सरहद

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रूक जाइए

पैदल निकल गये हजारों लाखों लोग उसी पथ पर, जहां कोरोनावायरस के जीवन और उन पथगीरों के मौत के निशान हैं। क्यों निजामुद्दीन जैसे मकतब, मरकज हाटसपाट बन वायरस के, बढ़ा रहे कोरोना का फैलाव हैं? बार्डर, सरहद पर उतरी जनता, आने वाले खतरे से क्या अंजान है? कल तक जिस शहर को अपना माना, आज उसे छोड़ चल देना, इन स



फौजी की आत्मा देती है सरहद पर पहरा

मृत्यु के पश्चात भी फौजी की आत्मा आन ड्यूटीजी हाँ आप जी ने सही पढ़ा एक फौजी के शहीद होने के बावजूद भी उसकी आत्मा कर रही है सिक्किम में भारत चीन बाॅडर पर अपनी ड्यूटी यह आत्मा ना सिर्फ सरहद पर पहरा देती है बल्कि दुश्मन की हर गतिविधि की खबर पहले हि सांकेतिक रूप में भारत



सरहद

कवि: शिवदत्त श्रोत्रियसरहद, जो खुदा ने बनाई||मछली की सरहद पानी का किनाराशेर की सरहद उस जंगल का छोरपतंग जी सरहद, उसकी डोर ||हर किसी ने अपनी सरहद जानीपर इंसान ने किसी की कहाँ मानी||मछली मर गयी जब उसे पानी से निकालाशेर का न पूछो, तो पूरा जंगल जला डाला ||ना जाने कितनी पतंगो की डोर काट दीना जाने कितनी स



ऐ देश के वीर सिपाही तुम्हे सलाम!

भारत माँ की रक्षा में तत्पर, ऐ वीर तुम्हे सलाम,दुश्मन से ना डरे, ना झुके तुम, भारत माँ को हँसते- हँसते दे दी अपनी जान,जितना भी करूँ नमन तुम्हारा, जितना भी करूँ सम्मान,ऐ देश के वीर सिपाही, तुम पे सब कुर्बान,ऐसी है हस्ती तुम्हारी, बर्फ को भी पिघला देते हो तुम,शोलों पे जल-जल कर, दुश्मनों के छक्के छूड़ा



10 सितम्बर 2015

ऐ देश के वीर सिपाही तुम्हे सलाम!

भारत माँ की रक्षा में तत्पर, ऐ वीर तुम्हे सलाम, दुश्मन से ना डरे ना झुके तुम, भारत माँ को हँसते- हँसते दे दी अपनी जान,जितना भी करूँ नमन तुम्हारा, जितना भी करूँ सम्मान,ऐ देश के वीर सिपाही, तुम पे सब कुर्बान,ऐसी है हस्ती तुम्हारी, बर्फ को भी पिघला देते हो तुम,शोलों पे जल-जल कर, दुश्मनों के छक्के छूड़ा



मैं बैठा सरहद पर हूं....

मैं बैठा सरहद पर हूँ,रेगिस्तान की छाँव में;अबके साल कैसा होगा, मौसम मेरे गाँव मेंतकती होंगी सूनी गलियाँ,मेरे आने की राहें|तन्हाई मे रोती होंगी,मेरी याद मे सारी निगाहें||जिनकी बाहों का तकिया,कभी बनाकर सोया था मैं;कभी तरसती होंगी ,मेरे सिर धरने को वो बाहें|इस मिट्टी में स्वर्ग वही, माँ ! जो स्वर्ग है



मैं बैठा सरहद पर हूं....

मैं बैठा सरहद पर हूँ,रेगिस्तान की छाँव में;अबके साल कैसा होगा, मौसम मेरे गाँव मेंतकती होंगी सूनी गलियाँ,मेरे आने की राहें|तन्हाई मे रोती होंगी,मेरी याद मे सारी निगाहें||जिनकी बाहों का तकिया,कभी बनाकर सोया था मैं;कभी तरसती होंगी ,मेरे सिर धरने को वो बाहें|इस मिट्टी में स्वर्ग वही, माँ ! जो स्वर्ग है



मैं बैठा सरहद पर हूं....

