स्वाति बरूआ : असम की पहली और देश की तीसरी जज जिन्होंने LGBT समुदाय को……

न्यायपालिका प्रजातंत्र के चार स्तम्भों में से एक है। न्यायपालिका ही वो जगह है जहाँ हर किसी को इंसाफ मिलता है और अपने हक़ मिलते है। आज उसी न्यायपालिका में अपने हक़ की लड़ाई हमेशा लड़ती आ रहीं ट्रांसजेंडर स्वाति बरूआ न्याय की कुर्सी पर बैठ के न्याय करेंगी।बता दें कि 26 वर्षीय स्वाति अब असम की पहली और देश



हरियाली

ऐ हरियाली तुझे क्या हुआ क्यों तू उदास है ?क्या तेरा सौभाग्य तेरे पास है ? कभी तू हंसती थी कभी तू मुस्कराती थी कभी तू हवा के झरोखों से हिल डुल के इतराती थी क्या मै कहूं तू मुरझाई है ? की मै कहूँ तू धिक्काई है ,देख न तू मु



बेटियाँ — निवातिया डी. के.

घर आँगन की पहचान होती है बेटियाँहर चेहरे की मुस्कान होती है बेटियाँ राम, कृष्ण भी लेकर आते है अवतारममता का ऐसा भण्डार होती है बेटियाँ !! चंदन की खुशबु सी महकती है बेटियाँबन कोयल सी मधुर कूकती है बेटियाँचहकता है इनसे घर का कोना – कोनाचिड़ियों सी आँगन में झूमती है बेटियाँ



स्वाति सिंह के समर्थकों को बड़ा झटका, भाजपा नहीं लड़ाएगी चुनाव

पति के 'गालीकांड' के बाद मायावती से मोर्चा लेकर सुर्खियों में आईं पत्नी स्वाति सिंह को भाजपा टिकट नहीं देगी। खुद प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्या ने यह दावा किया है।  नई दिल्लीः सोशल मीडिया पर 15 दिन से उछल रहे स्वाति समर्थकों के लिए बुरी खबर है। बेटी के सम्मान में बसपा के खिलाफ लड़ाई छेड़कर सुर्खियों मे



‘‘स्वाति सिंह’’ के ‘‘(दुः)’’ ‘‘साहस’’ की दाद दी जानी चाहिये!

‘‘गिलास आधा खाली हैं या आधा भरा हैं’’, यह भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश के उपाध्यक्ष दयाशंकर द्वारा सुश्री मायावती पर की गई अभद्र, अमर्यादित टिप्पणी व उससे उत्पन्न प्रतिक्रिया व उस पर अगली क्रिया-प्रतिक्रिया पर लगभग सही बैठती हैैं। यह घटना निम्न महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर देश की जम्हूरियत का ध्यान



OMG! इस स्वदेशी वैज्ञानिक ने गाय के गौबर से बना डाला वातानुकूलीत मकान

हरियाणा (रोहतक) : वर्तमान में बन रहे मकान गर्मी में तपते हैं तो सर्दी में सिकुड़ने को मजबूर कर देते हैं। इसके पीछे कारण है कि मकान निर्माण में प्रयोग होने वाला लोहा, सीमेंट और पक्की ईंट ऊष्मा को अंदर आने से नहीं रोक पाते। इस समस्या से निजात पाने के लिए डॉ. शिव दर्शन मलिक ने गाय के गोबर एवं जिप्सम को



“दिखावे की रस्म” …… ( पारिवारिक कहानी )

{{ दिखावे की रस्म }}आज घर में बड़ी चहल पहल थी I और हो भी क्यों न ! घर में मेहमान जो आने वाले थे, वो भी घर की बड़ी बेटी “तनु” को शादी के लिए दिखावे की रस्म अदायगी के लिए I साधारण परिवार में जन्मी तीन बच्चो में सबसे बड़ी बेटी, एक कमरे का मकान जिसमे एक छोटा सा आँगन, पिता एक सामान्य सी नौकरी कर के घर का खर



सीकचे

बहुत अच्छे है वे लोग जो सीकचो में है उनके हाथो और पैरो में बेड़िया है उन्हें पता है वे किस जुर्म की सजा भुगत रहे है .......पर वोजिनके सीकचे दिखाई नहीं देते और न ही दिखाई देती है उनके हाथो और पैरो की बेड़ियाउन्हें नहीं पता की उनकी सजा किस जुर्म की है......ता उम्र यही ढूँढती रहती है और उम्र कट जाती है .



स्वातन्त्र्यं परमं सुखम्

स्वाधीनता में महान सुख है और पराधीनता में किंचित–मात्र भी सुख नहीं I पराधीनता दुखों की खान है I स्वाभिमानी व्यक्ति एक दिन भी परतंत्र रहना पसंद नहीं करता I उसका स्वाभिमान परतंत्रता के बंधन को तोड़ देना चाहता है I पराधीन व्यक्ति को चाहे कितना ही सुख, भोग और ऐश्वर्य प्राप्त हो, वह उसके लिए विष-तुल्य ही



वातावरण प्रदूषण रोकने को उपाए

बिल्लु एक टांगेवाला है। उसका रोजगार का साधन ही टांगा और घोड़ा हैं। रोजाना टांगा स्टैंड पर जाना और सवारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाना। जब अच्छी कमाई हो गई तो अच्छा खाना पीना, मंदी रही तो जेब अनुसार घर का खर्च। एक दिन जब वह घर से निकल रहा था तो उसकी बीवी ने उसे बोला कि आज घर खर्च चलाने ला





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