आशा और सफलता

जीवन में सफलता प्राप्त करनी है तो सोच सकारात्मक बनाए रखने के साथ ही मन मेंआशा को जगाए रखना आवश्यक है | सकारात्मक सोच और आशावान व्यक्ति से किसी भी प्रकारकी निराशा और चिन्ता कोसों दूर भागते हैं जिसके कारण उसका मन और शरीर दोनों स्वस्थबने रहते हैं और वह अपनी सफलता के लिए उचित दिशा में प्रयास कर पाता है…



11 जनवरी 2019

खुशी के तीन राज़।

हम सभी जानते हैं कि पैसा खुशी नहीं खरीद सकता है ... लेकिन कई बार हम ऐसा कार्य करते हैं जैसे कि हम थोड़े अधिक पैसे के साथ खुश हैं। हम अमीर बनने के लिए इच्छुक हैं (जब हम जानते हैं कि अमीर खुश नहीं हैं या तो); हमें उस नवीनतम गैजेट या शैली को प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। हम अधिक पैसा कमा



संस्कारहीनता :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*पूर्वकाल में यदि मनुष्य सर्वश्रेष्ठ बना तो उसमें मनुष्य के संस्कारों की महत्वपूर्ण भूमिका थी | संस्कार ही मनुष्य को पूर्ण करते हुए पात्रता प्रदान करते हैं और संस्कृति समाज को पूर्ण करती है | संस्कारों से मनुष्य के आचरण कार्य करते हैं | किसी भी मनुष्य के चरित्र निर्माण में धर्म , संस्कार और संस्कृति



मिरर इमेज वर्ड्स

At Gandhi Polytechnic, Alumini Function Signing Autographs. Check the Speed -Mirror Writing in English Language - YouTube



भगवान शिव

महादेव को शब्दों में बांधना असंभव है फिर भी मैंने एक प्रयत्न किया है कि मैं जगत के स्वामी देवाधिदेव महादेव को अपनी कविता के माध्यम से आप सबके समझ उनके स्वरूप का वर्णन करने का प्रयत्न करूँ।हर हर महादेव



नक्षत्र - एक विश्लेषण

शतभिषजज्योतिष मेंमुहूर्त गणना, प्रश्न तथा अन्य भी आवश्यक ज्योतिषीय गणनाओं के लिए प्रयुक्त किये जानेवाले पञ्चांग के आवश्यक अंग नक्षत्रों के नामों की व्युत्पत्ति और उनके अर्थ तथापर्यायवाची शब्दों के विषय में हम बात कर रहे हैं | इस क्रम में अब तक अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिर, आर्द्रा, पुनर्व



साथी...

“हमेशा मेरी ख़ुशी में ही साथ रहते हो दुख में क्यों नहीं?" "दुख में भी साथ रहता हूँ ना, तुम्हारे दुखों को खुशियों में बदल देता हूँ…तो तुम्हे पता नहीं चलता।”#ज़हन



आज का ज्ञान

जरा रूप को, आशा धैर्य को, मृत्यु प्राण को, क्रोध श्री को, काम लज्जा को हरता है पर अभिमान सब को हरता है - विदुर नीति अभिमान नरक कामूल है - महाभारत कोयल दिव्याआमरस पीकर भी अभिमान नहीं करती, लेकिन मेढक कीचर का पानी पीकर भी टर्राने लगताहै - प्रसंग रत्नावली कबीरा जरब नकीजिये कबुहूँ न हासिये कोए अबहूँ नाव



आज का ज्ञान

जैसा देश तैसाभेष - कहावत माता, पिता, गुरु, स्वामी, भ्राता, पुत्र और मित्र का कभी क्षण भर के लिए विरोध या अपकार नहीं करना चाहिए -शुक्रनीति मनुष्य जिससमय पशु तुल्य आचरण करता है, उस समय वह पशुओं से भी नीचे गिर जाता है -टैगोर शास्त्र पढ़करभी लोग मूर्ख होते हैं किन्तु जो उसके अनुसार आचरण करता है वोही वस्



नक्षत्र - एक विश्लेषण

धनिष्ठाज्योतिष में मुहूर्त गणना, प्रश्न तथाअन्य भी आवश्यक ज्योतिषीय गणनाओं के लिए प्रयुक्त किये जाने वाले पञ्चांग केआवश्यक अंग नक्षत्रों के नामों की व्युत्पत्ति और उनके अर्थ तथा पर्यायवाची शब्दोंके विषय में हम बात कर रहे हैं | इस क्रम में अब तक अश्विनी, भरणी, कृत्तिका, रोहिणी, मृगशिर, आर्द्रा, पुनर्



आज का सुविचार

आत्म विश्वास आत्मविश्वाससफलता का मुख्य रहष्य है - एमर्सन यहआत्मविश्वास रखो को तुम पृथ्वी के सबसे आवश्यक मनुष्य हो - गोर्की जिसमेआत्मविश्वास नहीं उसमे अन्य चीजों के प्रति विश्वास कैसे उत्पन्न हो सकता ही -विवेकानंद आत्मविश्वास, आत्मज्ञान और आत्मसंयम केवल यही तीन जीवन को परम शांति सम्पन्न बना देते हैं



