तक

मुक्तक

महिला दिवस पर हार्दिक बधाई"मुक्तक"कण पराग सी कोमली, वनिता मन मुस्कान।खंजन जस आतुर नयन, माता मोह मिलान।सुख-दुख की सहभागिनी, रखती आँचल स्नेह-जगत सृष्टि परिचायिनी, देवी सकल विधान।।-1गौतम जो सम्मान से, करता महिला गान।लक्ष्मी उसके घर बसे, करे विश्व बहुमान।महिला है तो महल है, बिन महिला घर सून-घर-घर की यह



प्यार का दंश या फर्ज

प्यार का दंश या फर्ज तुलसीताई के स्वर्गवासी होने की खबर लगते ही,अड़ोसी-पड़ोसी,नाते-रिश्तेदारों का जमघट लग गया,सभी के शोकसंतप्त चेहरे म्रत्युशैय्या पर सोलह श्रंगार किए लाल साड़ी मे लिपटी,चेहरे ढका हुआ था,पास जाकर अंतिम विदाई दे रहे थे.तभी अर्थी को कंधा देने तुलसीताई के पति,गोपीचन्दसेठ का बढ़ा हाथ,उनके बे



मुक्तक

स्वागतम अभिनंदन"मुक्तक"साहसी अभिनंदन है, अभिनंदन वर्तमान।वापस आया लाल जब, तबसे हुआ गुमान।युद्ध बिना बंदी हुआ, भारत माँ का वीर-स्वागत आगत शेर का, चौतरफा बहुमान।।-1एक बार तो दिल दुखा, सुनकर बात बिछोह।कैसे यह सब हो गया, अभिनंदन से मोह।डिगा नहीं विश्वास था, आशा थी बलवान-आया माँ की गोद में, लालन निर्भय ओ



मुक्तकाव्य

"मुक्त काव्य"हाथी सीधे चल रहाघोड़ा तिरछी चालऊँट अढाई घर बढ़ेगरजा हिन्द महानशह-मात के खेल मेंपाक वजीर बेभान।।लड़े सिपाही जान लगाकरपीछे-पीछे प्यादा चाकरचेस वेष अरु केश कामत कर अब गुणगानगिरते पड़ते जी रहेकर्म करो नादान।।इक दूजे को मात-शहजीत- हार विद्यमानपाक आज चिंतित हुआपुलवामा बलवानकौरव देख गांडीव पार्थ क



मुक्तक

"मुक्तक"गया समय अब युद्ध का, लड़ा रहे सब छद्म।नहीं किसी के पास अब, सत्य बोलती नज्म।सूखे सब कंकाल हैं, दौड़ रहे हैं तेज-दौलत के संसार में, कहाँ पुरानी बज्म।।-1नाम समर का ले रहे, कायर अरु कमजोर।चुपके से चलते डगर, मानो कोई चोर।घात लगा कर वार कर, छुप जाते हैं खोह-पीछे से हमला करें, और मचाएं शोर।।-2महातम म



सोनी टीवी त्वरित कदम उठाते हुए; द कपिल शर्मा शो से नवजोत सिंह सिद्धू को निकाला, रिपोर्ट

नवजोत सिंह सिद्धू को सोनी टीवी के शो द कपिल शर्मा शो से हटा दिया गया है। जानकारी के लिए यहां पढ़ें। सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन एक नेटवर्क के रूप में सार्वजनिक भावनाओं के लिए काफी अनुकूल प्रतीत होता है। चैनल ने कथित रूप से क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू को अपने बे



केवल OnePlus और Google द्वारा निर्मित सभी स्मार्टफोन Android OS के नवीनतम संस्करण के साथ भेजा गया, रिपोर्ट

एक नई रिपोर्ट के अनुसार केवल दो ब्रांड Google और OnePlus, Android OS के नवीनतम संस्करण के साथ अपने सभी Smartphone मॉडल को बाजार में उपलब्ध कराया। TechARC द्वारा किये गए बाजार अनुसंधान के अनुसार पिछले साल विभिन्न original equipment manufacturers द्वारा स्मार्टफोन के 32 मॉ



