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कसक

लघुकथा कसकदिन ढले काफी देर हो चुकी थी ।शाम, रात की बाहों में सिमटने को मजबूर थी । वो कमरे में अकेला था । सोफे का इस्तमाल बैड की तरह कर लिया था उसने । आदतन अपने मोबाईल पर पुरानी फिल्मों के गाने सुनकर रात के बिखरे अन्धेरे में उसे मासूमियत पसरी सी लगी । वो उन गानों के सुरीलेपन के बीच अपने तल्ख हुए सु



एक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँ ...

मैं कई गन्जों को कंघे बेचता हूँएक सौदागर हूँ सपने बेचता हूँकाटता हूँ मूछ पर दाड़ी भी रखता और माथे के तिलक तो साथ रखता नाम अल्ला का भी शंकर का हूँ लेताहै मेरा धंधा तमन्चे बेचता हूँएक सौदागर हूँ ...धर्म का व्यापार मुझसे पल रहा हैदौर अफवाहों का मुझसे चल रहा है यूँ नहीं



सच है दुनियावालों हम हैं अनाड़ी

(सचमुच हम पत्रकार बुझदिल हैं, जो अपने हक की आवाज भी नहीं उठा पाते हैं) "अमन बेच देंगे,कफ़न बेच देंगे जमीं बेच देंगे, गगन बेच देंगे कलम के सिपाही अगर सो गये तो, वतन के मसीहा,वतन बेच देंगे" पत्रकारिता से जुड़े कार्यक्रमों में अकसर यह जुमला सुनने को मिल ही जाता है औ



26 /6/1975 देश में आपत्काल की घोषणा

26 जून 1975 देश में आपतकाल की घोषणा डॉ शोभा भारद्वाज 26 जून 1975 ,आकाशवाणी से न्यूज रीडर के बजाय तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिराजी ने आठ बजे की न्यूज में स्वयं आपतकाल की घोषणा की ‘भाईयो और बहनों राष्ट्रपति महोदय ने आपतकाल की घोषणा की है इससे आतंकित होने की आवश्यकता नहीं है’ |ब



असमंजस में हूं ......

आधुनिकता की दौड़ में डगमगाती.... संक्रमण के दौर से गुजरती... मंझधार में फंसी. ... निस्सार जीवन में जर्जर पीत पर्ण सा बिखरा उजडा मन एकाकी राही पथिक की धुंधले सपने जेहन में समाए आशा- निराशा के भंवर में मन में टीस दिल में आस कुछ कर गुजरने की चाह असमंजस मन के किसी कोने में बदलते परिवेश में क्या सही, क्



दृश्य नहीं.... दृष्टि बदलो

भागदौड़ भरे जीवन मे अनेक बार ऐसे अवसर अवश्य आते है, जब व्यक्ति स्वयं के व्यक्तित्त्व को न बदलकर, विश्व को बदलने की नाकाम कोशिश करता है । इस विचारधारा वाला छोटा-बड़ा, अमीर-गरीब या अच्छा-बुरा कोई भी व्यक्ति हो सकता है । यहाँ तक कि, अनेक बार दृढ़-निश्चयी और अच्छा व्यक्ति भी अपने व्यक्तित्त्व को नहीं बदल प



भावी आथित्य संस्कारो की झलकियां

भावी आथित्य संस्कारो की झलकियां ………………परिवर्तन के इस दौर मेंभविष्य का चित्र कुछ ऐसे उभर कर आयेगा !नैतिक मूल्यों के संग संगसंस्कारो का समस्त स्वरुप ही बदल जाएगा !सर्वप्रथम आथित्य सत्कार में,जो आगंतुक को विधिवत लुभायेगा !वही सुधि जन सर्वगुण संपन्न,सस्कारी जमात का गुरु कहलायेगा !!प्रथम काज अतिथि प्रणाम



परिस्थितियों

भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि कोई किसी के पास तीन ही परिस्थितियों में जाता है - 1- भाव में 2- अभाव में 3- प्रभाव में इसलिए आपके पास जब भी कोई आये तो उसे पूरा सम्मान दें पता नहीं वह किस स्थिति में आपके पास आया है 1-भाव से आया है तो बस प्रेम चाहिए 2- अभाव में आया है तो मदद चाहिए और आपको सक्षम समझ





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