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इस तारीक को पूर्ण चंद्रग्रहण, ‘सुपर ब्लड मून’ की तरह होगा

एक विशेष खगोलीय घटना इस रविवार यांनी 20 जनवरी की रात के लिए कैलेंडर में शामिल हो चुका है और विशेषज्ञ पहले से ही इस घटना की भाविष्यवाणी कर रहे हैं: Sky and Telescope Magazine पत्रिका कहती है, ”पूर्णता के लिए पूरे 62 शानदार मिनट”।‘2019 का एकमात्र पूर्ण चंद्रग्रहण,’ NASA कहत



उपवास उम्र सम्बंधित रोग से लड़ने में सहायक, रिपोर्ट

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा ऐसे प्रमाण पाए गए हैं, जिनमें उपवास से जिगर और कंकाल की मांसपेशियों में सर्कैडियन क्लॉक प्रभावित होती है। इससे चयापचय को फिर से व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है, जिससे स्वास्थ्य और उम्र बढ़



सड़क पर प्रसव

वक़्त का विप्लव सड़क पर प्रसव राजधानी में पथरीला ज़मीर कराहती बेघर नारी झेलती जनवरी की ठण्ड और प्रसव-पीर प्रसवोपराँत जच्चा-बच्चा 18 घँटे तड़पे सड़क पर ज़माने से लड़ने पहुँचाये गये अस्पताल के बिस्तर परहालात प्रतिकूल फिर भी नहीं टूटी साँसेंकरतीं वक़्त से दो-दो हाथ जिजीविषा की फाँसें जब एनजीओ उठाते हैं दीन



मातृभाषा :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारे देश भारत में कई जाति / सम्प्रदाय के लोग रहते हैं | कई प्रदेशों की विभिन्न संस्कृतियों / सभ्यताओं का मिश्रण यहाँ देखने को मिलता है | सबकी वेशभूषा , रहन - सहन एवं भाषायें भी भिन्न हैं | प्रत्येक प्रदेश की अपनी एक अलग मातृभाषा भी यहाँ देखने को मिलती है | हमारी राष्ट्रभाषा तो हिन्दी है परंतु भिन्



विवेक :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*प्रत्येक मनुष्य एक मन:स्थिति होती है | अपने मन:स्थिति के अनुसार ही वह अपने सारे कार्य संपन्न करता है , परंतु जब मनुष्य की मन:स्थिति में विवेक सुप्तावस्था में होता है तो उसके निर्णय अनुचित होने लगते हैं | प्रत्येक मनुष्य को अपने भीतर के विवेक को जागृत करना चाहिये | जिस दिन विवेक जागृत हो जाता है मन



राग : शुभ्रा

राग : शुभ्रा समूचे विश्व में मनाए जानेवाले भिन्न भिन्न त्योहार मानव की उत्सव मनाने की सहज प्रवृत्ति से जुड़े हैं और मौसम से, प्रकृति से इनका एक अटूट रिश्ता है। गणेशोत्सव के आख़िरी दिन गणेशजी को विदा देते समय , और कृष्ण जन्माष्टमी के दिन कृष्ण का स्वागत करते समय ब



वचन ,विचार एवं व्यवहार :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरती पर इतने प्राणी है कि उनकी गिनती कर पाना संभव नहीं है | इन प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ प्राणी मनुष्य माना जाता है | मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी इसलिए माना जाता है क्योंकि उसमें जो विशेषतायें हैं वह अन्य प्राणियों में नहीं पायी जाती हैं | वैसे तो ईश्वर ने मनुष्य में विशेषताओं का भण्डार भर दिया ह



मानव धर्म :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरा धाम पर ईश्वर ने चौरासी लाख योनियों का सृजन किया है | इनमें जलचर , थलचर एवं नभचर तीन श्रेणियाँ मुख्य हैं | इन तीनों श्रेणियों में भी सर्वश्रेष्ठ योनि मानव योनि कही गई है | मनुष्य जीवन सृष्टि की सर्वोपरि कलाकृति है , ऐसी सर्वांगपूर्ण रचना किसी और प्राणी की नहीं है | यह असाधारण उपहार हमको मिला



विवेक :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*मानव जीवन में बहुत से उतार चढ़ाव आते रहते हैं | कभी सुख कभी दुख मिलना साधारण सी बात है | मनुष्य को इन सभी अवस्थाओं में सकारात्मक या नकारात्मक निर्णय लेने के लिए परमात्मा मनुष्य को विवेक दिया है | कभी कभी ऐसी स्थिति हो जाती है कि मनुष्य विवेकशून्य हो जाता है और आवेश में आकर ऐसे निर्णय ले लेता है जो



कम कार्बोहाइड्रेट वाले आहार वजन घटाने में सहायक, रिपोर्ट

कम कार्बोहायड्रेट युक्त आहार खाने से वजन घटाने में मदद मिलती है। हाल ही के शोध के निष्कर्षों के अनुसार, कम कार्बोहाइड्रेट युक्त भोजन वजन कम रखने में सहायक सिद्ध होती है। यह जांच बीएमजे नामक पत्रिका में सामने आया है और कहा गया है कि कम शक्कर खाने से कैलोरी की मात्रा कम हो... और पढ़ें



