सूरज

फिल्म निर्माता सूरज बड़जात्या के पिता राज कुमार बड़जात्या का निधन

मुम्बई में राजश्री प्रोडक्शन के राजकुमार बड़जात्या का देहांत हो गयाअधिक जानकारी के लिए: https://hindi.iwmbuzz.com/television/news/filmmaker-sooraj-barjatyas-father-raj-kumar-barjatya-passes-away-2/2019/02/21



सूरज पर प्रतिबंध अनेकों - कुमार विश्वास

Hindi poem - kumar vishwas सूरज पर प्रतिबंध अनेकों सूरज पर प्रतिबंध अनेकों और भरोसा रातों परनयन हमारे सीख रहे हैं हँसना झूठी बातों परहमने जीवन की चौसर पर दाँव लगाए आँसू वालेकुछ लोगों ने हर पल, हर दिन मौके देखे बदले पालेहम शंकित सच पा अपने, वे मुग्ध स्वयं की घातों परनयन हमारे सीख रहे हैं हँसना झूठी ब



सूरज

हर सुबह जो सबसे पहले सबको जगआने आता और फिर चिडिओ को नित नवीन अवसर दे जाता दे जाता वो सबको नए संकल्प नए सपने नित और दे जाता वो नित नई उर्जा वो उनको करने की पूरा !



“कुंडलिया”उगते सूरज की तरह दे प्रकाश हर ग्रंथ।

“कुंडलिया”उगते सूरज की तरह दे प्रकाश हर ग्रंथ। हो कोई भी सभ्यता सबके सुंदर पंथ॥ सबके सुंदर पंथ संत सब एक समाना। मानव ममता एक नेक भर लिया खजाना॥ कह गौतम कविराय हाय रे हम क्यों भुगते। कहाँ गई कचनार कहाँ अब मृदु फल उगते॥महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी



है बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिये - गोपालदास "नीरज

बहुत अंधियार अब सूरज निकलना चाहिएजिस तरह से भी हो ये मौसम बदलना चाहिएरोज़ जो चेहरे बदलते है लिबासों की तरहअब जनाज़ा ज़ोर से उनका निकलना चाहिएअब भी कुछ लोगो ने बेची है न अपनी आत्माये पतन का सिलसिला कुछ और चलना चाहिएफूल बन कर जो जिया वो यहाँ मसला गयाजीस्त को फ़ौलाद के साँचे में ढलना चाहिएछिनता हो जब



बहारों फूल बरसाओ (Baharon Phool Barsao )- सूरज

Baharon Phool Barsao Lyrics of Suraj (1966) is penned by Hasrat Jaipuri, it's composed by Shankar and Jaikishan and sung by Mohammad Rafi.सूरज (Suraj )बहारों फूल बरसाओ (Baharon Phool Barsao ) की लिरिक्स (Lyrics Of Baharon Phool Barsao )बहारों फूल बरसाओमेरा मेहबूब आया हैमेरा मेहबूब आया है क्ष (२)ह



सूरज (Suraj )

'सूरज' 1 9 66 की हिंदी फिल्म है जिसमें प्रमुख भूमिकाओं में व्याजयंतीमाला, राजेंद्र कुमार, अजीत, मुमताज और जॉनी वाकर हैं। हमारे पास एक गीत गीत और सूरज का एक वीडियो गीत है। शंकर और जयकिशन ने अपना संगीत बना लिया है। मोहम्मद रफी ने इन गीतों को गाया है जबकि हसरत जयपुरी ने अपने गीत लिखे हैं।इस फिल्म के गा



व्यथा ,'सूरज' होने की .

बिजली की लुका छुपी के खेल और ..चिलचिल गर्मी से हैरान परेशां हम ..ताकते पीले लाल गोले को और झुंझला जाते , छतरी तानते, आगे बढ़ जाते !पर सर्वव्यापी सूर्यदेव के आगे और कुछ न कर पाते ..!पर शाम आज ,सूरज के सिन्दूरी लाल गोले को देख एक दफे तो दिल 'पिघल' सा गया , सूरज दा के लिए , मन हो गया विकल रोज़ दोपहरी आग



तू पथिक है !

पथिक !हम सब पथिक हैं,हमारी अनवरत यात्रा,पड़ाव कम ,अतुलनीय !जीवन अनंत,निरंतर अग्रसर है ,कर्मपथ पर ,ना रुकता और ना थकता कभी,विदित है सबको,सभी की मंज़िले भी एक हैं ,किसी को मिल गई !गर्वित !!ह्रदय हर्षित निरंतर बढ़ रहा है,कठिन....उन्नत!समय की सीढीयाँ वो ,पथिक !पथिक तो वो भी हैं ,जो राह की ठंडी हवा में,थक





1
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x