अभियन्ता दिवस (15 सितम्बर) इंजीनियर्स-डे

इंजीनियर वह व्यक्ति है, जोविज्ञान के मूलभूत ज्ञान का प्रयोग समाज एवं देश हित के लिए करता है । भारतरत्न सर मोक्षगुण्डम विश्वेश्वरैया (एम. विश्वेश्वरैया) एकप्रख्यात इंजीनियर और राजनेता थे । उन्होंने आधुनिक भारत के निर्माण मेंमहत्वपूर्ण भू



“बिना राष्ट्रभाषा के देश गूंगा"

“बिना राष्ट्रभाषा के तो कोई भी देश गूंगा है । राष्ट्र की अस्मिता की पहचान ही राष्ट्रभाषा से होती है । बगैर इसके सम्पूर्ण देश और देशवासियों की उन्नति सम्भव नहीं है ।अंग्रेजी भाषा की बढ़ती मांग और हिन्दी का वजूद बनाए रखने के लिए हर साल देशभर में 14 सितम्बर को हिन्दी दिव



“शिक्षक-दिवस” ...तस्मै श्री गुरवे नमः

“ एक अच्छा शिक्षक एक मोमबत्ती की तरह होता है, जो खुद जलकर दूसरों के लिए पथ-प्रदर्शक का कार्य करता है ।"शिक्षण सबसे महान व्यवसायों में से एक है और यह एक ऐसा कार्य है, जो न केवल बच्चे को विभिन्न विषयों और ज्ञानक्षेत्र के बारे में विस्तृत अध्ययन के साथ-साथ बच्चे को अपनी



क्या आप “अशिमा चटर्जी” के बारे में जानते है ???

अशिमाचटर्जी : आजभी देश में कई जगह ऐसी हैं जहाँ पर लड़कियों को पढ़ाया नहीं जाता है । अगरहम सन् 1920 और 1930कीबात करें तो उस समय लड़कियों क



“ इंजीनियर्स-दिवस ” (15 सितम्बर)

‘ भारत रत्न ’ मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया जी का‘जन्म-दिवस’डॉ. विश्वेश्वरैया जी ने एक साधारण परिवार में जन्मलिया । उनके जन्म के समय हम लोग अंग्रेजों के गुलाम थे और उनके कठोर नियम एवं प्रताड़नासे उपेक्षित जीवन जीना पड़ता था । प्रत्येक भारतीय के लिए उस समय प्रगति के सारे द



हिन्दी दिवस (14 सितम्बर)

14 सितम्बर1949 को ही हिंदी को देवनागरीलिपि में भारत की कार्यकारी और ‘ राष्ट्रभाषा ’ का दर्जाअधिकारिक रूप से दिया गया था और तभी से देश में 14 सितम्बरका दिन ‘हिंदी दिवस’ के रूप में मनायाजाता है । 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने एक मत से यह निर्णय लिया कि हिन्दी ही भारत



डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णनजी के अनमोल विचार ( शिक्षक दिवस, 5 सितम्बर )

' शिक्षक दिवस ' पर हम समस्त शिक्षकों का श्रद्धापूर्वक अभिन्नदन और वंदन करते हैं; जिनकी छाया में भारत का स्वर्णिम भविष्य निखर कर दुनिया में जगमगाये और डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन ( जिनके जन्मदिन 5 सितम्बर के उपलक्ष्य में ‘शिक्षक दिवस’ मना



लेख-- राष्ट्र का उदय और अस्त गुरु के हाथों में

गुरुर ब्रह्मा गुरुर देवो महेश्वरा गुरुर साक्षात परब्रम्ह तस्मै श्री गुरुवे नमः आज यह उक्ति हमारे शैक्षिक परिवेश में शिक्षकों और छात्रों के बीच क्रियान्वित होती नहीं दिखती। आज शिक्षक और छात्रों के बीच खाई गहरी होती जा रहीं है। गुरु हमारे पुनर्जन्म का गर्भ होता है जहां से हमारा सही अर्थों में दोबारा ज



14 सितम्बर : हिन्दी दिवस

जीवन में कोई भी कार्य कठिन या सरल होने का धरातल उसके पार्श्व में मात्र हमारी धारणाएं एवं उसके प्रति हमारे विचार हैं । अंग्रेज़ी में काम करना सरल है और हिन्दी में कठिन, यह तथ्य मात्र एक धारणा से अधिक और कुछ भी नहीं । कितने ही परिवारों में लोगों को संस्कृत में गहन चर्चाएँ और वाद-विवाद करते देखा जाता है





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