स्त्री

सड़क पर प्रसव

वक़्त का विप्लव सड़क पर प्रसव राजधानी में पथरीला ज़मीर कराहती बेघर नारी झेलती जनवरी की ठण्ड और प्रसव-पीर प्रसवोपराँत जच्चा-बच्चा 18 घँटे तड़पे सड़क पर ज़माने से लड़ने पहुँचाये गये अस्पताल के बिस्तर परहालात प्रतिकूल फिर भी नहीं टूटी साँसेंकरतीं वक़्त से दो-दो हाथ जिजीविषा की फाँसें जब एनजीओ उठाते हैं दीन



#MeeToo मी टू सैलाब ( वर्ण पिरामिड )

येमी टू ले आया रज़ामंदी दोगलापन बीमार ज़ेहन मंज़र-ए-आम पे !वो मर्द मासूम कैसे होगा छीनता हक़ कुचलता रूह दफ़्नकर ज़मीर !क्यों इश्क़ रोमांस बदनाम मी टू सैलाब लाया है लगाम ज़बरदस्ती को "न"न मानो सामान औरत को रूह से रूह करो महसूस है ज़ाती दिलचस्पी। है चढ़ी सभ्यता दो सीढ़ियाँ दिल ह



'स्त्री' की बंपर शुरुआत

फिल्म निर्माता अमर कौशिक की डरावनी कॉमेडी 'स्त्री' जिसमे राजकुमार राव और श



हाई डिमांड "बहू-बेटी जैसी"????

आकांक्षा श्रीवास्तव। .....?????"बहू बेटी जैसी चाहिए???? क्या हुआ आप भी भौचक्के रह गए न ,भइया आजकल अलग अलग तरह कि डिमांड शुरू हो गयी है। यह सुनते मेरे मन मे भी लाखों प्रश्न उमड़ते बादलों की तरह गरजने लगे कि ये कैसी डिमांड??? बहू- बेटी जैसी.???आख़िर एक स्त्री पर इतना बड़ा प्रहार क्यों???? आख़िर एक बहू को



चरखा चलाती माँ



चरखा चलाती माँ

आकांक्षा श्रीवास्तव। धागा बुनाती माँ...,बुनाती है सपनो की केसरी , समझ न पाओ मैं किसको बताऊ मैं"...बन्द कोठरी से अचानक सिसकने की दबी मध्म आवाज बाहर आने लगती हैं। कुछ छण बाद एक बार फिर मध्म आवाज बुदबुदाते हुए निकलती है..,"बेटो को देती है महल अटरिया ,बेटी को देती परदेश र



एक जिद्द कविता]

बहुत देख ली आडंबरी दुनिया के झरोखों से बहुत उकेर लिए मुझे कहानी क़िस्सागोई में लद गए वो दिन, कैद थी परम्पराओं के पिंजरे में भटकती थी अपने आपको तलाशने में उलझती थी, अपने सवालों के जबाव ढूँढने में तमन्ना थी बंद मुट्ठी के सपनों को पूरा करने की उतावली,आतुर हकीकत की दुनिया जीने की दासता की जंजीरों को तो



टाटा संस ने सत्तारूढ़ अपील करने के लिए बोर्डरूम विवाद, मिस्त्री में एनसीएलटी के फैसले का स्वागत किया

सोमवार को कहा गया कि नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने साइरस मिस्त्री की अपील को खारिज करने का आदेश दिया है कि समूह और इसकी ऑपरेटिंग फर्मों ने हमेशा उचित तरीके से काम किया है, भले ही मिस्त्री ने कहा कि वह इस फैसले को चुनौती देंगे।लगभग दो वर्षों तक चल रही कानूनी लड़ाई में, एनसीएलटी, मुंबई ने सो



एनसीएलटी टाटा बोर्डरूम युद्ध में साइरस मिस्त्री को ओवरराल करता है, कहता है कि वह विश्वास खो गया

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने सोमवार को टाटा संस समूह, एजेंसियों और टीवी चैनलों के अध्यक्ष के रूप में अपने बहिष्कार को चुनौती देने वाली साइरस मिस्त्री की याचिका को खारिज कर दिया।कॉर्पोरेट शिकायतों के लिए अर्ध-न्यायिक निकाय ने यह भी कहा कि वह मिस्त्री के विवादों को स्वीकार नहीं कर रहा था कि



एनसीएलटी ने मिस्त्री की याचिका खारिज कर दी, टाटा संस के पक्ष में नियम: मुख्य अंक

टेलीविज़न रिपोर्टों के मुताबिक राष्ट्रीय कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने सोमवार को टाटा संस समूह के खिलाफ साइरस मिस्त्री की याचिका खारिज कर दी थी। रिपोर्टों में कहा गया कि एनसीएलटी ने फैसला दिया कि निदेशक मंडल एक कार्यकारी अध्यक्ष को हटाने के लिए सक्षम था।इससे पहले, एनसीएलटी मुंबई के बीएसवी प्रकाश



