था



भस्मासुर

लघुकथाभस्मासुर - अलख निरंजन!- आ जाइए बाबा पेड़ की छाह में। बाबा के आते ही वह हाथ जोड़कर खड़ा हो गया- आज्ञा महाराज। बाबा ने खटिया पर आसन जमाया। बोले- बच्चा, तेरा चेहरा मुरझाया हुआ है। दुःखी लगते हो। दुख का करण बता, बेटा। चुटकी में दूर कर दूंगा। - एक दुख हो तो बताऊं। दुख का बोझ उठाते-उठाते मैं हं



महर्षि बाल्मीकि की जयंती के शुभ अवसर पर महर्षि बाल्मीकि द्वारा रचित रामायण की भूमिका

‘महर्षि बाल्मीकि’ द्वारा रचित रामायण की भूमिका डॉ शोभा भारद्वाज महाराज जनक की पुत्री अयोध्या के राजाधिराज श्री राम की गर्भवतीभार्या सीता निशब्द गंगा को प्रणाम कर उनमें प्रवेश कर गई | सीता को भगवती गंगामें ही अपना सुरक्षित घर नजर आया| उन्हें ऐसा लग रहा था जैसे भागीरथी उन्हें बुला रही हों |भगवती गंग



मीठी शरारत

मेरी नयी लघुकथामीठी शरारतबात उन दिनो की है जब मैं हाईस्कूल का विद्यार्थी था। प्राइमरी स्कूल से आये एक साल हुआ होगा। अभी भी अनजानापन, झिझक, भय पूरी तरह गये नहीं थे। मित्र भी नहीं बन पाये थे। स्कूल आना, क्लास करना और छुट्टी होते ही वापस हो जाना। सारे काम खामोशी में ही होते थे।स्थितियाँ ऐसी ही थीं कि



विप्र धेनु सुर संत हित लीन मनुज अवतार

विप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार डॉ शोभा भारद्वाज रावण के भय से सम्पूर्ण ब्रह्मांड थर्राने लगा दस सिर बीस भुजाओं एवं ब्रह्मा जी से अमरत्वका वरदान प्राप्त राक्षस राज रावण निर्भय निशंक विचर रहा था हरेक को युद्ध मेंललकारता |रावण का पुत्र मेघनाथमहत्वकांक्षी ,रावण के समान बलशाली पिताको समर्पित



टेंशन

लघुकथा ..................टेंशन अवकाशप्राप्ति बड़ी इज्जत से हुई . सभी ने उनके पूरे कार्यकाल की बड़ी तारीफ़ की . उनकी ईमानदारी और कर्मठता को हरेक ने सराहा . उपहारों का सिलसिला तो अगले दिन तक भी चलता रहा . कुछ ने कहा , " ऐसे समर्पित अधिकारी बहुत कम होते हैं और यदि आपके अनुभव का लाभ , विभ



कसक

लघुकथा कसकदिन ढले काफी देर हो चुकी थी ।शाम, रात की बाहों में सिमटने को मजबूर थी । वो कमरे में अकेला था । सोफे का इस्तमाल बैड की तरह कर लिया था उसने । आदतन अपने मोबाईल पर पुरानी फिल्मों के गाने सुनकर रात के बिखरे अन्धेरे में उसे मासूमियत पसरी सी लगी । वो उन गानों के सुरीलेपन के बीच अपने तल्ख हुए सु



क्या वास्तु दोष के कारण होते हैं महिलाओं एवं पुरुषों के रोग..????

वास्तु शास्त्र के प्रसिद्ध ग्रंथ: समरांगण सूत्रधार, मानसार, विश्वकर्मा प्रकाश, नारद संहिता, बृहतसंहिता, वास्तु रत्नावली, भारतीय वास्तु शास्त्र, मुहूत्र्त मार्तंड आदि वास्तुज्ञान के भंडार हैं। अमरकोष हलायुध कोष के अनुसार वास्तुगृह निर्माण की वह कला है, जो ईशान आदि कोण से आरंभ होती है और घर को विघ्नों



नवदुर्गा और शारदीय नवरात्रि 2019, आपकी राशि अनुसार कौनसी देवी का पूजन, कोनसा भोग लगाएं ?

मां दुर्गा का प्रत्येक स्वरूप मंगलकारी है और एक-एक स्वरूप एक-एक ग्रह से संबंधित है। इसलिए नवरात्रि में देवी के नौ स्वरूप की पूजा प्रत्येक ग्रहों की पीड़ा को शांत करती है।देवी माँ या निर्मल चेतना स्वयं को सभी रूपों में प्रत्यक्ष करती है,और सभी नाम ग्रहण करती है। माँ दुर्गा के नौ रूप और हर नाम में एक



नवरात्रों में घट स्थापना

नवरात्रोंमें घट स्थापना आश्विन शुक्ल प्रतिपदा यानी 29 सितम्बर रविवार से समस्त हिन्दू सम्प्रदाय में हर घर में माँ भगवती कीपूजा अर्चना का नव दिवसीय उत्सव शारदीय नवरात्र के रूप में आरम्भ हो जाएगा |सर्वप्रथम सभी को शारदीय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएँ...भारतीय वैदिक परम्परा के अनुसार किसीभी धार्मिक



Archana Ki Rachna: Preview "इस बार की नवरात्री "

इस बार घट स्थापना वो ही करेजिसने कोई बेटी रुलायी न होवरना बंद करो ये ढोंग नव दिन देवी पूजने का जब तुमको किसी बेटी की चिंता सतायी न हो सम्मान,प्रतिष्ठा और वंश के दिखावे में जब तुम बेटी की हत्या करते हो अपने गंदे हाथों से तुम ,उसकी चुनर खींच लेते होइस बार माँ पर चुनर तब



मयंक का हठयोग

मयंक का हठयोग ( लघु कथा ) ********* अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सुबह का



कब और कैसे करें महालय (कनागत या श्राद्ध)वर्ष 2019 में..

