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आगामी किताब - कलरब्लाइंड बालम (मोहित शर्मा ज़हन)

इस किताब में कुछ खास और अलग श्रेणियों की कहानियां रखी हैं। आशा है, हमेशा की तरह आप सबका स्नेह मिलता रहेगा।Upcoming story collection Colorblind Balam (with FlyDreams Punlications)Great work by cover artist Nishant Maurya.



अपडेट

"किन्नर समाज - संदर्भ - तीसरी ताली" (साहित्यिक समालोचना) - वाणी प्रकाशन की किताब में मेरी कहानी "किन्नर माँ" को शामिल कर उसपर अपनी राय देने के लिए लेखिका पार्वती कुमारी जी का आभार। हर बार की तरह बस एक शिकायत कि मेरा काम या नाम कहीं आता है, तो उस समय लेखक, प्रकाशक आदि



मुक्तक

"मुक्तक"व्यंग ढंग का हो अगर, तो करता बहुमान।कहने को यह बात है, पर करता पहचान।भागे भागे क्यों फिरे, अपने घर से आप-और दुहाई दे रहे, मान मुझे मेहमान।।बनी बनाई रोटियाँ, खाता आया पाक।अब क्या तोड़ेगा सखे, लकड़ी जल भइ खाक।जाति-पाति के नाम पर, चला रहा है राज-कहाँ अन्य को दे दिया, अपने जैसी धाक।।महातम मिश्र, ग



मुक्तक

"मुक्तक"व्यंग ढंग का हो अगर, तो करता बहुमान।कहने को यह बात है, पर करता पहचान।भागे भागे क्यों फिरे, अपने घर से आप-और दुहाई दे रहे, मान मुझे मेहमान।।बनी बनाई रोटियाँ, खाता आया पाक।अब क्या तोड़ेगा सखे, लकड़ी जल भइ खाक।जाति-पाति के नाम पर, चला रहा है राज-कहाँ अन्य को दे दिया, अपने जैसी धाक।।महातम मिश्र, ग



मुक्तक

"मुक्तक" नया सवेरा हो रहा, फिर क्यों मूर्छित फूल।कुछ रहस्य इसमें छुपा, मत करना फिर भूल।बासी खाना देखकर, क्यों ललचायें जीव-बुझ जाएगी चाँदनी, शूल समाहित मूल।।नित नव राह दिखा रहे, कुंठा में हैं लोग।बिना कर्म के चाहते, मिल जाए मन भोग।सही बात पर चीखते, झूठों के सरदार-समझ न आए नियम तो, कर लें थोड़ा योग।।मह



साहिल

"साहिल"साहिल बहुत है दूरकिश्ती डगमगा रही हैबालू का आशियाना,हवा धमका रही हैडॉ. कवि कुमार निर्मल



बामपंथी

प्रायः यह शब्द सुनकर अधिकतर रूस या चीन या कोरिया की छवि हमारे मन-मस्तिष्कीय रेखाओं पर अंकित होती है वस्तुतः भारत भूमि से इस शब्द का जुड़ाव एक अलग प्रसार-प्रचार को परिभाषित करता है |{ हिंन्दु विरोध } { पंथ निर्पेक्ष छवि } { इस्लामिक ईसाई शक्तियाँ } = राष्ट्रदोही अस्



पौधों में मिट्टी चढ़ाना

पौधों के विकास की अवस्था में मिट्टी चढ़ाना काफी मायने रखता है। आज के लेख में जानें पौधों में मिट्टी चढ़ाने से क्या फायदा होता हैऔर इसे किस तरह से करते हैं। किसान भाइयों, पौधों को मिट्टीचढ़ाने से उनको हवा,



मुक्तक

"मुक्तक"नहीं किनारे नाव है, नहीं हाथ पतवार।सूख रहा जल का सतह, नहीं उदधि में धार।नयन हुए निर्लज्ज जब, मन के भाव कुभाव-स्वारथ की नव प्रीति है, नहीं हृदय में प्यार।।1जल प्रवाह में कट रहे, वर्षों खड़े कगार।आर-पार नौका चली, तट पर भीड़ अपार।कैसा खेवनहार यह, नई नवेली नाव-डर लगता है री सखी, है साजन उस पार।।-2



