व्यंग

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प्रयागराज vs इलाहबाद अब अल्लाह+आबाद मतलब इलाहबाद का नाम “प्रयागराज“ के नाम से ही जाना जायेगा। दो नदियों के संगम स्थल को प्रयाग कहते हैं। यह स्थान नदियों का ऐसा एकलौता संगम स्थल है जहाँ पर दो नहीं बल्की तीन नदियाँ आपस मे मिलती है और इसलिए प्राचिन भारत मे इस पवित्



तैमूर लंग

Monday, November 12, 201!! घर वापसी !! चलो माना की कानून बनाकर हलाला बंद करवा दोगे पर जो १४ सौ सालों से नस्ल खराब होकर बने उस गंदे खून को कैसे साफ करोगे....? Family Tree बनवाकर देख लो, कुछ को तो अपने बाप-दादाओं तक का पता नही होगा। मुल्लियों को एक मुफ्त मे सलाह द



कोई ऐसा भी है

वो #मुस्लिम होकर भी #हिन्दू प्रेम का #कर्तव्य समझा गये---वो #हिन्दू होकर #मुस्लिम की #अहमियत को दर्शा गये ---#संवेदना यह है फिर भी दोनों के #बंदे#समाज को #चूर्णित कर गये--- - अरुण आरख "मलिहाबादी"



थोथी विद्वता :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से सनातन धर्म यदि दिव्य एवं अलौकिक रहा है तो उसका कारण हमारे सनातन धर्म के विद्वान एवं उनकी विद्वता को ही मानना चाहिए | संसार भर में फैले हुए सभी धर्मों में सनातन धर्म को सबका मूल माना जाता है | हमारे विद्वानों ने अपने ज्ञान का प्रचार किया सतसंग के माध्यम से इन्हीं सतसंगों का सार निकालकर ग्र



रिश्ता पक्का है नाटिका

पात्र – परिचय लड़का --- दिनेश (ऑफिसमें अकाउंटेंट)लडके का पिता श्री सतीश बहल -- (पेशे से टीचर)लडके कि माँ शशिबाला --------- (गृहणी)लड़के का छोटा भाई ------------ वरुणलडके की बहन-------------------- कल्पनारिश्ता करवाने वाला व्यक्ति---- शास्त्री जी लडकी का परिवारलड़की – संजनालडकी की बहन –रंजनालडकी



अफसोस

सुबह टी वी पर न्यूज़ में दिखारहे थे किसी स्कूल के कुछ छात्र एक अध्यापक को पीट रहे थे । अध्यापक से वे छात्रइस बात से खफा हो गये थे कि उसने उनके नकल करने पर आपत्ति जतायी थी और उसमेंव्यवधान डाला था। मन खिन्न हो गया । किन्तु अगले ही पलों में खुलासा हुआ मामलामात्र नकल का नह



आजकल

ठहरे पानी में पत्थर उछाल दिया है । उसने यह बड़ा कमाल किया है ।वह तपाक से गले मिलता है आजकल । शायद कोई नया पाठ पढ़ रहा है आजकल । आँखों की भाषा भी कमाल है । एक गलती और सब बंटाधार है ।



“गज़ल” झूठ पर ताली न बजती व्यंग का बहुमान कर

मापनी-२१२२ २१२२ २१२२ २१२ समांत- आन पदांत- कर “गज़ल” कुछ सुनाने आ गया हूँ मन मनन अनुमान कर झूठ पर ताली न बजती व्यंग का बहुमान करहो सके तो भाव को अपनी तराजू तौलना शब्द तो हर कलम के हैं सृजन पथ गतिमान कर॥ छू गया हो दर्द मेरा यदि किसी भी देह कोउठ बता देना दवा है जा लगा दिलजान



गरीब और त्यौहार

गरीबों के लिये टसुए न टपकाइये ,कुछ कर सकते हैं तो करिये ,बेचारगी न फैलाइये . गरीबी पर राजनीति होती रही है और होती रहेगी .गरीबों पर तरस न फैशन बनाइये .साल भर में क्या किया जरा वो गिनाइये .एन त्यौहार पर आत्मग्लानि न पसराइये पर्व



रामरहीम दास

गुस्सा तो समझे ,था किसबात पे ?नाराज तो समझे ,थे किनसे ?ये आगजनी और हिंसा,किन लोगों पर ?कुछ नहीं सूझ रहा था। तो अपने सर फोड़ लेते। गुलाम, मालिक के वास्ते ,इतना तो कर सकते थे । -र र



अच्छे दिन... (व्यंग कविता)

कवि श्री सम्पत 'सरल' जी की अच्छे दिन पर एक व्यंग रचना...