मैं बैठा सरहद पर हूँ,रेगिस्तान की छाँव में;अबके साल कैसा होगा, मौसम मेरे गाँव मेंतकती होंगी सूनी गलियाँ,मेरे आने की राहें|तन्हाई मे रोती होंगी,मेरी याद मे सारी निगाहें||जिनकी बाहों का तकिया,कभी बनाकर सोया था मैं;कभी तरसती होंगी ,मेरे सिर धरने को वो बाहें|इस मिट्टी में स्वर्ग वही, माँ ! जो स्वर्ग है



मैं बैठा सरहद पर हूं....

मैं बैठा सरहद पर हूँ,रेगिस्तान की छाँव में;अबके साल कैसा होगा, मौसम मेरे गाँव मेंतकती होंगी सूनी गलियाँ,मेरे आने की राहें|तन्हाई मे रोती होंगी,मेरी याद मे सारी निगाहें||जिनकी बाहों का तकिया,कभी बनाकर सोया था मैं;कभी तरसती होंगी ,मेरे सिर धरने को वो बाहें|इस मिट्टी में स्वर्ग वही, माँ ! जो स्वर्ग है



मैं बैठा सरहद पर हूं....

मैं बैठा सरहद पर हूँ,रेगिस्तान की छाँव में;अबके साल कैसा होगा, मौसम मेरे गाँव मेंतकती होंगी सूनी गलियाँ,मेरे आने की राहें|तन्हाई मे रोती होंगी,मेरी याद मे सारी निगाहें||जिनकी बाहों का तकिया,कभी बनाकर सोया था मैं;कभी तरसती होंगी ,मेरे सिर धरने को वो बाहें|इस मिट्टी में स्वर्ग वही, माँ ! जो स्वर्ग है



मैं बैठा सरहद पर हूं....

मैं बैठा सरहद पर हूँ,रेगिस्तान की छाँव में;अबके साल कैसा होगा, मौसम मेरे गाँव मेंतकती होंगी सूनी गलियाँ,मेरे आने की राहें|तन्हाई मे रोती होंगी,मेरी याद मे सारी निगाहें||जिनकी बाहों का तकिया,कभी बनाकर सोया था मैं;कभी तरसती होंगी ,मेरे सिर धरने को वो बाहें|इस मिट्टी में स्वर्ग वही, माँ ! जो स्वर्ग है



मैं बैठा सरहद पर हूं....

मैं बैठा सरहद पर हूँ,रेगिस्तान की छाँव में;अबके साल कैसा होगा, मौसम मेरे गाँव मेंतकती होंगी सूनी गलियाँ,मेरे आने की राहें|तन्हाई मे रोती होंगी,मेरी याद मे सारी निगाहें||जिनकी बाहों का तकिया,कभी बनाकर सोया था मैं;कभी तरसती होंगी ,मेरे सिर धरने को वो बाहें|इस मिट्टी में स्वर्ग वही, माँ ! जो स्वर्ग है



मैं बैठा सरहद पर हूं....

मैं बैठा सरहद पर हूँ,रेगिस्तान की छाँव में;अबके साल कैसा होगा, मौसम मेरे गाँव मेंतकती होंगी सूनी गलियाँ,मेरे आने की राहें|तन्हाई मे रोती होंगी,मेरी याद मे सारी निगाहें||जिनकी बाहों का तकिया,कभी बनाकर सोया था मैं;कभी तरसती होंगी ,मेरे सिर धरने को वो बाहें|इस मिट्टी में स्वर्ग वही, माँ ! जो स्वर्ग है



मैं बैठा सरहद पर हूं....

मैं बैठा सरहद पर हूँ,रेगिस्तान की छाँव में;अबके साल कैसा होगा, मौसम मेरे गाँव मेंतकती होंगी सूनी गलियाँ,मेरे आने की राहें|तन्हाई मे रोती होंगी,मेरी याद मे सारी निगाहें||जिनकी बाहों का तकिया,कभी बनाकर सोया था मैं;कभी तरसती होंगी ,मेरे सिर धरने को वो बाहें|इस मिट्टी में स्वर्ग वही, माँ ! जो स्वर्ग है





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