सपने

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जज़्बात दिल के

"चलो हम भाग कर शादी कर लेते हैं , अगर मेरे पेरेंट्स को पता चला कि मैं तुमसे प्यार करती हू तो मेरे पेरेंट्स मेरी शादी कहीं और करा देंगे "रागनी सुमित को बोल रही थी ,सुमित और रागिनी दोनों कॉलेज फ्रेंड थे दोनों एक दूसरे से प्यार करते थे ,वैसे दोनों की कोई ज्यादा उम्र नहीं थी यही कोई 20 - 22 साल के थे वो



तुम

मैंने तुम्हें सपने में देखा, अब तुम्हें देखने का, यही तो एक जरिया बचा है। इन दिनों... अब तुम तो हमें देखने या मिलने से रहें। भूलने की आदत जो है तुम्हें। खैर ! अब तुम्हें लेकर बुरा भी क्या मानें? क्योंकि उसके लिए भी, हक‌ जो ढूंढने पड़ेंगे हमें। हां, आजकल तुम सपने में भी, मोबाइल में नजरें गड़ाए हुए द



सपने वो होते हें!

सपने वो होते हें!जो सोने नही देते !! और अपने वो होते है ! जो रोने नही देते !! प्यार इंसान से करो उसकी आदत से नही रुठो उनकी बातो से मगर उनसे नही... भुलो उनकी गलतीया पर उन्हें नही क्योकि रिश्तों से बढकर कुछ भी नहीं।।



सपने की हकीकत

कल रात को मैंने एक सपना देखा भीड़ भरे बाज़ार में नहीं कोई अपना देखा मैंने देखा एक घर की छत के नीचे कितनी अशांति कितना दुख और कितनी सोच मैंने देखा चेहरे पे चेहरा लगाते हैं लोग ऊपर से हँसते पर अंदर से रोते हैं लोग भूख, लाचारी, बीमारी, बेकारी यही विषय है बात का आँख खुली तो देखा यह सत्य है सपना नहीं रात



सपने ..

कुछ सपने केवल सपने ही रह जाते हैं बिना पूरे हुये, बिना हकीकत हुये और हमे वो ही अच्छे लगते हैं अधूरे सपने, बिना अपने हुये हम जी लेते हैं उसी अधूरेपन कोउसी खालीपन कोसपने की चाहत मेंजानते हुये भी ....सपने तो सपने हैंसपने कहाँ अपने हैंयथार्थ को छोड़करपरिस्थिति से मुह मोड़करहम जीते हैं सपने मेंसपने हम रोज



चंदा रे चंदा रे कभी तो ज़मीन पर आ (Chanda Re Chanda Re Kabhi To Zameen Par Aa )- सपने

चंदा रे चंदा रे कबी टू ज़मीन पर आ फिल्म के गीत सपने से गीत साधना सरगम ​​और हरिहरन द्वारा गाया जाता है, इसका संगीत एआर रहमान द्वारा रचित है और गीत जावेद अख्तर द्वारा लिखे गए हैं।सपने (Sapnay )चंदा रे चंदा रे कभी तो ज़मीन पर आ (Chanda Re Chanda Re Kabhi To Zameen Par Aa ) की लिरिक्स (Lyrics Of Chanda



सपने (Sapnay )

'सपने' एक 1997 की हिंदी फिल्म है जिसमें अरविंद स्वामी, काजोल और प्रभु ढेवा प्रमुख भूमिका निभाते हैं। हमारे पास और सपने के एक गीत गीत हैं। एआर रहमान ने अपना संगीत बना लिया है। साधना सरगम ​​और हरिहरन ने इन गीतों को गाया है जबकि जावेद अख्तर ने अपने गीत लिखे हैं।इस फिल्म के गाने चंदा रे चंदा रे कभी तो ज़



झूठ बोल न सच बात बोल दे (Jhooth Bol Na Sach Baat Bol De )- सात रंग के सपने

फिल्म सात रंग के सपने - 1 99 8 के झुथ बोल ना सच बाट बोल डी गीतों के साथ पढ़ें और गाएं, जिसे एसपी बालासुब्रमण्यम द्वारा गाया जाता है। आप साट रंग के सपने से अन्य गाने और गीत भी प्राप्त कर सकते हैं।सात रंग के सपने (Saat Rang Ke Sapne )झूठ बोल न सच बात बोल दे (Jhooth Bol Na Sach Baat Bol De ) की लिरिक



सात रंग के सपने (Saat Rang Ke Sapne )

'सैट रंग के सपने' 1 99 8 की हिंदी फिल्म है जिसमें अरविंद स्वामी, जूही चावला, अनुपम खेर, फरीदा जलाल, सतीश शाह, टिनू आनंद, अरुणा ईरानी और मिंक प्रमुख भूमिका निभाते हैं। हमारे पास एक गीत गीत और साट रंग के सपने का एक वीडियो गीत है। नदीम और श्रवण ने अपना संगीत बना लिया है। एसपी बालासुब्रमण्यम ने इन गीतों



“गीतिका” उठाकर चल दिये सपने

समांत- आन, पदांत- आँखों में, मात्रा भार- २८ यति- १४ पर “गीतिका”उठाकर चल दिये सपने, बड़े अरमान आँखों मेंठिठककर पग बढ़े आगे, डगर अंजान आँखों मेंदिखी मूरत तुम्हारी तो, न मन विश्वास रख पायामिरे तो बोझिल हैं कंधे. कहाँ दिनमान आँखों में॥खिली है चाँदनी पथ पर, उगी सूरत विराने नभ डर



सपने

सुवचन सकारात्‍मक होते हैं अौर दिशा निर्धारित करते हैं। सुपथ दिखाते हैं अौर लक्ष्‍य प्राप्ति में सहायक होते हैं। आज का सुवचन का शीर्षक 'सफल' है!Video को LIKE और हमारे CHANNEL को SUBSCRIBE करना ना भूले !JYOTISH NIKETAN



मन की मंजिल ढूँढ लो …

सागर को बांध लो, नदियों को सींच दो, उड़ जाओ संग हवा के, मुड़ जाओ संग दिशा के, कुछ सपने बुन भी लो, मन की मंजिल ढूँढ लो ... क्योँ हो खोये? सोये-सोये? खुश होकर भी, लगते हो रोये-रोये! संदेशे सोच लो, अंदेशे छोड़ दो, उड़ जाओ संग हवा के, मुड़ जाओ संग दिशा के, कुछ सपने बुन भी लो, मन की मंजिल ढूँढ लो ...  ज़िन्दगी





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