"चौपाई मुक्तक" वन-वन घूमे थे रघुराई, जब रावण ने सिया चुराई। रावण वधकर कोशल राई, जहँ मंदिर तहँ मस्जिद पाई।

"चौपाई मुक्तक"वन-वन घूमे थे रघुराई, जब रावण ने सिया चुराई।रावण वधकर कोशल राई, जहँ मंदिर तहँ मस्जिद पाई।आज न्याय माँगत रघुवीरा, सुनो लखन वन वृक्ष अधिरा-कैकेई ममता विसराई, अवध नगर हति कागा जाई।।-1अग्नि परीक्षा सिया हजारों, मड़ई वन श्रीराम सहारो।सुनो सपूतों राम सहारो, जस



"मुक्तक"

"मुक्तक"मंदिर रहा सारथी, अर्थ लगाते लोग।क्या लिख्खा है बात में, होगा कोई ढोंग।कौन पढ़े किताब को, सबके अपने रूप-कोई कहता सार है, कोई कहता रोग।।-1मंदिर परम राम का, सब करते सम्मान।पढ़ना लिखना बाँचना, रखना सुंदर ज्ञान।मत पढ़ना मेरे सनम, पहरा स्वारथ गीत-चहरों पर आती नहीं, बे-मौसम मुस्कान।।-2महातम मिश्र, गौत



"मुक्तक"

"मुक्तक" नहीं सहन होता अब दिग को दूषित प्यारे वानी। हनुमान को किस आधार पर बाँट रहा रे प्रानी।जना अंजनी से पूछो ममता कोई जाति नहीं-नहीं किसी के बस होता जन्म मरण तीरे पानी।।-1मानव कहते हो अपने को करते दिग नादानी।भक्त और भगवान विधाता हरि नाता वरदानी।गज ऐरावत कामधेनु जहँ पीपल पूजे जाते-लिए जन्म भारत मे



"मुक्तक" देखिए तो कैसे वो हालात बने हैं। क्या पटरियों पै सिर रख आघात बने हैं।

"मुक्तक" देखिए तो कैसे वो हालात बने हैं।क्या पटरियों पै सिर रख आघात बने हैं।रावण का जलाना भी नासूर बन गया-दृश्य आँखों में जख़्म जल प्रपात बने हैं।।-1देखन आए जो रावण सन्निपात बने हैं।कुलदीपक थे घर के अब रात बने हैं।त्योहारों में ये मातम सा क्यूँ हो गया-क्या रावण के मन के सौगात बने हैं।।-2महातम मिश्र,



"मुक्तक" हार-जीत के द्वंद में, लड़ते रहे अनेक। किसे मिली जयमाल यह, सबने खोया नेक।

"मुक्तक" हार-जीत के द्वंद में, लड़ते रहे अनेक।किसे मिली जयमाल यह, सबने खोया नेक।बर्छी भाला फेंक दो, विषधर हुई उड़ान-महँगे खर्च सता रहे, छोड़ो युद्ध विवेक।।-1हार-जीत किसको फली, ऊसर हुई जमीन।युग बीता विश्वास का, साथी हुआ मशीन।बटन सटन है साथ में, लगा न देना हाथ-यंत्र- यंत्र में तार है, जुड़ मत जान नगीन।।-2



"मुक्तक,"

"मुक्तक" हार-जीत के द्वंद में, लड़ते मनुज अनेक।किसे मिली जयमाल यह, सबने खोया नेक।बर्छी भाला फेंक दो, विषधर हुई उड़ान-पीड़ा सतत सता रहीं, छोड़ो युद्ध विवेक।।-1हार-जीत किसको फली, ऊसर हुई जमीन।युग बीता विश्वास का, साथी हुआ मशीन।बटन सटन दुख दर्द को, लगा न देना हाथ-यंत्र- यंत्र में तार है, जुड़ते जान नगीन।।-2



