शहीदी

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सादर नमन, शहीदी दिवस

मात्रा भार- 16+16= 32....... सादर नमन, शहीदी दिवस झूल गए फंदे पर वीरा, भाई तीनों हँसते हँसते सिंह भगत सुखदेव राजगुरु, दिए शहीदी लड़ते लड़ते धन्य मातु है देश धन्य है, मान्य धन्य चीर धन्य धनी उनके पथपर चल रे गौतम, राह दिखाए मरते मरते॥ आज शहीद दिवस यह कहता, मेरा दिन



देश के लिये....

जब एक फैसला हुआउस दिन एक बुजुर्ग की नजर में चमक दिखी थीदुसरे दिन बेंको में अपने नोट जो कुछ ही दिन पहले निकले थेबदलने गएउनका बीपी बस बढ़ने लगा था...वह तो देश को अपने सीने में बसा के आया थापर जब अपने आस-पास देखा बूढ़े-गरीब अपना काम छोड़कर अपने लिए खड़े थेदेश के नाम परमैं सोचते हुए आगे बढा ही थाबैंक में पै





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