मुक्तक

"मुक्तक" भाग्य बिना होते नहीं, साजन कोई कर्म।कर्म कीजिये लगन से, यही भाग्य का मर्म।क्या छोटा क्या है बड़ा, दें रोजी को मान-लग जाओ प्रिय जान से, इसमें कैसी शर्म।।सब नसीब का खेल है, चढ़ता पंगु पहाड़।पत्थर जैसा फल लिए, खड़े डगर पर ताड़।न छाया नहीं रस मधुर, न लकड़ी नहीं दाम-नशा लिए बहका रहा, पीते हैं सब माड़।।



मुक्तक

"मुक्तक"बहुत अरमान था दिल में कि इक दिलदार मिल जाए।मेरे इस बाग में भी फूल इक गुच्छदार खिल जाए।समय की डोर पकड़े चल रहा था ढूढ़ता मंजिल-मिला दो दिल सनम ऐसे कि पथ पतवार हिल जाए।।बहुत अहसान होगा आप का मान मिल जाए।तरस नयनों की मिट जाए परत पहचान मिल जाए।गिरी बूँदें जमी पर आँसुओं को पी नहीं सकते-अगर गुरबत न



मुक्तक विधान

'मुक्तक चार पंक्तियाँ भार सम,मुक्तक का सिद्धांत lपंक्ति तृतीयं मुक्तता , तजि सामंत पदांत llव्यंग्य और वक्रोक्ति में , साधें शेर सदृश्य lपंक्ति तृतीयं सार है , निष्कर्षं परिदृश्य llराजकिशोर मिश्र राज प्रतापगढ़ी



जीवन में असफलता के 10 मुख्य कारण...

जीवन में असफलता के 10 मुख्य कारण... क्या आप बार-बार अपने जीवन में असफलता प्राप्त कर रहे हैं? क्या आप सोचने लगे हैं कि आपकी असफलता का मुख्य कारण आपका भाग्य है? अगर हाँ ! तो इस पोस्ट के द्वारा असफलता के 10 मुख्य कारण को पढ़ें और अपने जीवन में failure के सही कारणों को समझें। हो सकता



दौलत

दौलतजो दिया है गैरों को वोही काम आ साथ जाएगा।राजा का बेटा ताज पहन याद नहीं कर पायेगा।।डॉ. कवि कुमार निर्मल



दौलत

दौलतजो दिया है गैरों को वोही काम आ साथ जाएगा।राजा का बेटा ताज पहन याद नहीं कर पायेगा।।डॉ. कवि कुमार निर्मल



दोहा

महोदय आपको सादर प्रणाम मैंने कुछ दोहे आपको लिंक में भेंजे है आपको अच्छा लगे तो सूचित करे ...और प्रकाशित कर सके तो बड़ी कृपा होगी बहुत बहुत धन्यबाद रुपेश धनगर मथुरा 9410490520 9760986966



चाँद और सूरज

'चाँद' को लख- मन को बहुत हीं सुकून मिलता है।'सूरज' को लख कर पत्थर भी पिधल बह जाता है।।डॉ. कवि कुमार निर्मल



वक़्त पड़ने पे बिछाने के काम आता हूँ

मैं जमाने को हंसाने के काम आता हूँ .किसी का दर्द मिटाने के काम आता हूँ .मुझको अखबार पुराना समझ के फेंको न यूँ .वक़्त पड़ने पे बिछाने के काम आता हूँ .



महिला मताधिकार की जनक : कामिनी रॉय (बांग्ला : য়ামিন রায়)

जी हां, कामिनी रॉय जिन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए अपना पूरा जीवन ही समर्पित कर दिया था । आज 12 अक्टूबर को उनकी 155वीं जयंती है । कामिनी पहली ऐसी महिला हैं जिन्होंने ब्रिटिश इंडिया में ऑनर्स में ग्रेजुएशन की थी । कामिनी एक एक्टिविष्ट, शिक्षाविद् होने के साथ ही एक



मुक्तक

"मुक्तक"बादल कहता सुन सखे, मैं भी हूँ मजबूर।दिया है तुमने जानकर, मुझे रोग नासूर।अपनी सुविधा के लिए, करते क्यों उत्पात-कुछ भी सड़ा गला रहें, करो प्लास्टिक दूर।।मैं अंबुद विख्यात हूँ, बरसाने को नीर।बोया जो वह काट लो, वापस करता पीर।पर्यावरण सुधार अब, हरे पेड़ मत छेद-व्यथित चाँद तारे व्यथित, व्यथितम गगन स



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