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जन्मदिन शेर

एक गुजीदा गुलाब भेजूँ आपको या पूरा गुलिस्ता ही भेंट कर दूँ आपको , शेर लिखूँ आपके लिए या ग़ज़ल में ही शामिल कर दूँ आपको ,रवि हैं आप , हमेशा आफ़ताब की तरह चमकते रहे जहान में ,अँधेरे वक्त में भी पूनम का साथ हो, मेरे खुदा से यही दुआ है आपको ा



कुछ शेर

"कुछ शेर"बहुत गुमराह करती हैं फिजाएँ जानकर जानमआसान मंजिल थी हम थे अजनवी की तरह।।तिरे आने से हवावों का रुख भी बदला शायदलोग तो कहते थे कि तुम हुए मजहबी की तरह।।समय बदला चलन बदली और तुम भी बदलेबदली क्या आँखें जो हैं ही शबनबी की तरह।।लगाए आस बैठी है इंतजार लिए नजरों मेंतुम आए तो पर जलाए किसी हबी की तरह



अखबानी ताकत का इस्तमाल ( अरख को अख़गर की जरुरत है )

अरख की अख़लाक़ी पर सवाल जरूर होना चाहिए, मादरे वतन के लिये भी अख़लाक़ जिन्दा रहना चाहिए \ अखबान पर फ़िदा होने वालो अपना भी अख्तर चमकेगा हम अखयार है वा लाख अजकिया है हममे --- पुरखो की अखनी का समावेश है हममे अज़ली अपनी पहचान ............ इरादे एकदम अजीम - अस्साम तवारीख गवाह होगी (जिंद



गुबाया, श्री शेर सिंह - लोकसभा सदस्य

निर्वाचन क्षेत्र -फिरोजपुर (पंजाब)दल का नाम -शिरोमणि अकाली दल (शि.अ.द.)ईमेल -ss[DOT]ghubaya[AT]sansad[DOT]nic[DOT]inजन्म की तारीख -10/06/1962उच्चतम योग्यता -मैट्रिकशैक्षिक और व्यावसायिक योग्यता -मैट्रिक, राज्‍ाकीय उच्‍चतर माध्‍यमिक विद्यालय, लामोचर कालान से शिक्षा ग्रहण की।व्यवसाय -कृषकस्था



इबादत

कर्म से होती पहेचान सबकी कर्म ही है मील्कियत आखिरत की। दिखावा कुछभी करो फल वही देता खुदा जैसी है नियत आप की। सखावती का दिखावा बेवकुफी है उससे नही बनती पहेचान किसी की।



पल-छिन

मेरी बंदगी पे इतनी इनायत करले ऐ खुदाकी मुंतज़िर-ऐ-ज़िंदगी को उनकी मौसिकी से नजात मिल जाए ये मेरी तिशंगी है ना की नादान सी खवैशे उनके तज्वर किजो कभी पूरी हो नहीं सकती....।।।- जास्मिन बहुगुणा



इस्तीफा पत्र

मंजूर कर दो इस्तीफा मेरा,हुस्नपरस्ती की चाकरी सेअच्छी तो खूब लगती है,पर अब होती नहीं मुझसे !.और ले जाओ ये पुलिंदाकागजात का, जिसमेंलिखा है सारा हिसाबतेरा-मेरा और हमारा का !.खून-ए-दिल से भरीये दवात भी ले जाओजो एक भी हर्फ़ नहींलिखती किसी और को !.और हिसाब कर दो पूरा मेरे मेहनताने का,बची-खुची मेरी ज़िंदगीम



आप‬ याद आते हो

मेरे शब्दों में अब बजन ही कंहा रहा है वो तो बस असर था तेरी मोहब्बत का , जो इतना कुछ लिखा था तेरे को दिल के आइने में देख देख के ... ‪#‎आप‬ याद आते हो मनमोहन कसाना



कुछ संकलित शेर

    कुछसंकलित शेर  शाम से ही बुझा सा रहता है ,दिल हुआ है चिराग मुफलिस का |              अज्ञात झूठ के आगे पीछे दरिया चलते हैं ,सच बोला तो प्यासा मारा जायेगा |             वसीम बरेलवी एक मदारी ( शायर ) के जाने का गम किसको गम तो ये है मजमा कौन लगायेगा |          वसीम बरेलवी मुसलसल गम और लम्बी जिन्दगान





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