आज का सुविचार

अज्ञान अज्ञान जैसाशत्रु दूसरा नहीं - चाणक्य अपने शत्रु सेप्रेम करो, जो तुम्हे सताए उसके लिए प्रार्थना करो - ईसा अज्ञानी होनामनुष्य का असाधारण अधिकार नहीं है बल्कि स्वयं को अज्ञानी जानना ही उसकाविशेषाधिकार है - राधाकृष्णन अशिक्षित रहनेसे पैदा ना होना अच्छा है क्योंकि अज्ञान ही सब विपत्ति का मूल है अज



सुविचार

*आचरण-आभूषण**विप्राणां भूषणं विद्या पृथिव्या भूषणं नृपः* ।*नभसो भूषणं चन्द्रः शीलं सर्वस्य भूषणम्* ॥जिस प्रकार एक *विप्र का आभूषण विद्या है, पृथ्वी का आभूषण राजा है, आकाश का आभूषण चन्द्र है उसी प्रकार इस समस्त चराचर जगत का आभूषण सदाचार* है ।जिस प्रकार *प्रकृति का स्पष्ट नियम है दान देना , उसके बद



शब्द

अजीब विरोधाभास है शब्दों में। अजीब द्वंद्व है शब्द भरोसे में, विश्वास में, आस्था में, घृणा में, प्रेम में। दरअसल शब्दों का कार्य है एक खास तरह के विचार को प्रस्तुत करना। किसी मनःस्थिति, परिस्थिती, भाव , वस्तु , रंग, दिशा, दशा, जगह, स्थान, गुण, अवगुण इत्यादि को दर्शाना। शब



भगवान के अवतार के कारण :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में ब्रह्मा , विष्णु , महेश के अतिरिक्त तैंतीस करोड़ देवी देवताओं की मान्यता है , इनके साथ ही समय-समय पर भगवान के विभिन्न अवतारों का वर्णन मिलता है | प्रश्न यह है कि जब परमात्मा के द्वारा बनाई हुई सृष्टि उन्हीं के अनुसार चल रही है तो भगवान को अवतार लेने की आवश्यकता क्यों पड़ी | भगवान के



रामराज्य की परिकल्पना :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस संसार में जीवधारियों को तीन प्रकार से कष्ट होते हैं जिन्हें त्रिविध ताप कहा जाता है | ये हैं - आध्यात्मिक, आधिभौतिक तथा आधिदैविक | सामान्यतः इन्हें दैहिक, भौतिक तथा दैविक ताप के नाम से भी जाना जाता है | इस शरीर को स्वतः अपने ही कारणों से जो कष्ट होता है उसे दैहिक ताप कहा जाता है | इसे आध्यात्मिक



हिन्दी पञ्चाङ्ग

हिन्दीपञ्चांगगुरुवार,25 अक्टूबर 2018 – नई दिल्लीविरोधकृतविक्रम सम्वत 2075 / दक्षिणायन सूर्योदय : 06:28 पर तुलामें / स्वाति नक्षत्र सूर्यास्त : 17:42 पर चन्द्र राशि : मेष चन्द्र नक्षत्र : अश्विनी 09:26 तक, तत्पश्चात भरणी तिथि



जीवन का आधार है माँ :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*नवरात्र के पाँचवे दिन स्कन्दमाता का पूजन किया जाता है ! कार्तिक कुमार का एक नाम स्कंद भी है इसीलिए भगवती को "स्कन्दमाता" कहा गया है | माता शब्द ऐसा है जिसका वर्णन कर शायद किसी के वश की बात नहीं है | मानव जीवन में माता का सर्वोच्च स्थान है | जीव के गर्भ में आते ही एक माता उसके प्रति कर्तव्य प्रारम्भ



हमारे पूर्वज :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म की दिव्यता का प्रतीक पितृपक्ष आज सर्वपितृ अमावस्या के साथ सम्पन्न हो गया | सोलह दिन तक हमारे पूर्वजों / पितरों के निमित्त चलने वाले इस विशेष पक्ष में सभी सनातन धर्मावलम्बी दिवंगत हुए पूर्वजों के प्रति श्रद्धा दर्शाते हुए श्राद्ध , तर्पण एवं पिंडदान आदि करके उनको तृप्त करने का प्रयास करते



मैया ब्रह्मचारिणी एवं आज की नारी :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*पराम्बा जगदंबा जगत जननी भगवती मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप है ब्रह्मचारिणी | जिसका अर्थ होता है तपश्चारिणी अर्थात तपस्या करने वाली | महामाया ब्रह्मचारिणी नें घोर तपस्या करके भगवान शिव को अपने पति के रुप में प्राप्त किया और भगवान शिव के वामभाग में विराजित होकर के पतिव्रताओं में अग्रगण्य बनीं | इसी प्र



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