समाज के अनसुने मर्मान्तक स्वर ----------------पुस्तक समीक्षा- चीख़ती आवाजें - कवि ध्रुव सिंह ' एकलव्य '---

साहित्य को समाज का दर्पण कहा गया है | वो इसलिए समय के निरंतर प्रवाह के दौरान साहित्य के माध्यम से हम तत्कालीन परिस्थितियों और उनके प्रभाव से आसानी से रूबरू हो पाते हैं | सब लोग हर दिन असंख्य लोगों की समस्याओं और उनके जीवन के सभी रंगों को देखते रहते हैं शायद वे उन



"मुक्तक"

"मुक्तक"युग बीता बीता पहर, लेकर अपना मान।हाथी घोड़ा पालकी, थे सुंदर पहचान।अश्व नश्ल विश्वास की, नाल चाक-चौबंद-राणा सा मालिक कहाँ, कहाँ चेतकी शान।।-1घोड़ा सरपट भागता, हाथी झूमे द्वार।राजमहल के शान थे, धनुष बाण तलवार।चाँवर काँवर पागड़ी, राज चाक- चौबंद-स्मृतियों में अब शेष हैं, प्रिय सुंदर उपहार।।-2महातम



नदी तुम माँ क्यों हो...?

नदी तुम माँ क्यों हो...?सभ्यता की वाहक क्यों हो...?आज ज़ार-ज़ार रोती क्यों हो...? बात पुराने ज़माने की है जब गूगल जीपीएसस्मार्ट फोन कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी के नक़्शे दिशासूचक यंत्र आदि नहीं थे एक आदमीअपने झुण्ड से जंगल की भूलभुलैया-सी पगडं



"मुक्तक"

बाल-दिवस पर प्रस्तुति"मुक्तक"काश आज मन बच्चा होता खूब मनाता बाल दिवस।पटरी लेकर पढ़ने जाता और नहाता ताल दिवस।राह खेत के फूले सरसों चना मटर विच खो जाता-बूढ़ी दादी के आँचल में सुध-बुध देता डाल दिवस।।-1गैया के पीछे लग जाता बन बछवा की चाल दिवस।तितली के पर को रंग देता हो जाता खुशहाल दिवस।बिना भार के गुरु शर



मोदी के न्यू इंडिया में तड़पते किसान,बिलखते मजदूर

भारत कृषि प्रधान देश है हमलोगों ने बचपन से अब तक पढ़ा और सुना है जो हक़ीक़त भी है! कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार रहा है और अब भी है।जिस देश में 57% आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पे निर्भर हो उस देश में किसानों का किया हाल है. वो जग ज़ाहिर है क्योंकि उनके साथ ना मीडिया है ना सरकार औ



"मुक्तक"

रूप चौदस/छोटी दीपावली की सभी को हार्दिक बधाई एवं मंगल शुभकामना"मुक्तक"जलाते दीप हैं मिलकर भगाने के लिए तामस।बनाते बातियाँ हम सब जलाने के लिए तामस।सजाते दीप मालिका दिखाने के लिए ताकत-मगर अंधेर छुप जाती जिलाने के लिए तामस।।-1विजय आसान कब होती खुली तलवार चलती है।फिजाओं की तपिश लेकर गली तकरार पलती है।सु



"गीतिका" उड़ा आकाश कैसे तक चमन अहसास होता है हवावों से बहुत मिलती मदद आभास होता है

, आधार छंद--विधाता, मापनी- 1222 1222 1222 1222 समांत - आस, पदांत - होता है"गीतिका"उड़ा आकाश कैसे तक चमन अहसास होता हैहवावों से बहुत मिलती मदद आभास होता हैजहाँ भी आँधियाँ आती उड़ा जाती ठिकाने कोबता दौलत हुई किसकी फकत विश्वास होता है।।बहुत चिंघाड़ता है चमकता है औ गरजता घनबिना मौसम बरसता है छलक चौमास होता



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