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"गज़ल" जब चाँद का फलक गुनाहों में खो गया तब रात का चलन घटाओं में खो गया

वज़्न - 221 2121 1221 212 अर्कान - मफ़ऊलु-फ़ाइलातु-मफ़ाईलु-फ़ाइलुन बह्र - बह्रे मुज़ारे मुसम्मन अख़रब मक्फूफ़ मक्फूफ़ महज़ूफ़ काफ़िया - घटाओं (ओं स्वर) रदीफ़ - में खो गया"गज़ल" जब चाँद का फलक गुनाहों में खो गयातब रात का चलन घटाओं में खो गयाजज्बात को कभी मंजिलें किधर मिलतीहमसफर जो था वह विवादों में खो



कितनी वांछित है?

कितनी वांछित है?✒️युवा वर्ग जो हीर सर्ग है, मर्म निहित करता संसृति काअकुलाया है अलसाया है, मोह भरा है दुर्व्यसनों कापिता-पौत्र में भेद नहीं है, नैतिकता ना ही कुदरत का;ऐसी बीहड़ कलि लीला में, आग्नेय मैं बाण चलाऊँकहो मुरारे ब्रह्म बाण की, महिमा तब कितनी वांछित है?जो भविष्य को पाने चल दे, वर्तमान का भा



किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है - ऐतबार

Kisi Nazar Ko Tera Intezar Aaj Bhi Hai Lyrics from the movie Aitbaar is sung by Asha Bhosle and Bhupinder, its music is composed by Bappi Lahiri and lyrics are written by Hasan Kamaal.ऐतबार (Aitbaar )आ...किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी हैकिसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी हैकहाँ हो तुम के यह दिल बेक़रार आज



ऐतबार (Aitbaar )

'एटबाड़' 1 9 85 की हिंदी फिल्म है जिसमें राज बब्बर, डिंपल कपाडिया, डैनी डेन्ज़ोंगा, शरत सक्सेना, सुरेश ओबेरॉय, लीना दास, अनुपम खेर और हुमा खान की प्रमुख भूमिकाएं हैं। हमारे पास एटबाड़ के एक गीत गीत हैं। बप्पी लाहिरी ने अपना संगीत बना लिया है। आशा भोसले और भूपिंदर ने इन गीतों को गाया है जबकि हसन कामल



हसन, बेगम तबस्‍सुम - लोकसभा सदस्य

बेगम तबस्सुम हसन एक राष्ट्रीय लोक दल की राजनीतिक कार्यकर्ता हैं, जो उत्तर प्रदेश के कैराना लोकसभा क्षेत्र से दो बार सांसद हैं और पूर्व सांसद चौधरी मुनव्वर हसन की पत्नी हैं। बेगम हसन एक मुस्लिम चौहान गुर्जर परिवार में पैदा हुईं। वह 2009 में पहली बार बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार के रूप में लोकसभा के



संकळप

आज हम ऐसे समाज में रह रहे है , जहां हम ये नही कह सकते की ये काम मुझे से नहीं हो पायेगा | सिर्फ हम लोगो लोगों को एक संकल्प लेके चलना पङेगा की कुछ भी हो जाये हम रुकेंगे नहीं | कोई भी काम बिना संकळप के पूरा नही हो सकता चाहे काम



तब तक समझो मे जिंदा हूँ

कवि:- शिवदत्त श्रोत्रियजब तक आँखो मे आँसू हैतब तक समझो मे जिंदा हूँ||धरती का सीना चीर यहाँनिकाल रहे है सामानो कोमंदिर को ढाल बना अपनीछिपा रहे है खजानो को|इमारतें बना के उँचीछू बैठे है आकाश कोउड़ रहे हवा के वेग साथजो ठहरा देता सांस को|जब तक भूख ग़रीबी चोराहो परतब तक मै शर्मिंदा हूँ||जब तक आँखो मे आँस



तब मानव कवि बन जाता है!

तब मानव कवि बन जाता है!जब उसको संसार रुलाता,वह अपनों के समीप जाता,पर जब वे भी ठुकरा देतेवह निज मन के सम्मुख आता,पर उसकी दुर्बलता पर जब मन भी उसका मुस्काता है!तब मानव कवि बन जाता है!-गोपालदास नीरज





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