वृतांत

वृद्धों की समस्या का तुलनात्मक पहलु अवश्य पढ़ें ...

एक दिन मैं अपनी दादी को उनकी बहिन से मिलाने लेकर गया, साथ में दादाजी भी चल दिए! हम तीनो उनके घर उनसे मिलने गए क्यूंकि वो बाथरूम से फिसल कर गिर गयी थी | वहा ये चारो बुजुर्ग मिले और आपस में मिल कर काफी खुश दिखाई दिए!एक बार को मेरी दादी की बहिन अपना दर्द भूल गयी थी शायद।



कांधला से कैराना -हाय रे बच्चों वाली औरतें

कांधला से कैराना और पानीपत ,एक ऐसी बस यात्रा जिसे भुला पाना शायद भारत के सबसे बड़े घुमक्कड़ व् यात्रा वृतांत लिखने वाले राहुल सांकृत्यायन जी के लिए भी संभव नहीं होता यदि वे इधर की कभी एक बार भी यात्रा करते . कोई भी बात या तो किसी अच्छे अनुभव के लिए याद की जाती है



“छुक छुक रेल” (यात्रा वृतांत)

“छुक छुक रेल” (यात्रा वृतांत) फिर वहीँ स्टेशन, वही रेल, वही पतली पट्टी वाली लोहे की डगर। चढ़ते उतरते धक्का मुक्की करती पसीने की कमाई हुई गठरी को सीने से चिपकाए परवरिश के रिश्ते। कोई आर.ए.सी., कोई कनफर्म तो कोई प्रतीक्षारत, अधीर, निराधार टिकट के साथ आशा भरी नजर के साथ सूच





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