प्रेरणा

चिड़िया प्रेरणास्कूल का पहला दिन । नया सत्र,नए विद्यार्थी।कक्षा में प्रवेश करते ही लगभग पचास खिले फूलों से चेहरों ने उत्सुकता भरी आँखों और प



सामाजिक स्नेह की प्रथम अनुभूति (हमारी छोटी-छोटी खुशियाँ)

हमारी छोटी- छोटी खुशियाँ ( भाग- 4) दीपावली की वह शाम************************** नियति ने हमारे लिये क्या तय कर रखा है, हम नहीं जानते, कहाँ तो मैं इस चिंता में दुःखी था कि घर पहुँचने पर भोजन क्या कर



इक वो भी दीपावली थी..

हमारी छोटी-छोटी खुशियाँ( भाग- 3 )*************************** सच कहूँ तो पहले अभाव में भी खुशियाँ थीं और अब इस इक्कीसवीं सदी में सबकुछ होकर भी खुशियों का अभाव है।**************************** पिछले कुछ महीनों में स्वास्थ्य तेजी से गिरा है, फिर भी ठीक पौने चार बजे ब्रह्ममुहूर्त में शैय्या त्याग



स्नेह भरे ये पर्व..

हमारी छोटी-छोटी खुशियाँ( भाग- 2)*************************** परम्पराओं के वैज्ञानिक पक्ष को तलाशने की आवश्यकता है , उसमें समय के अनुरूप सुधार और संशोधन हो , न कि उसका तिरस्कार और उपहास ..**************************** यह परस्पर प्रेम



माँ , महालया और मेरा बालमन

माँ , महालया और मेरा बालमन...************************** आप भी चिन्तन करें कि स्त्री के विविध रुपों में कौन श्रेष्ठ है.? मुझे तो माँ का वात्सल्य से भरा वह आंचल आज भी याद है। ****************************जागो दुर्गा, जागो दशप्रहरनधारिनी,अभयाशक्ति बलप्रदायिनी, तुमि जागो... माँ - माँ.. मुझे भी महाल



ईरानी ( पर्शियन ) समाज में हिंदी भाषा का महत्व ( हिंदी दिवस के उपलक्ष में )

ईरानी (पर्शियन )समाज में हिंदी भाषा का महत्व डॉशोभा भारद्वाज मुझेकई वर्ष तक परिवार सहित ईरान में रहने का अनुभव रहा है | ईरान के शाह मोहम्मद रजापहलवी ,पहलवी राजवंश के आखिरी शाह थे उन्होंने शान शौकत के साथ आर्य मिहिर की उपाधिधारण की उनके खिलाफ क्रान्ति का ऐसा म



गाना : हँसते आँसु

हजारो तरह के ये होते हैं आँसुअगर दिल में गम हैं तो रोते हैं आँसुख़ुशी में भी आँखे भिगोते हैं आँसुइन्हे जान सकता नहीं ये जमानामैं खुश हूँ मेरे आँसुओं पे न जानामैं तो दीवाना ,दीवाना ,दीवाना "मिलन " फिल्म का ये गाना वाकई लाजबाब हैं। आनं



Sketches from Life: खजुराहो की कामुक मूर्तियाँ - 1

मध्य प्रदेश का छोटा सा शहर खजुराहो अपने मंदिरों के कारण विश्व प्रसिद्द है. ये सभी मंदिर विश्व धरोहर - World Heritage Site में आते हैं. भोपाल से खजुराहो की दूरी 380 किमी है और झांसी से 175 किमी. खजुराहो हवाई जहाज, रेल या सड़क से पहुंचा जा सकता है. हर तरह के होटल और अन्य सुव



Sketches from Life: जावरी मंदिर खजुराहो

मध्य प्रदेश का छोटा सा शहर खजुराहो अपने मंदिरों के कारण विश्व प्रसिद्द है. ये सभी मंदिर विश्व धरोहर - World Heritage Site में आते हैं. भोपाल से खजुराहो की दूरी 380 किमी है और झाँसी से 175 किमी है. खजुराहो छतरपुर जिले का हिस्सा है. खजुराहो में एक एयरपोर्ट भी है. इसके अलावा



Sketches from Life: गरम पानी

चंद्रा साब नहा कर बाथरूम से गुनगुनाते हुए बाहर निकले. ना तो गाने के बोल और ना ही गाने की ट्यून समझ आ रही थी. जो भी हो चन्द्र सब के चेहरे पर संतोष की झलक थी. सुबह सुबह का सबसे भारी काम निपट गया. ये तो धन्यवाद देना होगा गीज़र को कि सुबह नहाना धोना आसानी से हो जाता है.बाहर आक



