सशक्तिकरण

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आज भी प्रासंगिक है महिला सशक्तिकरण पर बनीं ये फ़िल्में

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महर्षि बाल्मीकि की जयंती के शुभ अवसर पर महर्षि बाल्मीकि द्वारा रचित रामायण की भूमिका

‘महर्षि बाल्मीकि’ द्वारा रचित रामायण की भूमिका डॉ शोभा भारद्वाज महाराज जनक की पुत्री अयोध्या के राजाधिराज श्री राम की गर्भवतीभार्या सीता निशब्द गंगा को प्रणाम कर उनमें प्रवेश कर गई | सीता को भगवती गंगामें ही अपना सुरक्षित घर नजर आया| उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे भागीरथी उन्हें बुला रही हों |भगवती गंग



अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (Happy Women's Day)

आज पूरा विश्व अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस(Happy Women's Day) मना रहा है, इसी को ध्यान में रखते हुए गूगल ने भी अपना आज का डूडल (Google’s Doodles) महिलाओं के नाम समर्पित किया है और नारी के प्रति अपने सम्मान को बताया है। गूगल में बेहतरीन तरीके से लगभग 14 भाषाओं में महिलाओं



बिहार: डायन करार देकर महादलित बुज़ुर्ग महिला की चाकू से काटी जीभ |

बिहार में महिलाओं के साथ बलात्कार, छेडछाड़, अपहरण, दहेज के लिए हत्या एवं प्रताड़ना के मामलें तेजी से बढ़ा है। बिहार में इस बढ़ते हुए महिला अपराध कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताज़ा मामले की बात करें तो बिहार के रोहतास जिले के तिलौथु थाना क्षेत्र में मानवता को शर्मसार करने



सीक्रेट्स ऑफ़ वूमेन एम्पावरमेंट

सीक्रेट्स ऑफ़ वूमेन एम्पावरमेंट



महिला सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण वह प्रक्रिया है । जिसकी मदद से महिलायें और अधिक जागरूक तथा अपने अधिकारों के प्रति सजग हुई है। किसी समय अपने आप को घुघंट के अन्दर काढ़ कर और घर की चहारदीवारी के भीतर पुरुषों के आदेश पालन को अपना जीवन समझने वाली महिलाएँ आज इस वर्तमान समय में पुरुष के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर खड़ी है, क



महिला सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण आज के समय में एक ऐसा शब्द है जिसे हम आये दिन अखबारों, टेलीविजन इत्यादि में देखते तथा सुनते रहते है|पर क्या आजादी के 70 साल पूरे होने के बाद भी देश को महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता है? क्या महिला सशक्तिकरण आज के समय में बस एक र



नारी सशक्तिकरण और पुरूष

स्त्री की भूमिका सदियों से सुंदरता, कोमलता, करूणा, प्रेम, अन्नपूर्णा की रही है दूसरी और पुरुष कठोर, शक्ति का प्रतीक, जीवन की हर मुश्किलों को झेलने वाला कहा गया है । कहते हैं --जिस परिवार में पुरुषों की संख्या ज्यादा होती है उस परिवार के लोग अपने आप को ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं अर्थात पुरुष संरक



ये नौटंकी बंद होनी चाहिए..

अगर आपकी पत्नी अध्यापक हैं तो आप उनके स्थान पर स्कूल में जाकर पढ़ा नहीं सकते, यदि आपकी पत्नी आईएएस हैं तो आप उनकी कुर्सी पर नहीं बैठ सकते, यदि आपकी पत्नी डॉक्टर हैं तो उनकी जगह आप किसी मरीज का इलाज नहीं कर सकते. लेकिन यदि आपकी पत्नी ग्राम प्रधान हैं या नगरपालिका परिषद की चेयरपर्सन या सदस्या हैं तो आ



तभी लेंगे शपथ .....

