सायरी

ऐ जिन्दगी तू अब ख्वाब दिखाना छोड़ दे

ऐ जिन्दगी तू अब ख्वाब दिखाना छोड़ दे मौत, तू भी ठहर जा रूआब दिखाना छोड़ देक्या खोया क्या पाया दौर-ए-मोहब्बत में दिल तू भी संभल जा, हिसाब दिखाना छोड़ देझूम रहा हूँ आज भी उनकी आंखों की याद में मयखाने तू भी सुन ले, शराब दिखाना छोड़ देलहरों को हम दिल में लिए घुमते है समंद



सायरी

उस ने खिड़की से चाँद देखा था हम ने खिड़की में चाँद देखा है





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