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' 2019 का चुनाव ' के अपने अलग तरह के रंग

' 2019 का चुनाव' के अपने अलग तरह के रंग डॉ शोभा भारद्वाज अबकी बार सात चरणों में चुनावहुये और लम्बे खिचे जितना मोदी जी समर्थक मोदी – मोदी के नारे लगते थे उतना हीराहुल गाँधी ने अपने समर्थको से नारा लगवाया चौकीदार उत्तर ‘चोर है’ देश के सबसे बड़े लोकतंत्रके प्रधानमंत्री जिन पर भ्रष्टाचार का एक भी



होली में रंगों का रखें खास ख्याल, इस तरह छुड़ाएं गाढ़ा रंग | Holi Health Tips

21 मार्च के दिन पूरा देश होली के रंग में डूबा होगा और ज्यादातर लोग अपनी मस्ती में डूबकर बेफिक्री के साथ होली खेलेंगे. होली खेलने के दौरान लोग उसमें इतना रम जाते हैं कि उन्हें होश ही नहीं होता कि उनके ऊपर पड़ने वाला रंग कच्चा है या फिर पक्का, बस जो आता है उसके साथ रंगो



राहुल गांधी का ‘एप’ के माध्यम से मुख्यमंत्री चुनना! जनादेश का अपमान नहीं?

पाँच प्रदेशों में हुये विधानसभा चुनावों में तीन विधानसभाओं में कांग्रेस सरकारें बनने जा रही है। कांग्रेस पार्टी द्वारा तीन प्रदेशों में मुख्यमंत्री चुनने की प्रक्रिया की औपचारिकताओं की (औपचारिक) पूर्ती की जाकर विधायक दल द्वारा अंतिम निर्णय लेने का अधिकार परम्परा अनुसार हाई कमान अर्थात राहुल गांधी को



“कुंडलिया”उगते सूरज की तरह दे प्रकाश हर ग्रंथ।

“कुंडलिया”उगते सूरज की तरह दे प्रकाश हर ग्रंथ। हो कोई भी सभ्यता सबके सुंदर पंथ॥ सबके सुंदर पंथ संत सब एक समाना। मानव ममता एक नेक भर लिया खजाना॥ कह गौतम कविराय हाय रे हम क्यों भुगते। कहाँ गई कचनार कहाँ अब मृदु फल उगते॥महातम मिश्र गौतम गोरखपुरी



ये बता दो पिया - सिगरेट की तरह

ये बाता दो पिया फिल्म सिगरेट की तारह ​​से गीत श्वेता पंडित और सुदीप बनर्जी द्वारा गाया जाता है, इसका संगीत विराज सावंत द्वारा रचित है और गीत कौशल किशोर द्वारा लिखे गए हैं।सिगरेट की तरह (Cigarette Ki Tarah )ये बता दो पिया की लिरिक्स (Lyrics Of Ye Bata Do Piya )ये बता दो पियाक्यों छाला मेरा मैंयह ब



मुझको खुद से - सिगरेट की तरह

फिल्म सिगारेट की तारह ​​से मुजको खुद से गीत कविता सेठ द्वारा गाया जाता है, इसका संगीत विराज सावंत द्वारा रचित है और गीत सुदर्शन गोयल द्वारा लिखे गए हैं।सिगरेट की तरह (Cigarette Ki Tarah )मुझको खुद से की लिरिक्स (Lyrics Of Mujhko Khud Se )मुझको खुद से जो तूने जुदा कर दियामुझको खुद से जो तूने जुदा



हे भगवन - सिगरेट की तरह

Hey Bhagwan Lyrics of Cigarette Ki Tarah (2012): This is a lovely song from Cigarette Ki Tarah starring Bhoop Yaduvanshi, Prashant Narayanan, Uvika Chaudhary, Madhurima Tuli and Sudesh Berry. It is sung by Tochi Raina and composed by Sudarshan Goel.सिगरेट की तरह (Cigarette Ki Tarah )हे भगवन की लिर



दूरियां - सिगरेट की तरह

फिल्म सिगरेट की तारह ​​से डोरियन गीत निखिल डिसोजा द्वारा गाया जाता है, इसका संगीत अंकुर विराज द्वारा रचित है और गीत देव नारायण द्वारा लिखे गए हैं।सिगरेट की तरह (Cigarette Ki Tarah )दूरियां की लिरिक्स (Lyrics Of Dooriyan )तू ही दिखे हर जगहजीने की है तू वजहसोचूँ हमेशा तुझको हीखुद में तुझे ढूंढताऐसी



सिगरेट की तरह टाइटल सांग - सिगरेट की तरह

Cigarette Ki Tarah Title Song Lyrics of Cigarette Ki Tarah (2012): This is a lovely song from Cigarette Ki Tarah starring Bhoop Yaduvanshi, Prashant Narayanan, Uvika Chaudhary, Madhurima Tuli and Sudesh Berry. It is sung by Suzzanne Dmello and composed by Kavita Seth.सिगरेट की तरह (Cigarette Ki Tara



सिगरेट की तरह (Cigarette Ki Tarah )

"Cigarette Ki Tarah" is a 2012 hindi film which has Bhoop Yaduvanshi, Prashant Narayanan, Uvika Chaudhary, Madhurima Tuli and Sudesh Berry in lead roles. We have 5 songs lyrics and 2 trailers of Cigarette Ki Tarah. Kavita Seth, Ankur Viraj, Ankur Mishra and Viraj Sawant have composed its music. Suz



मेरी परछाई जैसा है ये मेरा प्यार - शिखा

Meri parchhai jaisa hai ye mera pyar,yu to humesha raheta karib mere fir bhi hai vo mujse bahot door,Yu to humesha hota saath mere fir bhi raheta hai vo kahi ghum,Yu to humesha roshni bikherta huaFir bhi andhero mai bhatkta hua,Yu to humesha muskurata hua,Fir bhi ander se



आँसुओं के भी दाम

आँसुओं के भी दामलब्ज़ खुद ही बयान होते हैं,आँसुओं के भी दाम होते हैंIपंछी, रोको तो दौड़ते बादलों को, व्योम में कहाँ विराम होते हैं I चाँद तारों की दोस्ती रात भर, जुगनुओं के तो नाम होते है Iदुपहरी धूप, जिश्म की जलन, जैसे वर्षों की थकान होते हैं Iअर्श पर चाँदनी,त्रण पर म



.......... इस तरह प्रेम को जीया मैंने

प्रेम को जब भी एक शक्ल देना चाहातो या तो मैं दीवारों में चुन दी गईया फिर वह शक्ल बड़ी डरावनी हो गई .........ऐसे में अच्छा लगासहज लगाकभी रेत परकभी बादलों मेंकभी आँखों की पुतलियों मेंएक चित्र बनानाउसे प्रेम का नाम देनामान मनुहार करनाफिर उसे समेट देना ...ऐसे में -मैं सती हुई , पार्वती बनीसीता, राधा, मी



ग़ज़ल (बीती उम्र कुछ इस तरह कि खुद से हम ना मिल सके)

Hindi Sahitya | Hindi Poems | Hindi Kavitaकल तलक लगता था हमको शहर ये जाना हुआइक शख्श अब दीखता नहीं तो शहर ये बीरान हैबीती उम्र कुछ इस तरह कि खुद से हम ना मिल सकेजिंदगी का ये सफ़र क्यों इस कदर अनजान हैगर कहोगें दिन को दिन तो लोग जानेगें गुनाहअब आज के इस दौर में दीखते कहा





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