लौह पुरुष सरदार पटेल ,सच्ची श्रद्धांजली धारा 370 ,35A की समाप्ति है

स्वर्गीय सरदार पटेल को सच्ची श्रद्धांजली धारा 370, 35 a की समाप्ति है डॉ शोभा भारद्वाज 15 अगस्त 1947 देश आजाद हुआ अधिकाँश प्रांतीय कांग्रेस समितियों के सरदार पटेल के पक्ष में होने के बाद भी गांधी जी कीइच्छा का सम्मान करते हुए नेहरू जी देश के प्रधान मंत्री बनाया गया ,पटेल उपप्रधान मंत्री एवं गृह मं



हम जुबां

हिंदी है हम वतन है। अपनी अभिव्यक्ति कहने का जतन है, अपनी संस्कृति का न हो पतन, बस यही जतन है। हिंदी है हम वतन है। जुबानें बेहिसाब है जहां में, हम वतन के, खुद के आजाद ख्यालात की, जुबान है हिंदी... अपनेपन का अहसास, खुद के शब्दों की परवाज़ है हिंदी, कोयल की जुबान है हिंदी। हिंदी है हम वतन है...



सुषमा जी भारत माता की वीर कर्तव्यमयी निष्कामभाव पूर्ण देश पर समर्पित एक महान देवी

शब्दों की कमी भाव को समझ जाइए । जय हिंद आत्मन: शांति भवति: भारत माँ की गोद में ॐ शांति शांति शांति !



30 जुलाई 2019

एक नकारात्मक व्यक्ति के साथ व्यवहार करने की स्वादिष्टता।

“यह रमणीय है, यह स्वादिष्ट है, यह प्यारा है।”-कोल पोर्टरहम सभी को अपने जीवन में किसी ऐसे व्यक्ति के होने की निराशा महसूस हुई जो लगातार नकारात्मक लगता है – शिकायत करना, छोटी-छोटी बातों से नाराज होना, गुस्सा करना, निराशावादी होना।यह बहुत मुश्



गाँधी जी की स्वतंत्रता

गांधी जी ने भारतीय स्वतंत्रता को पूर्ण स्वतंत्रता क्यों नहीं माना? कारण बहुत सरल है, लेकिन बहुत सारे लोग इसे बहुत जटिल बनाते हैं, लोगों को भ्रमित करते हैं। देश की स्वतंत्रता वास्तविक स्वतंत्रता नहीं है, प्रत्येक व्यक्ति की स्वतंत्रता वास्तविक स्वतंत्रता है। बोलने की स्



व्यक्त्वि का हस्र

व्यक्तित्व निर्माण में समाज की विशेष भूमिका होती है, जैसे किसी चरित्र को पागल घोषित करने पे उसपर पागलपन के उभरने की सम्भावना बढ जाती है , किसी चरित्र को संदेह की दृष्टि से देखने से उस पर शक्की चरित्रता की झलक मिलने लग जाती है।दोनों ही दृष्टियों से समाज मे दो व्यक्तित्वों का हस्र हो जाता है।



तुरंत आवश्यकता है !!!

(1) एक इलेक्ट्रिशियन : जो ऐसे दो व्यक्तियों के बीचकनेक्शन कर सके, जिनकी आपस में बातचीत बन्द हो ।(2) एक ऑप्टिशियन : जो लोगों की दृष्टि के साथदृष्टिकोण में भी सुधार कर सके ।(3) एक चित्रकार : जो हर व्यक्ति के चेहरे परमुस्कान की रेखा खींच स



उम्मीदों की मशाल

रामू की माँ तो अपने पति के शव पर पछाड़ खाकर गिरी जा रही थी.रामू कभी अपने छोटे भाई बहिन को संभाल रहा था ,तो कभी अपनी माँ को.अचानक पिता के चले जाने से उसके कंधों पर जिम्मेदारियों का बोझ आ पड़ा था.पढ़ाई छोड़,घर में चूल्हा जलाने के वास्ते रामू काम की तलाश में सड़को की छान मारता।अंततःउसने घर-घर जाकर रद्दी बेच



ये हे भारत की अभिव्यक्ति

ये होती हें अभिव्यक्ति की आज़ादी ये आज जनता को सुप्रीमकोर्ट ने बता दिया की एक व्यक्ति की अभिव्यक्ति को पूर्ण करने के लिया सुप्रीमकोर्ट ने एक पूर्ण समाज या ये कहे पूरा हिन्दू समाज की ( भावनाओं को ठेस ) पहुचना अच्छा लगा आज उन सब को भी बहुत अच



ये धुआं कहां से उठता है...

