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सुबह शाम

वो मुझे सुबह भेजती, मैं उसे शाम भेजता। वो सुबह सी ताजगी देती, मैं शाम का सुकुन देता। वो सुबह की चहक बन जाती, मैं शाम का साज बनता। वो सुबह के फूलों सी, बन तितली, मेरे मन भाती, मैं शाम का झिगूंर, बन जुगनू , उसकी आस को रोशन करता। वो सुबह की लाली, मैं शाम का गोधूलि बेला। वो सुबह प्रीत मेरी, मैं शाम मी



जब कहीं मन नहीं लगता ।।।

अक्सर जब कहीं मन नही लगता तो पार्क में आकर बैठ जाता हूँ! सुकून सा मिलता है! अक्सर भीड़ सी रहती हैं यहाँ! रोज़ कुछ न कुछ नया देखने को मिलता है! हर रोज़ नए चेहरे, नयी तरह से फ़ोटो खींचते लोग और अलग अन्दाज़ में पोज देते युगल! ५०-५५ साल के अंकल आंटी ईव्निंग वाक पे निकले हैं! कुछ बुज़ुर्ग दादा-दादी योगा



1857 की क्रान्ति में दलित वीरांगना रणबीरी वाल्मीकि का योगदान

भारत देश के नागरिकों को अपने वीर सपूतों पर गर्व है, जिन्हों2ने देश की मर्यादा की रक्षा करते हुए अपना सर्वस्व लूटा दिया। इतिहास में ऐसे कई लाल हुए हैं, जिन्होंने अपनी जान से



अभिनेता नसीरूद्दीन शाह अपने देश में डरे हुये हैं

अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपने देश में डरे हुए हैं ?डॉ शोभा भारद्वाज वह आज के भारत में अपने बच्चों को लेकर बहुत डरे हुए हैं. ''मुझे इस बात का डर लगता है कि कहीं मेरेबच्चों को भीड़ ने घेर लिया और उनसे पूछा कि तुम हिंदू हो या मुसलमान? मेरे बच्चों के पास इसका कोई जवाब नहीं होगा. क्योंकि मैंने मेरेअनुसार अ



सुनहरी शाम

ये सुनहरी शाम और ये जाती हुयी सूरज की धूप,कितना खूबसूरत लगता है प्रकृति का ये अनमोल रूप।ये हवा की हसीन अदायें,कितनी जंचती हैं ये वादियों पे फिजायेंये कुदरत का नजारा मन मोह लेता हैराह चलते मुसाफिर के कदम,निहारने के लिए रोक लेता है।ये सूरज भी ना कितना इंतजार करवाता है,मगर जब अपने घर वापस जाता है।इस सु



"गीतिका" उग आई ऋतु है चाहत की मत लाना दिल में शामत की

मापनी- 22 22 22 22, समान्त- अत, पदांत- की"गीतिका"उग आई ऋतु है चाहत कीमत लाना दिल में शामत कीदेखो कितनी सुंदर गलियाँ खुश्बू देती हैं राहत की।। जब कोई लगता दीवाना तब मन होता है बसाहत की।।दो दिल का मिलना खेल नहींपढ़ना लिखना है कहावत की।।माना की दिल तो मजनू हैपर मत चल डगर गुनाहत की।।देखो कलियाँ चंचल ह



“गीतिका”हर मौसम के सुबह शाम से इक मुलाक़ात रही है

समांत- अही पदांत- है मात्रा भार-२९ १६ १३ पर यति “गीतिका”हर मौसम के सुबह शाम से इक मुलाक़ात रही है सूरज अपनी चाल चले तो दिन और रात सही है भोर कभी जल्दी आ जाती तब शाम शहर सजाती रात कभी दिल दुखा बहकती वक्त की बात यही है॥हरियाली हर ऋतु को भाती जब पथ पुष्प मुसुकाते गुंजन करते



सैल्यूट टू शामली एस.पी.डॉ.अजयपाल शर्मा

शामली जिला अपराधियों से भरपूर क्षेत्र ,कोई भी अधिकारी पुलिस का ज्यादा समय नहीं टिक पाता और इन्हीं अपराधियों की भरमार ने जन्म दिया ''कैराना पलायन प्रकरण '' को .जब दिनदहाड़े अपराधी वारदात को अंजाम देने लगें ,दुकान पर बैठे व्यापार ी को गोली मार मौत के घाट उतारने लग



ऐसा साधु देखा कभी

बड़े बड़े शहरों में ,महानगरों में जाम की समस्या से सामना होता ही रहता है और इसे बड़े शहरों के लिए एक वरदान के रूप में स्वीकार भी लिया जाता है किन्तु छोटे कस्बे और गावों के लिए जाम को स्वीकार नहीं किया जा सकता इनमे ज़िंदगी आसान ही इसीलिए होती है क्योंकि इनमे किसी भी जगह ज



शामली में गैस रिसाव से ३०० बच्चे बीमार और चेतन भगत

दिल्ली -एनसीआर में ३१ अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों की बिक्री पर रोक लगाई ही थी कि लेखक चेतन भगत उसकी भर्तसना भी करने लग गए यह कहते हुए कि ,''यह हमारी परंपरा का हिस्सा है बिना पटाखों के बच्चों की कैसी दिवाली ? उनकी इस ट्वीट की देखा देखी ठाकरे भी बोले तो क्या व्



पुस्तक समीक्षा : रक्षक ( ग्राफिक नॉवेल )

भाषा : इंग्लिशपब्लिकेशन : याली ड्रीम्स क्रिएशन .याली ड्रीम्स क्रिएशन्स के परिचय पर इससे पहले के रिव्युज में काफी कुछ लिख चूका हु ,तो इस बार बिना किसी औपचारिकता के मुख्य मुद्दे पर आते है lयाली ने भूतकाल में कई अलग-अलग जेनर पर काम किया है किन्तु इसके बावजूद एक ग्राफिक नावेल या कॉमिक्स पब्लिकेशन को विव



आईएनएस कर्ण भारतीय नौसेना में शामिल

आईएनएस, ‘भारतीय नौसेना जहाज’ (Indian Naval Ship) हेतु प्रयुक्त संक्षिप्त नाम (Abbreviation) है। भारतीय नौसेना में आक्रमणात्मक एवं रक्षात्मक कार्यों में प्रयुक्त विभिन्न युद्ध पोतों जैसे- विमानवाहक पोतों, विध्वंसक पोतों, पनडुब्बियों, गश्ती पोतों आदि के साथ-साथ विभिन्न आधारों (Bases), हवाई आधारों (Air





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