शायर



गज़ल

'गजल' नहीं,महज़ ये अश्कों की बौछार है!दाद से हमको रहानहीं कभी सरोकार है!!हमदर्द बनने का हुनरतनिक भी पाया नहीं,दिल में जल-जला-मुक़म्मल जार- जार है!'गजल' नहीं ये महजअश्कों की बौछार है!!💕💕💕💕गज़ल💕💕💕💕हम तो सागर से गोमुख★ के राहीधार को पलट कर- हम बहे रहे हैंशायरी का ही दमख़म है - जिसनेबोल बोले हैं अन



रोमांस लॉकबंदी में

रोमांस लॉकबंदी मेंघर में महफ़ूज हो,मास्क मत लगाना।कर्फ्यु सड़क पर है,गली-कूचों से गुजर-आज की रात आ जाना।।बुर्का है एक काफी-हुश्न छुपाने के लिए,चिलमन के धुँधरु बजा कर,साँप को रस्सी समझ तुमदिल में उतर बस जाना।।।💕💕💕के. के.💕💕💕



हुश्न ओ' सबब

🌸🌸हुश्न ओ' सबाब🌸🌸प्रोफाइल फोटो हर शाम तुम, बदलते रहना!दिल की बात कह अगन समेटते हीं रहना!!चिलमन की क्या? औकात, हुश्न छुपा सके,दिल की लबों पे बिखेर,इकरार तुम करना!प्यार रहा अब तलक,बस प्यार करते रहना!!🌹🌹🌹🏵️🏵️🌹🌹🌹🌺डॉ. कवि कुमार निर्मल🌺



इश्क़ का अब्सर

मेरे इश्क़ का अब्शर अब बहने दो ।इस जूनून में ख्वाबीदा अब हमें होने दो ।सब कहते है मुख्तलिफ है तेरे मेरे रास्ते,वो क्या जाने मेरा इख्लास तेरे वास्ते।।❤❤



मौत

"मौत"मौत तो महज़ एक है वहम,मौत अरअसल नया जनम है।मौत हीं है अगली ज़िंदगी अगली,मौत हीं असली फलसफ़ा है।।मौत हीं खुदा ओ' है क़ुरआन,बाइबल की रोचक पैरेबल्स;ऋचाओं की विहंगम खान है।मौत से हीं है सारा यह ज़हान,मौत हीं मानो- ज़िंदगी की शान है।।डॉ. कवि कुमार निर्मल



कोई नंगा तन न देखा जाएगा(ग़ज़ल)

कोई नंगा तन न देखा जाएगाऔर द्रवित मन न देखा जाएगागूंजती हैं कानो में किलकारियांसूना सा आँगन न देखा जाएगाहोटलों में चाय कॉफी शॉप परचीखता बचपन न देखा जाएगाउम्र से पहले जो बूढ़े हो गएउनसे अब यौवन न देखा जाएगारोज़ दिल की वेदना में डूबतीआँखों का अनशन न देखा जाएगा



हिन्दी शायरी

🌺🌺🌺🌺जन्में थे जब तो बेहिसाब ज़श्न थे मने,स्वजनों के जाने के साथवसियतनामे खुले।हुनर था बहुत परवह छुपाये न छुप सका--जाने के बाद सभों केआँसुओं संग बह रहे।।🌹🌹🌹🌹🌹🌹बेवफ़ाई देख कविता-शायरी उमड़ बरसती है।हर हर्फ-छंद से हुश्न की दीवारें चिनी जाती है।।शायर आशिकी कीशहनाई आदतन बजाया है।'कवि' नेह समेट



"ज़िंदगी"

🐾🐾🐾🐾🐾🐾🐾ज़िंदगी की अधुरी किताब,अश्कों की अज़िबोगरीब दॉस्ता है!🌵🌵🌵🌵🌵🌵🌵🌵मानो न मानो दोस्त,ये मुकम्मल बेज़ुवाँ है!!🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺उल्फ़त का यह है जनाजा,बेवफ़ाई इसका इन्तिहॉ है!🎄🎄🎄🎄🎄🎄🎄सिद्दतों का असर यक़िनन,फ़रिस्तों पे हीं मेहरवॉ है!!🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼खुदगर्ज- जाहील इन्सान पे,होती नहीं