महात्मा गाँधी एवं लाल बहादुर शास्त्री “जन्म-जयंती”

आज (2 अक्‍टूबर) को राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी औरपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्‍त्री की जयंती है । 2अक्‍टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में जन्‍मे मोहनदासकरमचंद गांधी आगे चलकर भारतवासियों के लिए ‘बापू’ बन गए । वहीं ठीक 35 साल बाद, मुगलसराय में शास्‍त्री ने जन्‍म लि



Womens Law से अनजान महिलाएं



उस रात की पूरी कहानी, जब शास्त्री की मौत हुई

लाल बहादुर शास्त्री को मरे हुए आज पचास साल हो गये. पर ताशकंद में 11 जनवरी 1966 की रात को क्या हुआ था, ये आज भी हिंदुस्तान में चर्चा का विषय बना रहता है. सरकारें आईं और गईं. पर किसी ने इस मौत से पर्दा नहीं उठाया. हमेशा विपक्ष के लोग ही मांग करते हैं कि रहस्य खोला जाए.1965 की भारत-पाक लड़ाई के बाद ताश



ममता

समाचार पढ़ा सरकारी अस्पताल में एक नवजात को नर्स ने हीटर के पास सुलाया. राजस्थान से आयी इस खबर ने अंतर्मन को झकझोर दिया नवजात शिशु के परिजनों से नर्स को इनाम न मिला



क्यों न स्त्री होने का उत्सव मनाया जाए

स्त्री ईश्वर की एक खूबसूरत कलाकृति ! यूँ तो समस्त संसार एवं प्रकृति ईश्वर की बेहतरीन रचना है किन्तु स्त्री उसकी अनूठी रचना है , उसके दिल के बेहद करीब । इसीलिए तो उसने उसे उन शक्तियों से लैस करके इस धरती पर भेजा जो स्वयं उसके पास हैं मसलन प्रेम एवं ममता से भरा ह्दय ,



प्रेमचंद और स्त्री

प्रेमचंद और स्त्री प्रेमचंद स्त्रियों को आधुनिक षिक्षा देने के विरोध थे और स्त्रियों की षिक्षा के सम्बंध में उनका दृस्टिकोण संकीर्णतावादी है,लेकिन यह भी स्पश्ट हैकि उनका विरोध पाष्चात्प नारी के आदर्ष को अपनाने के लिए प्रेरित करने वाली षिक्षा के प्रति है,मुझे खेेद है,हमारी



नरगिस

पता नहीं नरगिस नाम क्यों रखा गया था उसका। सांवली सूरत, कटीले नक्श और बड़ी अधखुली आंखों के कारण ही नरगिस नाम रखा गया होगा। नरगिस बानो। बिना बानो के जैसे नाम में कोई जान पैदा न होती हो। नाम कितना भी अच्छा क्यों न हो तक़दीर भी अच्छी हो ये ज़रूरी नहीं। नरगिस अपने नाम के मिठास और खुश्बू से तो वाकिफ़ थी लेकि



स्त्री शक्ति का जीता जागता रूप

( जब तक मानसिकता नहीं बदलती कोई भी परिवर्तन असंभव है .... अब आप अपने आस-पास दृष्टि डालिए, खुद को तौलिये और सच कहने का साहस कीजिये। पहले तो आप इस बात का जवाब दीजिये कि समानता से आपका क्या तात्पर्य है ? ) मैं स्त्री स्वतंत्रता की हिमायती नहीं पर स्त्री शक्ति का जीता ज



एक परिचय - आज की महिला

मित्रो मै एक छोटा प्रयास कर रहा हूँ , शायद कोई त्रुटि या भरी शब्द मिले तो .....माफ करना । इसी आशा और विश्वास के साथ मै अपनी बात शुरू करता हूँ। महिला , स्त्री , नारी और अंग्रेजी में " woman " मानव संस्कृति की एक महत्वपूर्ण अंग है ।



नदी और समंदर

नदी को लगता हैकितना आसान हैसमंदर होनाअपनी गहराइयों के साथझूलते रहना मौजों परन शैलों से टकरानान शूलों से गुजरनान पर्वतों की कठोर छातियों को चीरकररास्ता बनानापर नदी नहीं जानती हैसमंदर की बेचैनी कोउसकी तड़प और उसकी प्यास कोकितना मुश्किल होता हैखारेपन के साथ एक पल भी जीनासमंदर हमेशा रहता हैप्यासाऔर भटकता



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