भाद्रपद (भादों मास) की पूर्णिमा से प्रारंभ होकर आश्विन मास की अमावस्या तक कुल सोलह तिथियां श्राद्ध पक्ष की होती है। इस पक्ष में सूर्य कन्या राशि में होता है। इसीलिए इस पक्ष को कन्यागत अथवा कनागत भी कहा जाात है। श्राद्ध का ज्योतिषीय महत्त्व की अपेक्षा धार्मिक महत्व अधिक है क्योंकि यह हमारी धार्मिक आस



क्या करें मृत आत्मा की शांति के लिए--

पितृ सदा रहते हैं आपके आस-पास। मृत्यु के पश्चात हमारा और मृत आत्मा का संबंध-विच्छेद केवल दैहिक स्तर पर होता है, आत्मिक स्तर पर नहीं। जिनकी अकाल मृत्यु होती है उनकी आत्मा अपनी निर्धारित आयु तक भटकती रहती है। हमारे पूर्वजों को, पितरों को जब मृत्यु उपरांत भी शांति नहीं मिलती और वे इसी लोक में भटकते रह



क्या पंचकों में अस्थि संचयन हो सकती है ???

अंत‌िम संस्कार का शास्‍त्रों में बहुत वर्णन द‌िया गया है क्योंक‌ि इसी से व्यक्त‌ि को परलोक में उत्तम स्थान और अगले जन्म में उत्तम कुल पर‌िवार में जन्म और सुख प्राप्त होता है। गरुड़ पुराण में बताया गया है क‌ि ज‌िस व्यक्त‌ि का अंत‌िम संस्कार नहीं होता है उनकी आत्मा मृत्‍यु के बाद प्रेत बनकर भटकती है औ



पितृ पक्ष में पूर्वज क्यों आते हैं धरती पर? जानिए इसके बारे में 15 अहम जानकारियां

13 सितंबर से पूरा देश पितृपक्ष मना रहा है और ये पूरे 15 दिनों तक चलेगा इसमें जो हमारे घर के पितर लोग मर जाते हैं तो उनके श्राद्ध का काम चलता है। इस दौरान लोग ब्राह्मण को भोजन कराकर दक्षणा देते हैं और उनसे आशीर्वाद लेते हैं कि उनके पितर लोग जहां भी हैं चैन और खुशी के साथ रहें। शास्त्रों के अनुसार पि



बॉलीवुड से प्रेरणा लेकर बने राजस्थानी दुल्हन

बात राजस्थान की हो तो ज़हन में राजा और रजवाड़ों, भव्य महलों की कल्पना दिल में उभर आती है.अगर आप भी भविष्य में दुल्हन बननें का मन बना रही हैं तो आप भी राजस्थानी लुक अपना सकती है.आप बॉलीवुड की हीरोइन्स से इन्सपिरेशन लेकर खुद को रॉयल लुक दे सकती हैं. आगे पढ़ने के लिए लिं



लघुकथा -बदलती निगाहें

कहानी-बदलती निगाहेंवक्त के साथ लोग भी बदल जाते है,लेकिन स्मिता से मुझें ऐसी उम्मीद नहीं थी. मुझे यकीन ही नहीं हो रहा था कि ये वही स्मिता है, जिस



लघुकथा- अल्पायु

अपने स्कूल के आम के पेड़ के नजदीक खड़ा थी तन्वी, ये वही पेड़ था जिस पर वो आम तोड़ने जा चढ़ी थी। नन्ही तन्वी जो बमुश्किल १० साल की थी.जैसे तैसे चढ़ तो गई लेकिन उतरना जैसे टेढ़ी खीर बन गया।पेड़ के नजदीक से गुजर



वैज्ञानिक संस्थान बनाम गौशाला

भारतीय सविधान जब लिखा जा रहा था, तब नेहरूजी चाहते थे की उसमे इस बात को जोड़ दिया जाए सरकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएगी, जिसमे धार्मिक सोच नहीं होगी. नेहरू , सुभाषचद्र बोस और भगत सिंह में मतभेद बताने वाले भूल जाते है कि उनके विचार एक ही थे सिर्फ मतभेद रास्ते का था. नेहरू जी



गणेश चतुर्थी विशेष: इन 15 बातों को जानते हैं तभी मनाइए गणपति बप्पा का ये पर्व

2 सिंतबर से देश में गणेश चतुर्थी का पर्व आ रहा है और इस दिन सभी गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करते हुए उनकी पूजा करते हैं। ये प्रतिमा लोग अपने गली, मोहल्ले या घर में रखते हैं और 3 दिन, 5 दिन या फिर पूरे 10 दिनों तक इनकी पूजा करने के बाद गंगाजी में प्रवाहित करा दिया जाता है। गणपति बप्पा मोरिया के जयकार



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