गंगा दशहरा

गंगा दशहराआज गंगा दशहरा और कल निर्जला एकादशी | गंगा दशहरावास्तव में दश दिवसीय पर्व है जो ज्येष्ठ शुक्ल प्रतिपदा से आरम्भ होकर ज्येष्ठशुक्ल दशमी को सम्पन्न होता है | इस वर्ष तेईस मई को गंगादशहरा का पर्व आरम्भ हुआ था, आज पहली जून को इसका समापन हो रहा है | मान्यता है किमहाराज भगीरथ के अखण्ड तप से प्रसन



शहर तेरा, गाँव मेरा

शहर तेरा, गाँव मेरा"हम तेरे शहर में आए है मुसाफ़िर की तरह, कल तेरा शहर छोड़ जाएंगे साहिल की तरह, शहरों में सह मिलते है। गुलशन में गुल खिलते है। सारे शहर में आप जैसा कोई नही। दो दीवाने शहर में। सारे शहर के शराबी मेरे पीछे पड़े। सारे शहर में कैसा है बवाल। एक अकेला इस शहर में, मोहम्मद के शहर में, शहर की ल



सब सेवक बन गए है।

सब सेवक बन गए है।पेड़ में बैठने वाले पंछी कहाँ जाएंगे? जब पेड़ ही धरा में समा जाए। इस वजह से पेड़ की तुलना प्रवासी मजदूर व प्राइवेट नौकरी से है।अगर नदी का पानी सूख भी जाए, तब भी नाव नदी में रहेगी पानी न सही रेत काफी है। इस वजह से नदी की तुलना सरकारी नौकरी से है।पहाड़ो में औषधि है, राजनीति में पैसा है। स



जानू की बाते।

जानू की बाते।कोरोना कोरोना सब कोई कहे, भूखा कहे न कोई।एक बार मन भूखा कहे, सौ दो सौ की भीड़ होए।मोदी अंदर सबको रखे, घर से बाहर न निकले कोई।मन की बात मोदी करे, सो बाहर उसकी चर्चा होए।मम्मी एफबी में लिपटी रहे, बेटा-बेटी बैठे टीवी संग।साथी शिकायत करने लगे,पापा नौकरी से आए तंग।एक बार सिंग्नल मिले, भीड़ स्ट



रूक जाइए

पैदल निकल गये हजारों लाखों लोग उसी पथ पर, जहां कोरोनावायरस के जीवन और उन पथगीरों के मौत के निशान हैं। क्यों निजामुद्दीन जैसे मकतब, मरकज हाटसपाट बन वायरस के, बढ़ा रहे कोरोना का फैलाव हैं? बार्डर, सरहद पर उतरी जनता, आने वाले खतरे से क्या अंजान है? कल तक जिस शहर को अपना माना, आज उसे छोड़ चल देना, इन स



ये शहर है… मेरा !

ये शहर है… मेरा !कल तक जहाँ रंगीनियाँ थीं , आज ख़ामोशी है , बेचैनी है । लगता है ,दस्तक दी है फिर किसी तूफ़ान ने ,हर तरफ़ भाग दौड़ है , आज ,धर्म -जाति से परे सब साथ हैं !इस तूफ़ान से लड़ने के लिए सब तैयार !वैसे , शक्ति तो साथ में ही है । तूफ़ान तो हर बार अलग- अलग वेश में आता



विजयादशमी और अपराजिता देवी

विजयादशमी और अपराजिता देवीचितिरूपेण या कृत्स्नमेतद्व्याप्य स्थिता जगत् ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ॐसर्वविजयेश्वरी विद्महे शक्तिः धीमहि अपराजितायै प्रचोदयातआज तक समस्त हिन्दू समाज माँ भगवती के नौ रूपों – शैलपुत्री,ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महा



विप्र धेनु सुर संत हित लीन मनुज अवतार

विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार डॉ शोभा भारद्वाज रावण के भय से सम्पूर्ण ब्रह्मांड थर्राने लगा दस सिर बीस भुजाओं एवं ब्रह्मा जी से अमरत्वका वरदान प्राप्त राक्षस राज रावण निर्भय निशंक विचर रहा था हरेक को युद्ध मेंललकारता |रावण का पुत्र मेघनाथमहत्वकांक्षी ,रावण के समान बलशाली पिताको समर्पित



तने दरख्तों के

तने दरख्तों के शाखों से ही झुकने लगेपानी नहीं बचा कुँए सूखने लगे।मौलवी के सताए हुए इंसान यहाँहै ग़ौर कि अल्लाह पे ही थूकने लगे।ये मुमक़िन न था कि आम आएंगे कभीबोए गए थे कांटें सो उगने लगे।वो गा रहा था बदहालियाँ किसानों कीअचानक ही मंत्रियों सर दुखने लगे।बढ़ते हुए काफ़िलें मजहबों



अपने पैरों खड़ी।

अपने पैरों खड़ी।समझ स्कूल,कालेज, शैक्षिक संस्थानों की पढ़ाई।घर, गाँव गली में पढ़-लिखकर शहर में हुई बड़ी।कर विश्वास अपने से, हो गई अपने पैरों खड़ी।भागदौड़ कर भीड़ में, पकड़ती हूँ शहर की रेल। शहर से कमा कर वापस आना, नही है कोई खेल।हँसती मुस्कराती ऑफिसों में, दिनों को गुजारती।आ घर, गिर बिस्तर में, दिन की थकी उ



