सोच



22 फरवरी 2021

रील लाइफ VS रियल लाइफ_4

आज बात पहले रियल लाइफ की करते है , आज के न्यूज़ पेपर में आया था कि एक पिता अपने बेटे के गम को बर्दाश्त नहीं कर सका इसलिए वह अपने परिवार के साथ आत्महत्या कर लेता हैं , हम मानते हैं कि किसी मौत का गम इतना होता कि इंसान अपना सुध - बुद्ध खो बैठता हैं लेकिन क्या उसे ये सब करना चाहिए था , जबकि उनकी दो ब



31 जनवरी 2021

रील लाइफ VS रियल लाइफ_2

रील लाइफ में एक शो आता हैं अनोखी और शौर्य की कहानी जिसमें अनोखी पढ़ना चाहती हैं पंरतु उसके पिता उसे सपोर्ट नहीं करते क्युकी वो एक लड़की हैं , पर उसकी मेम उसे सपोर्ट करती हैं और उसे कॉलेज में प्रवेश मिल जाता हैं,अब बात करते हैं रीयल लाइफ कीअक्सर देखने में आता हैं कि कुछ घरों में बेटियां होती हैं तो उ



29 जनवरी 2021

रील VS रियल लाइफ

मैंने कुछ दिन पहले एक सीरियल देखा अनुपमा जिसमे अनुपमा की सास अपनी बहु को कहती है कि अगर पति गलती कर के वापिस लौट आये तो उसे माफ़ कर देना चाइए क्युकी औरत तो देवी होती है और उसमे सहनशक्ति होती है , वो ही घर बनाती है , वो अपने बेटे का पक्ष ले रही थी ये जानते हु



जज़्बात दिल के

"चलो हम भाग कर शादी कर लेते हैं , अगर मेरे पेरेंट्स को पता चला कि मैं तुमसे प्यार करती हू तो मेरे पेरेंट्स मेरी शादी कहीं और करा देंगे "रागनी सुमित को बोल रही थी ,सुमित और रागिनी दोनों कॉलेज फ्रेंड थे दोनों एक दूसरे से प्यार करते थे ,वैसे दोनों की कोई ज्यादा उम्र नहीं थी यही कोई 20 - 22 साल के थे वो



कांग्रेस में सब ठीक नहीं, क्या‍ सोनिया कांग्रेस को बचा पायेंगी?

वरिष्‍ठो के आक्रोश ने पार्टी में सोच पैदा कीएक साल से ददक रही चिंगारी अब आग का रूप लेने लगीक्‍या आपस में लडकर पार्टी दो फाड होगी?क्‍या देश से कांग्रेस का अस्तित्‍व मिटाने का सपना साकार होने वाला है? “सोनिया जी, पार्टी को महज इतिहास का हिस्सा बनकर रह जाने से बचा लें: परिव



सोच बदलो।

सोच बदलो।रोज़ रोज के शिसकने से अच्छा, एक दिन जी भर कर रो ले।सरकार की नीयत में खोट से, बेरोजगारी को निःसंकोच झेल ले।धरना प्रदर्शन को कोरोना वायरस ने, मूली की तरह निगल लिया।लोकडाउन भी अब, अनलॉक डाऊन में सरकार ने बदल दिया।एडमिशन पेपरों को लेकर, सरकार अड़ गई, विद्यार्थियों ने पहचान लिया।नई शिक्षा नीति के



मुसकुराहट भाग -५

अगले दिन कल्पना धीर से मिली। वह अपनी खुशी से लाए हुए सामान को देना चाहती थी फिर यह सोच कर रूक गई कि धीर अभी तो यही है। दो दिन बाद दे दुंगी लेकिन मन में सपना की शंका और धीर के सवाल के डर से वह उसे बता ही नहीं पाई। हालांकि वह खुश थी। कल्पना का मन होता कि वह उसे बनवाने के लिए दें दे कि आ



सोचना - समय की मांग

आज माननीय प्रधानमंत्री जी ने अमुक घोषणा की है , आज हमें निम्न चीजो की खरीद करनी है , अगली छुटियो में हमें हमास द्वीप पर जाना है , आज पड़ोसी राम सिंह और कृष्ण सिंह लड़ गए आदि के बारे में ही बाते करते हुए हमारी ज़िंदगी गुजर रही है। आज की इस भाग दौड़ की दुनिया में किसी को ठहरने और सोचने का वक्त ही नही है।



कोरोना वायरस

सकारात्मक संदेश



गंदी पुरुष सोच पर भारी नारी पवित्रता

राजनीति का सुनहरा आकाश हो या बिजनेस का चमकीला गगन ,अंतरिक्ष का वैज्ञानिक सफर हो या खेत -खलिहान का हरा-भरा आँगन ,हर जगह आज की नारी अपनी चमक बिखेर रही है ,अपनी सफलता का परचम लहरा रही है .आज घर की दहलीज को पार कर बाहर निकल अपनी काबिलियत का लोहा मनवाने वाली महिलाओं की संख्