''औरत ने जनम दिया मर्दों को मर्दों ने उसे बाजार दिया .'' कैसी विडम्बना है जन्म देने वाली की ,जन्म देने का सम्मान तो मिलना दूर की बात है ,अपने प्यार के बदले में प्यार भी नहीं मिलता ,मिलती है क्या एक औलाद जो केवल मर्द की हवस को शांत करने का एक जरिया म



क्यों न स्त्री होने का उत्सव मनाया जाए

स्त्री ईश्वर की एक खूबसूरत कलाकृति ! यूँ तो समस्त संसार एवं प्रकृति ईश्वर की बेहतरीन रचना है किन्तु स्त्री उसकी अनूठी रचना है , उसके दिल के बेहद करीब । इसीलिए तो उसने उसे उन शक्तियों से लैस करके इस धरती पर भेजा जो स्वयं उसके पास हैं मसलन प्रेम एवं ममता से भरा ह्दय ,



' सशक्तिकरण,सत्ता,और औरत '

 14 साल की और 21 साल की मेरी दो बहनें आई पीएस और आई ए एस बनना चाहती हैं . सुनकर ही अच्छा लगेगा .लडकियां जब सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करने को खुद की और दुनिया की कमज़ोरियों से जीतती हैं तो लगता है अच्छा .बेहतर और सुखद. खासकर राजनीति ,सत्ता और प्रशासन के गलियारे और औरतें .वहां जहाँ औरतें फिलहाल ग्र



नारी

नारी , तुम किसकी बराबरी करना चाह रही हो ? नर की , जिसे तुम जन्म देती हो !कुछ बड़ा और अलग करो , देवी ।



नारी

नारी "-ईश्वर की सर्वश्रेष्ठतम कृति ================== ‘नारी तुम केवल श्रद्धा हो विश्वास रजत नग, पग-तल में, पीयूष स्रोत सी बहा करो जीवन के सुन्दर समतल में।' वास्तव में नारी इन पक्तियों को चारितार्थ करती है।नारी श्रद्धा,प्रेम,समर्पण और सौंदर्य का पर्याय है। नारी अमृत तुल्य है क्योंकि वह जीवन देती है,



नारी तुम मुक्त हो।

नारी तुम मुक्त हो।नारी तुम मुक्त हो। बिखरा हुआ अस्तित्व हो। सिमटा हुआ व्यक्तित्व हो। सर्वथा अव्यक्त हो। नारी तुम मुक्त हो।शब्द कोषों से छलित देवी होकर भी दलित। शेष से संयुक्त हो। नारी तुम मुक्त हो।ईश्वर का संकल्प हो।प्रेम का तुम विकल्प हो। त्याग से संतृप्त हो। नारी तुम मुक्त हो



महिलाएँ जिन पर कानपुर को गर्व है

महिला सशक्तीकरण पर सर्वाधिक चर्चा नब्बे के दशक से उभरे भूमंडलीकरण के दौरान प्रारंभ हुई। 'विमेन फ्रीलिव' जैसे अप्रासंगिक आन्दोलन ने 'सशक्तीकरण' का जो रूप ग्रहण किया है वह उचित एवं प्रासंगिक दोनों ही है। महिला सशक्तीकरण के सन्दर्भ में जब कानपुर का प्रसंग आता है तो कुछ नाम सहज ही याद आने लगते हैं। इन्ह



विश्व महिला दिवस पर एक कुंडलिया

सादर शुभ प्रभात मित्रों,आज विश्व महिला दिवस पर मंच की सभी महिला मित्रों को सादर प्रणाम, महिला शक्ति को सादर नमन। मुझे लगता है कि आज हमें अपने अंतरमन से यह जरूर पुछना चाहिए कि क्या हमारे अबतक के जीवन का एक पल भी बिना किसी महिला के साथ के व्यतित हुआ है। अगर उत्तर नहीं है तो पीछे मुड़कर देखें, जन्म दिया



विश्व महिला दिवस

स्त्री यदि बहन है तो प्यार का दर्पण है,स्त्री यदि पत्नी है तो खुद का समर्पण है,स्त्री यदि भाभी है तो भावना का भण्डार है,स्त्री अगर मामी, मौसी, बुआ है तो स्नेह का सत्कार है,स्त्री यदि चाची है तो कर्तव्य की साधना है,स्त्री अगर साथी है तो सुख की शतत् सम्भावना है,औरस्त्री यदि माँ है तो साक्षात परमात्मा





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