चंद्रमा के दूरस्थ सतह की जाँच के लिए CHANG’E-4 अंतरिक्ष यान को चीन ने भेजा

चीन चंद्रमा के दूर वाली सतह पर अपने अंतरिक्ष यान Chang’e-4 को एक ऐसी जगह की खोज में लगायगा जो कि इतने करीब होने के बावजूद हमारे लिए लगभग पूरी तरह से अज्ञात है। चीन के राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रशासन (CNSA) का लक्ष्य चांद की सतह पर अज्ञात दक्षिण ध्रुव-ऐटकेन बेसिन (सबसे बड़े, स



न छेड़ो प्रकृति को

न छेड़ो प्रकृति को आज भी हवाए अपने इशारे से बादलो को मोड़ लाती हैं। गर्म सूरज को भी पर्दे की ओट मे लाकर एक ठंडा एहसास जगाती हैं। रात की ठंड मे छुपता चाँद कोहरे की पर्त मे, उस पर्त को भी ये उड़ा ले जाती हैं। प्रकृति आज भी अपने वजूद और जज़बातो को समझती हैं हर मौसम को।पर मानव उनसे कर खेलवाड़, अपने लिए ही मु



नैतिकता :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*संपूर्ण संसार में मनुष्य अपने दिव्य चरित्र एवं बुद्धि विवेक के अनुसार क्रियाकलाप करने के कारण ही सर्वोच्च प्राणी के रूप में स्थापित हुआ | मनुष्य का पहला धर्म होता है मानवता , और मानवता का निर्माण करती है नैतिकता ! क्योंकि नैतिक शिक्षा की मानव को मानव बनाती है | नैतिक गुणों के बल पर ही मनुष्य वंदनी



नासा ने नए साल की पूर्व संध्या पर हमारे सौरमंडल से बाहर अभी तक के सबसे दूर वाली तस्वीरें खींची!

एक ऐतिहासिक अंतरिक्ष कार्यक्रम की खबर सुनने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक नए साल की पूर्वसंध्या का इंतजार कर रहे थे। नासा के एक अंतरिक्ष यान से सबसे दूर वाली फोटो के लिए जूम किया। यह संभवतः सबसे पुराना, ब्रह्मांडीय पिंड है, जो अल्टिमा थूले( लगभग चार बिलियन मील (6.4 बिलियन



Learn Maithili Language on Youtube

अपने सब मिथिला वासी के हमारा तरफ सॅ प्रणाम , मिथिलाक पावन धरती पर जन्म भेनाई अपनेआप में एकटा गर्वक विषय अछि,संगे अपना सबके इहो कर्तव्य बनैत अछि कि मैथिलि भाषा के आगा बढाबू, मैथिली के डिजिटल वर्ल्ड से जोरु आ मैथिली भाषाक प्रति लोक सबहक बिच जागरूकता फैलाऊ



मानव का आहार :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*ईश्वर ने सुंदर सृष्टि की रचना की | अनेकों प्रकार की योनियों की रचना करके कर्म के अनुसार जीव को उन योनियों में जन्म दिया | इन्हीं योनियों में सर्वश्रेष्ठ मानवयोनि कही गयी है | प्रत्येक जीव को जीवन जीने के लिए आहार की आवश्यकता होती है जहां जंगली जानवर मांसाहार करके अपना जीवन यापन करते हैं वही मनुष्य



हमारी संस्कृति :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*संपूर्ण धरा धाम पर भारत ही एक ऐसा देश है जो अनेकों प्रकार की सभ्यताएं एवं संस्कृति य स्वयं में समेटे हुए है | इस देश को "विविधता में एकता" वाला देश कहा जाता है | क्योंकि यहां पर विभिन्न धर्मों व संप्रदायों के लोग एक साथ निवास करते हैं | इन सभी मतावलम्बियों की अपनी - अपनी भाषाएं , अपने - अपने रीति -



कभी सोचा है आखिर क्योंं सजाया जाता है क्रिसमस ट्री?

क्रिसमस के मौके पर हर घर में छोटे से लेकर बड़े क्रिसमस ट्री को बेहद आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। गिफ़्ट, लाइट और मोमबत्तियों से सजा क्रिसमस ट्री बेहद सुंदर दिखता है, लेकिन क्या कभी आपने सोचा क्रिसमस ट्री को सजाने की शुरुआत कैसे हुई और इसे क्यों सजाया जाता है? zoom ऐसा माना



कलियुग :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में समस्त सृष्टिकाल को चार भागों में विभाजित किया गया है जिन्हें चार युगों का नाम दिया गया | यह युग है सतयुग , त्रेतायुग , द्वापरयुग एवं कलियुग | इसमें से तीन युग तो व्यतीत हो चुके हैं चौथा कलियुग चल रहा है | प्रत्येक युग का आचरण एवं मनुष्य के आचार - विचार भिन्न-भिन्न होता रहा है | पू



"ज़िंदगी का सबक सिखाता " - दिसम्बर और जनवरी का महीना

एक और साल अपने नियत अवधि को समाप्त कर जाने को है और एक नया साल दस्तक दे रहा है। बस, एक रात और कैलेंडर पर तारीखे बदल जायेगी। दिसम्बर और जनवरी महीने की कुछ अलग ही खासियत होती है। कहने को तो ये भी दो महीने ही तो है पर साल के सारे महीनो को बंधे रखते है। दोस



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