नेतागिरी के अड्डे – शिशिर मधुकर

मुंबई की मोटर साइकिल सवार गड्डे में फिसल गईदिल्ली के अनिल गुप्ता की जान नाले में निकल गईनगर निगमों की लापरवाही पर जनता बहुत नाराज़ हैखुलकर वो ये कहती है यहाँ होता ना कोई काज हैलेकिन भोली जनता को क्या इतना भी नहीं ज्ञात हैनिगम नेतागिरी के अड्डे हैं जहाँ उसकी नहीं औकात हैनालियां, सीवर और सड़क सफाई के



राष्ट्र की खातिर- शिशिर मधुकर

एक मेरे मित्र हैं जो मुझसे बहुत नाराज़ हैंउनको पसंद आते ना मेरे मलमली अल्फ़ाज़ हैंराष्ट्र की खातिर वो कहते हैं की मैं रचना लिखूंएक भारत माँ के ही चरणों में नित नित झुकूंढूंढ़ता हूँ जब मगर मैं राष्ट्र जैसी चीज़ कोदेखता हूँ वृक्ष बनता चहुँ और बस विष बीज कोवोट की खातिर जहाँ अपमान मेघा का हुआना किसी नेता की



मासूमीयत

शर्मा जी अभी-अभी रेलवे स्टेशन पर पहुँचे ही थे। शर्मा जी पेशे से मुंबई मे रेलवे मे ही स्टेशन मास्टर थे। गर्मी की छुट्टी चल रही थी इसलिए वह शिमला घूमने जा रहे थे, उनके साथ उनकी धर्मपत्नी मंजू और बेटी प्रतीक्षा भी थी। ट्रेन के आने मे अभी समय था।तभी सामने एक महिला अपने पाँच स



बिहार के टॉपर

बिहार की बोर्ड की परीक्षा के टौपरोंपर मुझे कतई क्रोध नहीं आता । मुझे उनपर तरस आता है और उनसे सुहानुभूति महसूस होतीहै । उन्हें एक ऐसी गलती के लिए जेल तक जाना पड़ा जो लाखों नहीं तो हजारों छात्र पुलिस ,मीडिया प्रशासन की आंखोके सामने करते पाये गये थे ,परीक्षा में नकल और सारे देश ने उसेटी वी पर देखा था



आओ बहस करें - शिशिर मधुकर

बेसुरा बिहार का बैजू बन गया आओ बहस करें व्यापम से फर्जी डाक्टर बन गए आओ बहस करें मेघा को दुत्कार मिल रही आओ बहस करें सामाजिक न्याय की जोत जल रही आओ बहस करेंढेर कूडो के कम ना होते आओ बहस करें स्वच्छ भारत मिशन को ढोते आओ बहस करें अफसर अब भी लूट खा रहे आओ बहस करें ईमानदारी को धता बता रहे आओ बहस करें शि



अफसोस

तब गांधीजी, विरोध में, करते थे अहिंसक आंदोलन और अनशन । आज कांग्रेसी, विरोध में,करते हैं हिंसा और गौमांस भक्षण । कुर्सी के गम में, मारी गयी मत है । कुछ सूझता नहीं ,क्या सही ,क्या गलत है।



फसाद

जरा देखो कहीं कोई फसाद,हुआ हो तो वहाँ जाया जाये । नहीं हुआ हो तो जाकर कराया जाये । राजनीति में निठल्लापन ठीक नहीं । कहीं आग लगा के बुझाया जाये ।



हालपुर्सी

हाल पूंछते हैं ,कि भड़काते हैं ?बाहर ही रहने दो ,जो हालपुर्सी को ,चले आते हैं । कोई मरहम ही इनके पास नहीं ;जख्मों पे नमक छिड़क के ,चले जाते हैं ।



बस एक दाल रोटी का सवाल है

बच्चे से मैं प्रौढ़ हो गया जाना जीवन जंजाल हैइंसानी फितरत में देखा बस एक दाल रोटी का सवाल है कोई भी चैनल खोलो तो बेमतलब के सुर ताल हैंपत्रकारों की भीड़ का भी बस एक दाल रोटी का सवाल है नेता नित देश की सेवा करते देश मगर बदहाल हैइसमें में भी तो आखिर उनकी बस एक दाल रोटी का



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