Sketches from Life: हेयर कलर

मैनेजर की प्रमोशन हुई तो पोस्टिंग मिली आसाम में. बोरिया बिस्तर लपेटा और पहुँच गए सिलचर. हरा भरा, प्रदुषण मुक्त और सुंदर प्रदेश लगा. छोटे छोटे शहरों में मकान मिलने में ज्यादा समय नहीं लगता. तुरंत ही अड्डा जमा लिया और बैंक का काम चालू करने में देर नहीं लगी. दिल्ली की बड़ी बड़



Sketches from Life: सूरज कुण्ड ग्वालियर

ग्वालियर का किला शहर से सौ मीटर ऊँची पहाड़ी पर है जिस का नाम गोपाचल पहाड़ी है. गेरुए लाल रंग के बलुए पत्थरों से बना किला तीन वर्ग किमी में फैला हुआ है. दीवारों की लम्बाई दो मील है. किले की अंदरूनी चौड़ाई दो सौ मीटर से लेकर एक हज़ार मीटर तक है. किले के अंदर मंदिर, महल, पानी के



व्याकुल पथिक

कोई निशानी छोड़, फिर दुनिया से डोल एक दिन बिक जाएगा, माटी के मोल -------------------------------------------- "किसी की मुस्कुराहटों पे हो निसार किसीका दर्द मिल सके तो ले उधार किसीके वास्ते हो तेरे दिल में प्यार जीना इसी का नाम है " वॉयस आफ गॉड के इस गाने में छिपे संदेश को आत्मसात करने का प्



सावन के झूले पड़े तुम चले आओ

सावन के झूले पड़े तुम चले आओ दिल ने पुकारा तुम्हें तुम चले आओ तुम चले आओ... रिमझिम बारिश के इस सुहावने मौसम में अश्वनी भाई द्वारा प्रेषित इस गीत ने स्मृतियों संग फिर से सवाल- जवाब शुरू कर दिया है। वो क्या बचपना था और फिर कैसी जवानी थी। ख्वाब कितने सुनहरे थें ,यादें कितनी सताती हैं। अकेले में यूं



स्नेह बिन जीवन कैसा

कर्म हमें महान बनाता है पर स्नेह इंसान तस्वीर तेरी दिल में जिस दिन से उतारी है फिरूँ तुझे संग ले के नए-नए रंग ले के सपनों की महफ़िल में तस्वीर तेरी दिल में... सचमुच तस्वीर दिल में उतारनी हो या फिर कागज पर , यह काम इतना आसान है नहीं । समर्पण, सम्वेदना एवं स्नेह से ही इसे आकर मिलता ह



स्नेह बिन जीवन कैसा



जीने की तुमसे वजह मिल गई है

"तुम आ गए हो नूर आ गया है नहीं तो चराग़ों से लौ जा रही थी जीने कि तुमसे वजह मिल गई है बड़ी बेवजह ज़िंदगी जा रही थी " कितना भावपूर्ण गीत है न यह ? उतनी ही खुबसूरती के साथ इसे लता जी ने किशोर दा के साथ गाया है। परस्पर प्रेम समर्पण है यहां। सो, बार - बार सुनने पर भी मन



व्याकुल पथिक

रुठी लक्ष्मी नहीं छीन सकी तब हमारी खुशियाँ यदि हमारे पास संस्कार, शिक्षा और अपनों के प्रति समर्पण है ,तो अभावग्रस्त जीवन भी खुशियों से महक उठता है। सो, इसी कारण धन की चाहे कितनी भी कमी क्यों न रही हो , फिर भी परिवार के हम सभी सदस्य काफी खुशहाल थें , उन दिनों। म



व्याकुल पथिक

इन रस्मों को इन क़समों को इन रिश्ते नातों को सुबह दो घंटे अखबार वितरण और फिर पूरे पांच घंटे मोबाइल के स्क्रीन पर नजर टिकाये आज समाचार टाइप करता रहा। वैसे, तो अमूमन चार घंटे में अपना यह न्यूज टाइप वाला काम पूरा कर लेता हूं, परंतु आज घटनाएं अधिक रहीं । ऊपर से प्रधानमंत्री के दौरे पर भी कुछ खास तो ल



हमारा परिवार

छोटा-सा ,साधारण -सा मध्यमवर्गीय हमारा परिवार,अपनेपन की मिठास घोलता,खुशहाल परिवार का आधार,परिवार के वो दो मजबूत स्तम्भ थे बावा -दादी,आदर्श गृहणी थी माँ,पिता कुशल व्यवसायी,बुआ,चाचा साथ रहते,एक अनमोल रिश्ते में बंधते,बुजुर्गो की नसीहत से समझदार और परिपक्व बनते,मुखिया बावा



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