट था जहां से हंगरी में बुडापेस्ट औरस्लोवाकिया में ब्रात्सिलावा के लिए जेट



ख़ूबसूरत वियना की बाहों में - डॉ दिनेश शर्मा

डॉ दिनेश शर्मा का यात्रा वृत्तान्त... हमेशा की तरह एक ख़ूबसूरतशब्दचित्र...खूबसूरत वियना की बाहों में : दिनेश डॉक्टरविएना पहुंचा तोलगा जैसे विएना शहर नही एक खूबसूरत लड़की है जिसने मुझे आगे बढ़कर अपनी बाहों में भरलिया है| सबसे पहले उतर करपूछताछ खिड़की पर गया और लोकल ट्रामों, ट्रेनों और अंडरग्राउंड ट्यूब र



साल्जबर्ग में आखिरी दिन : दिनेश डॉक्टर

डॉ दिनेश यात्रा वृत्तान्तों में पूरा शब्दचित्र उकेर देने में माहिर हैं...पूरी सैर करा देते हैं उन स्थलों की जहाँ जहाँ उन्होंने भ्रमण किया है... ऐसा हीएक और यात्रा वृत्तान्त...साल्जबर्ग में आखिरी दिन : दिनेश डॉक्टरकेबल कार सुबहसाढ़े सात बजे चलनी शुरू होती थी । नाश्ता सुबह साढ़े छह बजे ही लग जाता था । ज



मिराबेल पैलेस का महिला वायलन बैंड - दिनेश डॉक्टर

डॉ दिनेश शर्मा के यात्रा संस्मरण, जिनमें समूची यात्रा के शब्दचित्र उकेरे हुए हैं...मिराबेल पैलेस का महिला वायलन बैंड - दिनेश डॉक्टरपहाड़ी से नीचेउतर कर पैलेस के परिसर से वापस बस स्टैंड पर आकर पच्चीस नम्बर की बस पकड़ करसाल्जबर्ग शहर के सेंटर में उतर गया | सुबह का मुफ्त का नाश्ता कभी



आभार शब्दनगरी

आज का दिन एक बार फिर बीती यादों की ओर लिए जा रहा है ।आज ही के तीन साल पहले शब्दनगरी पर टििप्पणी के लिए बनाये गए अकाउंट ने मेरी जिंदगी बदल दी थी। उन सभी पाठकों और सहयोगियों की ऋणी रहूँगी, जिन्होंने मेरी इस शानदार रचना यात्रा में मुझे अतुलनीय सहयोग दिया। आभार...आभार



साल्जबर्ग 'द साउंड ऑफ म्यूजिक' - डॉ दिनेश शर्मा

डॉ दिनेश शर्मा का यात्रा संस्मरण – जो वास्तव में शब्दचित्र उकेर देताहै...साल्जबर्ग 'दसाउंड ऑफ म्यूजिक' : दिनेश डॉक्टरवैसे तोसाल्जबर्ग हमेशा से ही बेहद खूबसूरत शहर रहा है पर हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्रीजूली एंड्रयूज़ की 1965 में रिलीज हुई सुपर हिट फिल्म साउंड ऑफ म्यूजिक , केबाद और भी प्रसिद्ध हो गया । फ़



चलो थोड़ा घूमने चलें - २, कल से आगे

डॉ दिनेश शर्मा का यात्रा वृत्तान्त कल से आगे...चलो थोड़ा घूमने चलें - 2 कल से आगे - दिनेश डॉक्टरमानहाइम आकर चला गया । कुछ लोग उतरे कुछ चढ़े । आजकलबिना किसी अपवाद के हर देश शहर में सब लोग अपने मोबाइल में ही मस्त रहते हैं ।ट्रेन पर समस्त उद्घोषणा तीन भाषाओं में बारी बारी से होती है । पहले फ्रेंच फिरजर्म



मेरे गाँव के गुमनाम शायर

अपने गाँव के कविनुमा व्यक्ति को जब मैंने पहली बार अपने घर की बैठक में देखा , तो मेरे आश्चर्य का कोई ठिकाना ना रहा | मैं उन्हें आज अपने घर की बैठक में पहली बार देख रही थी |इससे पहले मैंने उन्हें अपने गाँव की अलग -अलग गलियों में निरर्थक घूमते देखा था या फिर जहाँ - तहां मज़मा जोड़कर सुरीले स



Sketches from Life: चप्पल

चप्पल हमारी कालोनी के तीन तरफ ऊँची दीवार है और दीवार के पीछे काफी बड़ा और घना जंगल है. इस दीवार की वजह से आप जंगल में नहीं जा सकते हैं, और न ही जंगलवासी इस तरफ आ सकते हैं. दीवार के कारण जंगल वासी समझते हैं कि वो सेफ हैं और कॉलोनी वाले समझते हैं कि वो सेफ हैं ! कभी कभी एकाध



प्रेरणा

चिड़िया प्रेरणास्कूल का पहला दिन । नया सत्र,नए विद्यार्थी।कक्षा में प्रवेश करते ही लगभग पचास खिले फूलों से चेहरों ने उत्सुकता भरी आँखों और प



सामाजिक स्नेह की प्रथम अनुभूति (हमारी छोटी-छोटी खुशियाँ)

हमारी छोटी- छोटी खुशियाँ ( भाग- 4) दीपावली की वह शाम************************** नियति ने हमारे लिये क्या तय कर रखा है, हम नहीं जानते, कहाँ तो मैं इस चिंता में दुःखी था कि घर पहुँचने पर भोजन क्या कर



इक वो भी दीपावली थी..

हमारी छोटी-छोटी खुशियाँ( भाग- 3 )*************************** सच कहूँ तो पहले अभाव में भी खुशियाँ थीं और अब इस इक्कीसवीं सदी में सबकुछ होकर भी खुशियों का अभाव है।**************************** पिछले कुछ महीनों में स्वास्थ्य तेजी से गिरा है, फिर भी ठीक पौने चार बजे ब्रह्ममुहूर्त में शैय्या त्याग



स्नेह भरे ये पर्व..

हमारी छोटी-छोटी खुशियाँ( भाग- 2)*************************** परम्पराओं के वैज्ञानिक पक्ष को तलाशने की आवश्यकता है , उसमें समय के अनुरूप सुधार और संशोधन हो , न कि उसका तिरस्कार और उपहास ..**************************** यह परस्पर प्रेम



माँ , महालया और मेरा बालमन

माँ , महालया और मेरा बालमन...************************** आप भी चिन्तन करें कि स्त्री के विविध रुपों में कौन श्रेष्ठ है.? मुझे तो माँ का वात्सल्य से भरा वह आंचल आज भी याद है। ****************************जागो दुर्गा, जागो दशप्रहरनधारिनी,अभयाशक्ति बलप्रदायिनी, तुमि जागो... माँ - माँ.. मुझे भी महाल



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