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साथी

साथी उसे बनाओं जो सुख दुख में साथ दे.ना कि उसे जो सिर्फ तस्वीरों में आपकी शोभा बढ़ाएं.शिल्पा रोंघे



क्रोध को त्यागें क्षमा शील बने

🦚🦚🦚🦚🦚🦚🦚 *श्री राधे कृपा ही सर्वस्वम*🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 *जय श्रीमन्नारायण जय जय श्री सीताराम* 🏵🏵🏵🏵🏵🏵🏵 *सुखी जीवन के लिए क्षमा करना सीखें* सामाजिक जीवन में राग के कारण लोग एवं काम की तथा द्वेष के कारण क्रोध एवं पैर की वृत्तियों का संचार होता है क्रोध के लिए संघर्ष कल



बदल गया सुखदुआ समाज

किन्नर से बने सुखदुआ | SUKHDUA SAMAJहारमोनल इनबायलेंस के कारण आयी एक बीमारी की वजह से हमारा समाज हमेशा ही उन्हें कौतुहल से देखता आया है। सैंकड़ो-हजारोंं वर्षों से उपेक्षित इस समाज को किन्नर, हिजड़ा, छकका और भी न जाने किन-किन नामों से पुकारा जाता रहा लेकिन डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने 14 नवंब



‘‘पर्रिकर’’ ‘‘वाद’’ को ढूँढता मेरा देश। ‘व’’ ‘‘गांधीवाद’’ से चलकर ‘‘पर्रिकरवाद’’ तक पहुंचने का सुखद अहसास!

देश के प्रथम आई.आईटी शिक्षा प्राप्त (गोवा के) मुख्यमंत्री एवं पूर्व रक्षामंत्री डॉ. मनोहर गोपाल कृष्ण प्रभु पर्रिकर लम्बी बीमारी से अदम्य आत्मबल के साथ लड़ते हुये अब इस दुनिया में नहीं रहे और ‘‘स्वर्गवासी’’ हो गये। याद कीजिये! विधानसभा में बजट प्रस्तुत करते समय उनका वह चेहरा, जो चिकित्सकीय उप



'भव-सागर'

भव सागर, यह संसार है जीवन, सागर मझधार हैघोर, गहन विपदा है घेरेजीवन में है, तेेरे और मेरे झंझावत ढेरों पारावार हैलहरों से उठती, हुँकार है आशा और निराशा इसमेंजीवन की दो पतवार है निराशा से होता कहाँ ?जन-जीवन का उद्धार हैआशा से ही लगती यहाँनौका तूफानों से पार हैभव-स



“कुंडलिया”इनका यह संसार सुख भीग रहा फल-फूल।

“कुंडलिया”इनका यह संसार सुख भीग रहा फल-फूल। क्या खरीद सकता कभी पैसा इनकी धूल॥ पैसा इनकी धूल फूल खिल रिमझिम पानी। हँसता हुआ गरीब हुआ है कितना दानी॥ कह गौतम कविराय प्याज औ लहसुन भिनका। ऐ परवर सम्मान करो मुँह तड़का इनका॥महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी



वसावा, श्री मनसुखभाई धनजीभाई - लोकसभा सदस्य

निर्वाचन क्षेत्र -भरूच (गुजरात)दल का नाम -भारतीय जनता पार्टी ( भा.ज.पा.)ईमेल -md[DOT]vasava[AT]sansad[DOT]nic[DOT]in m[DOT]vasava[AT]nic[DOT]inजन्म की तारीख -01/06/1957उच्चतम योग्यता -स्‍नातकोत्तरशैक्षिक और व्यावसायिक योग्यता -बी.ए., एम.एस.डब्‍ल्‍यू., साउथ गुजरात विश्‍वविद्यालय, सूरत और ग



जौनापुरिया , श्री सुखबीर सिंह - लोकसभा सदस्य

निर्वाचन क्षेत्र -टोंक-सवाई माधोपुर (राजस्‍थान)दल का नाम -भारतीय जनता पार्टी ( भा.ज.पा.)ईमेल -sukhbirs[DOT]jaunapuria[AT]sansad[DOT]nic[DOT]inजन्म की तारीख -18/10/1957उच्चतम योग्यता -स्नातकशैक्षिक और व्यावसायिक योग्यता -बी.कॉम. (द्वितीय वर्ष) दिल्‍ली विश्‍वविद्यालय से शिक्षा ग्रहण की।व्यव



गांधी, श्री दिलीपकुमार मनसुखलाल - लोकसभा सदस्य

निर्वाचन क्षेत्र -अहमदनगर (महाराष्‍ट्र)दल का नाम -भारतीय जनता पार्टी ( भा.ज.पा.)ईमेल -dmgandhi[AT]sansad[DOT]nic[DOT]in dilipmgandhi[AT]gmail[DOT]comजन्म की तारीख -09/05/1951उच्चतम योग्यता -मैट्रिकशैक्षिक और व्यावसायिक योग्यता -एस.एस.सी. । पुणे विश्‍वविद्यालय, पुणे (महाराष्‍ट्र) में शिक्षा