जुड़ सकूं, ऐसा कोई गुर तलाशती हूं,सन्नाटों के बिंदास सुर तलाशती हूं...हूं भी या माजी की शादाब मुहर भर हूं,किससे पूछूं, उसको अक्सर पुकारती हूं...रोने के सुकूं से जब घुट जाती हैं सांसें,मुस्कुराहट का अदद दस्तूर तलाशती हूं...फलक-ओ-जमीं से फुर्कत का सबब लेती हूं,लिपट के उससे रोने के बहाने तलाशती हूं...खु



"मदर टेरेसा"

एक व्यक्ति बनकर जीना महत्त्वपूर्ण नहीं है अपितु एक व्यक्तित्त्व बनकर जीना अधिक महत्त्वपूर्ण है; क्योंकि व्यक्ति तो समाप्त हो जाता है लेकिन व्यक्तित्त्व सदैव जीवित रहता है ।



खुले दरवाजे पर दस्तक

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अभिव्यक्ति की आजादी.... विसंवादी सुर !!!

कई बार किसी को अपशब्द कहना, इसेअभिव्यक्ति की आजादी मान लिया जाए तो, आम जीवन में चर्चा का उग्र माहौल पैदा हो जाताहै और अनेक बार मामला गाली-गलौच तक पहुँच जाता है । दुर्भाग्य से पिछले कुछ वर्षों में संसद और राज्योंकी विधान सभाओं में चर्चा के स्थान पर, आपेक्षवादी परम्परा, शाब्दिक तकरार के साथ-साथअनेक बा



&quot;अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहाँ तक है?&quot;

"अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहाँ तक है?" अति उत्तम, अति गंभीर व चिंतनशील विषय है "अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता कहाँ तक"। वाणी, प्रकृतिप्रदत्त एक ऐसा अनमोल खजाना है जिससे मानव सहित हर प्राणी अपने मन की भवनाओं को व्यक्त करता है। जन्म से ही इसका प्रादुर्भाव रोने से शुरू होता है औ



व्यक्तित्व और जवाब में बहुत बड़ा अंतर होता है

पूर्वाभास तो रहा सत्य का पर ... होनी काहू बिधि ना टरै भी एक सत्य है और इसी सत्य में पूर्वाभास विलीन होता रहा !पूर्वाभास को सोचते हुए पछताते हुए रास्ते में कई सत्य औंधे पड़े मिले ज्योंही कन्धे पर हाथ रखा चिहुंक कर पूछा -"सत्य का आभास था तो अनजान क्यूँ रहे ?"निरुत्तर होकर भी मैंने जवाब दिया क्योंकि त



ट्रांसजेंडर व्यक्तियों का (अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2016

भारत के संविधान के भाग-III में अनुच्छेद 14 के अंतर्गत सभी व्यक्तियों को विधि के समक्ष समता की गारंटी प्रदान की गई है, अनुच्छेद 15 का खंड (1) और खंड (2) तथा अनुच्छेद 16 का खंड (2) अन्य बातों के साथ लिंग के आधार पर विभेद का प्रतिषेध और अनुच्छेद 19 का खंड (1) वाक् स्वातंत्र्य विषयक अधिकारों का संरक्षण



समय के साथ | दिव्यांश

https://diwyansh.wordpress.com/2015/06/26/%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%af-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a5/



आतंकी संगठन का खतरनाक 'वैश्विक' उभार

अपनी सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और दक्षता के बावजूद यदि ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और फ़्रांस जैसे देश आतंकियों के निशाने पर आ जाएँ तो विश्व के दुसरे विकासशील देशों में भय का माहौल उत्पन्न होना स्वाभाविक ही है. आतंक के शिकार अब तक तीसरी दुनिया के देश ही हुआ करते थे, लेकिन पिछले कुछ दिनों से इस ट्रेंड ने विकसित



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