शहर की जिंदगी, घुटन बन गई हैं।

शहर की जिंदगी, घुटन बन गई हैं।जब शहर था सपना , तब गाँव था अपना।सोचा था शहर से एक दिन कमा लूँगा, के गाँव मे एक दिन कुछ बना लूँगा।शहर की चमक ने मुझे ऐसे मोड़ा, शहर मे ठहर जो गया थोड़ा।अब जिंदगी बन गई हैं, किराए का साया।मोडू जो गाँव का रुख थोड़ा, शहर की चमक बन गई है रोड़ा।कमाया था जो हमने शहर से, वो सब यही



ओला बौछार

ओला बौछार काले घने बादल जब अपनी जवानी मे आते हैं आसमान मे।जमीन मे मोर पपीहा खूब इतराते हैं, नृत्य करते हैं आसमान को निहार कर, कल वह भी बौरा गए ओला वृष्टि को देख कर। कल शहरी लोग पहले खूब इतराए ओलो को देख कर फिर पछते सड़क मे जब निकले ऑफिस से कार पर। किसान खुश था पानी की धार को देखकर वह भी पछताया गेंहू



कर्तव्य- नैतिकता के बीच जिम्मेदार कौन?

अमृतसर हादसा: पंजाब के अमृतसर में दशहरे पर बड़ा हादसा हो गया. रावण दहन के दौरान मची भगदड़ के कारण 61 लोग ट्रेन से कट गए. वे रेल की पटरी पर थे और रेल इतनी रफ्तार में आई कि वे संभल भी नहींसके. घटना में 150 से ज्यादा लोग घायल हैं. हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पटरी के करीब 20



विजयादशमी दशहरा की हार्दिक शुभकामनाएँ

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पूर्वांचल की राजधानी - गोरखपुर

गोरखपुर, भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में राप्ती नदी के किनारे स्थित एक शहर है | गोरखपुर को पूर्वांचल की राजधानी कहा जाता है। यह नेपाल सीमा के पास स्थित है, राज्य की राजधानी लखनऊ के 273 किलोमीटर पूर्व में। 2011 की जनगणना के अनुसार गोरखपुर की कुल आबादी ६,७३,४४६ है |न्त गोरखनाथ जो



द कल्चरल कैपिटल ऑफ़ इंडिया – कोलकाता

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता, जिसे सिटी ऑफ़ जॉय के रूप में जाना जाता है , भारत का दूसरा सबसे बड़ा महानगर तथा पाँचवाँ सबसे बड़ा बन्दरगाह है | आबादी के हिसाब से कोलकाता भारत का तीसरा सबसे बड़ा शहर है | कोलकाता शहर हुबली नदी के बायें किनारे पर स्थित है | ब्रिटिश शासन के दौरान जब कोलकाता एकीकृत भारत क



मदुरई

मदुरई दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। वैगई नदी के किनारे स्थित मंदिरों का यह शहर सबसे पुराने बसे हुए शहरों में से एक है। शहर के उत्तर में सिरुमलाई पहाड़ियां स्थित हैं तथा दक्षिण में नागामलाई पहाड़ियां स्थित हैं। मदुरई का नाम “मधुरा” शब्द से पड़ा जिसका अर्थ है मिठास। कहा जाता है क



देश के रहने लायक शहरों में पुणे नंबर वन, टॉप-10 में मध्य प्रदेश के 2 शहर; उप्र का रामपुर सबसे बदतर

देश के रहने लायक शहरों से जुड़े 'लिवेबिलिटी इंडेक्स' में पुणे पहले नंबर पर है। नवी मुंबई दूसरे और ग्रेटर मुंबई तीसरे स्थान पर है। इस मामले में नई दिल्ली का 65वां स्थान है। इस प्रतिस्पर्धा में कोलकाता ने भाग नहीं लिया। टॉप 10 में मध्य प्रदेश के 2 शहर भोपाल और इंदौर भी हैं



सूर्यनगरी जोधपुर

जोधपुर भारत के राज्य राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा नगर या ज़िला है। इसकी जनसंख्या १० लाख के पार हो जाने के बाद इसे राजस्थान का दूसरा "महानगर " घोषित कर दिया गया था। यह यहां के ऐतिहासिक रजवाड़े मारवाड़ की इसी नाम की राजधानी भी हुआ करता था। जोधपुर थार के रेगिस्तान के बीच अपने



स्वतंत्रता दिवस विशेष: ... जब वाराणसी की तवायफों से हिल गई थी अंग्रेजी हुकूमत

यूपी का वाराणसी भी देश की आजादी के लिए छिड़े स्वतंत्रता संग्राम का गवाह रह चुका है। वाराणसी के चौक थाने के बगल में दालमंडी के नाम से प्रसिद्ध गली आज बिजनस का बड़ा हब बन गई है, लेकिन कभी इसी गली में कोठे हुआ करते थे जहां से आने वाली तवायफों के घुंघरूओं की झनकार ने अंग्रेजी



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