मेरे अल्फ़ाज़



अधूरा वादा

कुछ अनकहे वादे तू भी निभा लिया करकब तक यू इंतज़ार में रात को गले लगाया करू



आशिक

••••••••• आशिक •••••••••आंखों से नहीं दिल में डूबमदहोश होता है आशिकचाहत लुटा के किरदारबन पाता है आशिक•••••••••••••••••••••हाल यह है अपनाउकेर लेता हूं रकीरें मगरमहफ़ूज रख नहीं पातादर्द बन रिस रहा नासूरअश्क बहाता रहाजार -जार हो करअश्क देख कर मगरमैं पोंछ हूं सदा पाता•••••••के. के.•••••••



नज़र से नज़र की सिफ़ारिश न होती

नज़र से नज़र की सिफ़ारिश न होतीतो दिल में मोहब्बत की ख़्वाहिश न होतीसभी अपनी तहज़ीब पहचानते अगरबदन की कहीं भी नुमाइश न होतीख़लल कुछ इबादत में पड़ता नहीं तबजो इन्सां की फ़ितरत में लग्ज़िश न होतीअगर तुम न मिलते हमें ज़िंदगी मेंजहां में हमारी रिहाइश न होतीछुपाए मोहब्बत कभी छुप सकी क्याकहाँ तक इन आँखों से बारिश न



मोहब्बत

रात जितनी बढ रही थी ,खामोशी उतनी ही फैल रही थी । रूठ कर तेरा ,यूं बैठना कहा मेरे दिल की पुकार सुन पा रही थी ।।😍😍😍😍😍😍😍



सुकून

सुकूनमशगूल थे बियाबानों में,कभी धुँध,कभी दोस्तों केआशियानों में!झंझावात् तोकभी तूफ़ानों में!!सकून मिला है तोसिर्फ तेरीहंसी ओ' मुस्कानों में!!!डॉ. कवि कुमार निर्मल



मोती मेरे हाथ का .. .. .. ..

टूटना ही था अगर .. .. .. .. .. .. .. .. .. . मोती ने माला से .. .. .. ..अच्छा होता कि वो मोती .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. .. मेरे हाथ में ही न आता !. ..



आशिकाना

★★★★★उल्फ़त★★★★★क़ायनात के मालिक का वारिस,भिखारी बन छुप अश्क बहाता है।सर्वनिगलु एक अमीरजादा,खोटे सिक्के की बोरी पाता है।।🌵🌵🌵🌵🌵🌵🌵🌵सुना है इश्क 'खास महिने' मेंशिकार कर सवँरता हैं !हुश्न पे एतवार कर,"मुकम्मल" फना होता है!!🍂🍂🍂🍂🍂🍂🍂उड़ता रहा ख्यालों में तेरेउम्मीदों से गुल खिले मेरे💮💮💮💮💮�



मुझे मार दीजिये

आप सभी के लिये पाकिस्तान के मशहूर शायर अहमद फ़राज़ की एक नज़्म जो पाकिस्तान के कट्टरवादी संगठनो पर चोट करती है का हिन्दी अनुवाद पेश है. काफ़िर हूँ, सिर फिरा हूँ मुझे मार दीजियेमैं सोचने लगा हूँ मुझे मार दीजिये है एहतराम हज़रते-इंसान मेरा दिलबेदीन हो गया हूँ मुझे मार दीजिये मैं पूछने लगा हूँ सबब



शायरी

शायरीशायरी लिखूं क्या?शरहदें जब मजबूर हैं!फासला एक आता है मुझे-सबका मालिक एक है!!डॉ. कवि कुमार निर्मलके. के.



वख़्त बचता नहीं

वख़्त बचता नहींवख़्त बचता हीं नहीं उफ! खुद के लिये,हदों के पार जा- ख़ुद को कुछ सँवार लूँ!गुलशन में तुम्हारे मशगूल हुए इस कदर,कैसे (?) कुछ लम्हें तेरी तवज़्जो में,'गुफ़्तगू' कर ताजिंदगी गुजार दूँ!!डॉ. कवि कुमार निर्मल



दिल की डायरी

💐💐💐💐💐💐 एक ख्याल आया जो मन में, डाल दिया तुमने उलझन में मिले जो तुम ऐसे डगर में, भूल गया सब पल भर में 💛💛💛💛💛💛 आसमान छूने की ललक थी



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