जिंदगी किसी है पहेली

जिंदगी किसी है पहेली एक बार जरूर पडे लेख अटैच फाइल में दिया गया है



अपने आप को किसी से छोटा न समझे

नमस्ते ,दोस्तों भगवान ने हम सभी को एक जैसा बनाया हे,इंसान बड़ा या छोटा अपने कर्मो से होता हे या फिर कही न कही उसकी काबिलियत में कुछ कमी होती हे तो वह अपने आप को दुसरो से छोटा समझने लगते पर अपनी कमियों को दूर नहीं करते और निराश हो ज



मानव और उसकी सोच

मानव और उसकी सोच यात्रा के समान ही चलती है जिस तरह मानव धन कमाने हेतु विचरन करते रहता है ठीक उसी तरह यात्रा करने के साथ उसकी सोच भी विचरन को विवश रहता है जिस मनःसथिती से वह विचरन कर रहा होता है मानो हर पल वह बेचैन मन से चला करता है कया होगा कैसे होगा यह सब सोचते ही विचलित मन से यात्रा पर चलता रहना ह



छोटी सोच और पैर की मोच

छोटी सोच हो या पैर की मोच, कभी आगे नहीं बढ़ने देती. जहां छोटी सोच के चलते नीयत डोलने में देर नहीं लगती,वहीं पैर की मोच अपाहिज बना देती है. बाकी बची दुनिया, जिसके पीछे पड़ जाए, तो ऐसे पड़ती है कि जैसे खुद दूध की धुली हो. किसी काम की सकारात्मक या नकारात्मक समीक्षा हो सकती है. लेकिन किसी के अस्तित्व को



06 सितम्बर 2019

अनिर्णय और अत्यधिक सोच से बाहर निकलना।

में कुछ ऐसे लोगों के साथ काम कर रहा हूं जो बहुत बुद्धिमान, बहुत सक्षम और बहुत प्रतिभाशाली हैं – लेकिन वे अनिर्णय और विश्लेषण पक्षाघात में फंस जाते हैं।वास्तव में, अंतहीन विकल्पों में से उखाड़ फेंकना और खो जाना निष्क्रियता पैदा करके उनकी प्रभावशीलता और बुद्धिमत्ता को क



शायरी

तेरे बिन भी कभी हमें जीना होगा सोचा कहाँ था, बिन धड़कन के भी दिल धड़केगा सोचा कहाँ था, हमको तेरी खबर जमाने से अब तो मिलने लगी हैं, तू इस तरह हमसे बेखबर हो जाएगा सोचा कहाँ था। ©सखी



मैं कौन खामखां !

सही कहा है किसी समझदार ने कि अपने तो फिर जी लेने दें लेकिन समाज में ' मैं कौन खामखां ' की मानसिकता वाले जान लेकर ही मानना चाहते हैं।माता-पिता भले ही मान लें-संतान बालिग है, अपना निर्णय लेने को स्वतंत्र है। जहां रहे खुश रहे । संतान ने भी सार्वजनिक रूप से माफ करने की गुहार लगा ली हो। भले ही अपने किए क



सफलता किसकी?

सफलता किसकी आज सोमवार है और प्रत्‍येक सोमवार को सकारात्‍मक सोच की चर्चा करते हैं। आज की वीडियो में बताएंगे कि सफलता किसकी होती है?विस्‍तार से जानने के लिए नीचे लिखे लिंक पर क्लिक करें- Loading playlists... YouTube



आपकी मानसिकता ही आपकी असफलताओं का कारण है

“A man cannot directly choose his circumstances, but he can choose his thoughts, and so indirectly, yet surely, shape his circumstances.”― James Allenअगर आप अपने चारों तरफ देखें तो हर कोई जिंदगी में कुछ न कुछ पाने के लिए कठोर परिश्रम कर रहा है। परन्तु कुछ लोग कामयाब हो जाते है कुछ नहीं। अगर हम कामया



फिदायीन आतंकी

फिदायीन, डॉ शोभा भारद्वाज विश्व धीरे – धीरे आतंक वादकी गिरफ्त में घिरता जा रहा है |आतंकवाद एक ऐसी हिंसात्मक गतिविधि है जो शान्ति काल में भीचलती रहती है, परिणाम घातक होता है आतंकवाद के पोषक की नीयत आर्थिक ,धार्मिक राजनीतिक व्यवस्था एवं शन्ति कोभंग कर अधिक से अधिक नुक्सान पहुंचा कर आम नागरिकों में भय



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