“गीतिका” खेल खिलौना सुखद बिछौना नींद नहीं अधिकार की॥

“गीतिका”जाने कब धन भूख मरेगी, दौलत के संसार की शिक्षा भिक्षा दोनों पलते, अंतरमन व्यवहार कीइच्छा किसके बस में होती, क्यों बचपन बीमार है उम्र एक सी फर्क अनेका, क्या मरजी करतार की॥ भाग सरीखा नहीं सभी का, पर शैशव अंजान है खेल खिलौना सुखद बिछौना, नींद नहीं अधिकार की॥ उछल कूदना



लघुकथा— सुख

लघुकथा— सुख रमन ने चकित होते हुए पूछा,' उस को पास बहुत सारा पैसा था. फिर समझ में नहीं आता है उस ने यह कदम क्यों उठाया ?'' पैसा किसी सुख की गारण्टी नहीं होता है,' मोहित ने दार्शनिक अंदाज में जवाब दिया.' क्यों भाई ? क्या तुम नहीं चाहते हो कि



कहाँ सुखद विश्राम मिला, मन नेह लगा ली है, गीतिका

“गीतिका”खुलकर नाचो गाओ सइयाँ, मिली खुशाली है अपने मन की तान लगाओ, खिली दिवाली है दीपक दीपक प्यार जताना, लौ बुझे न बातीचाहत का परिवार पुराना, खुली पवाली है॥कहीं कहीं बरसात हो रही, सकरे आँगन मेंहँसकर मिलना जुलना जीवन, कहाँ दलाली है॥होना नहीं निराश आस से, सुंदर अपना घर नीम छ



दुख जैसा है, तभी अपना है

तेरा मिलना बहुत अच्च्छा लगे है, कि तू मुझको मेरे दुख जैसा लगे है...ये चर्चा, किसी के हुस्न की नही है। ना ये बयान है किसी के संग आसनाई के लुत्फ की। सीधे-सहज-सरल लफ्जों में यह तरजुमा है एक सत्य का। सच्चाई यह कि अपनापन और सोहबत की हदे-तकमील क्या है।अपना क्या है? कौन है?... वही जो अपने दुख जैसा है! मतलब



क्या वास्तव में पैसे से सुख खरीद सकते है ? क्या अमीर होने से आप खुश हो जाएंगे ?

जब हम सुख (happiness) की बात करते है तो उसकी परिभाषा हर इंसान के लिए अलग अलग है। सुखी होना मतलब खुश (happy) होना। अब किसी के लिए उसके अच्छे सपनो का सच हो जाना सुख का अनुभव है, किसी भूखे को अच्छा खाना मिल जाने से खुशी मिलती है उसको सुख का अनुभव होता है, छोटा बच्चा अपनी माँ को देखकर सुख का अनुभव कर



क्यों होगी देशप्रेमी देशभक्त खूंखार बहादुर कौम की गुलामी? क्या फिर देनी पड़ेगी भारत के शत्रुओं को सलामी?

क्या फिर होगी भारत में गुलामी ?क्या फिर देनी पड़ेगी देश के दुश्मनों को सलामी?क्यों ज़रूरी है देशद्रोहियों-शत्रुओं पर वार लगातार?सारा भारत एक,फिर भी घूम रहे अंग्रेज़ अनेक,भारत का कारोबार बेच,भारत को कुचलते मसलते लूटते फिरंगी शत्रु अनेकोनेक।ल



स्वातन्त्र्यं परमं सुखम्

स्वाधीनता में महान सुख है और पराधीनता में किंचित–मात्र भी सुख नहीं I पराधीनता दुखों की खान है I स्वाभिमानी व्यक्ति एक दिन भी परतंत्र रहना पसंद नहीं करता I उसका स्वाभिमान परतंत्रता के बंधन को तोड़ देना चाहता है I पराधीन व्यक्ति को चाहे कितना ही सुख, भोग और ऐश्वर्य प्राप्त हो, वह उसके लिए विष-तुल्य ही



सम्भोग और भाग्य

आप सोंच रहे होंगे की सम्भोग का भाग्य के साथ क्या संबंध है ,परन्तु है जरूर |क्योंकि आपके घर आने वाली संतान आपका भाग्य बनती भी है और बिगाड़ती भी है ,इसीलिए भाग्य का सम्बन्ध सम्भोग के साथ बना



सच्चा सुख

सच्चा सुख एक युवक जो कि एक विश्वविद्यालय का विद्यार्थी था, एक दिन शाम के समय एक प्रोफ़ेसर साहब के साथ टहलने निकला हुआ था। यह प्रोफ़ेसर साहब सभी विद्यार्थियों के चहेते थे और विद्यार्थी भी उनकी दयालुता के कारण उनका बहुत आदर करते थे। टहलते-टहलते वह विद्यार्थी प्रोफ़ेसर साहब के साथ काफ़ी दूर तक निकल गया





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