याद



याद में।

याद में।रात हम आपकी याद में सो न सके।करवटे बदलते हुए रात गुजारी।कई बार इस ठंड में,पसीने से तर-बतर हुआ आपकी याद में। न जाने क्यों ऐसा लगा हम आपके करीब होते।कॉल से आपके करीब आने की कोशिश किया, पर आपने करीब आने न दिया। इतना नाराज़ न हो ए मेरी जिंदगी। वरना छूने से पहले बिखर जाऊंगा।आँसू भी झरते रहे तेरी य



याद

जब याद आते हैं वोतो अक्सर याद आते हैंतुझे तो अब 'अश्विनी' वोपहले से भी बढ़ कर याद आते हैं



याद

तू न होगा तो बहुत याद करूँगा तुझ कोअब याद न आओ रहने दोकाश तुम उस की हक़ीक़त पे नज़र डाल सकोलम्हों को भुलाना खेल नहीं "अश्विनी"मैं ख़ुद भी उन्हें याद आऊँगा......



याद

बुरी याद बन कर हम किसी को सताते है....चलो अच्छा है इसी के बहानेतो हम उन्हें याद आते हैं....-अश्विनी कुमार मिश्रा



तुम्हारी याद

कवितातुम्हारी याद तुम यादों से विस्मृत हो जाओ सम्भव नहीं है ये ,तुम पटल से उतर जाओ स्वीकृत नहीं है ये । न करो याद तुमफ़र्क पड़ता है क्या ?न करो विश्वास तुमसमय रुकता है क्या ?श्वास तो चलते हैंहृदय भी धड़कता है दोनों ही के स्पंदन मेंध्वनि हो या प्रतिध्वनि तुमसे ही होकर आती



आराध्य पिता जी

यह कविता मेरे आराध्य पिता जी को समर्पित:-देखो दिवाली फिर से कुछ, यादें लाने वाली है।पर तेरी यादों से पापा, लगती खाली-खाली है।।याद आता है पापा मुझ को साथ में दीप जलाना।कैसे भूलूँ पापा मैं वो, फुलझड़ियां साथ छुटाना।।दीपावली में पापा आप, पटाखे खूब लाते थे।सबको देते बांट पिता जी, हम सब खूब दगाते थे।।तेरे



सफर यादों का

तेरा धरती से यूँ जाना, मेरा धरती में रह जाना ।अखरता है मुझे हर पल, तेरा मुझसे बिछुड़ जाना ।मेरी साँसों में तेरा नाम, मेरी धड़कन में तेरा नाम ।मेरे ख्वाबों में तू ही तू,



तेरी यादों के साये में

तेरी यादों के साये में, मेरा जीवन गुजर जाये।मेरी तन्हाईयों मुझको तेरा साथ मिल जाये।।1।।मैं पलकें बंद करता हूँ, तेरा दीदार होते हैं।मैं पलकें खोलता हूँ , तो ते



उपेक्षा

वक्त की पुरानी अलमीरा से एक याद.. वक्त आने जाने का नाम है लेकिन आप अपने काम से वक्त के हिस्से से कुछ यादें संभाल कर रखते हैं। यही यादें हैं जो आपको बदलाव का आइना दिखाती है। कमरें के कोने से लेकर छत की धूप तक ले जाता था यह काम। खैर काम तो सर्द दर्द है। यही काम ही तो नहीं हो पा रहा था। काम का रोना ही



गुरुपूर्णिमा विशेष

*जय श्रीमन्नारायण* *श्रीमते गुरुचरण कमलेभ्यो नमः*💐🌺💐🌺💐🌺💐🌺 *गुरुपूर्णिमा विशेष* *भाग ५*🦚🌳🦚🌳🦚🌳🦚🌳 *किमत्र बहुनोक्तेन शास्त्रकोटि शतेन च । दुर्लभा चित्त विश्रान्तिः विना गुरुकृपां परम् ॥*अर्थात :-बहुत कहने से क्या ? करोडों शास्त्रों से भी क्या ? चित्त की परम् शांति, गुरु के बिना



और गांव की याद आई

एक रोग सारी दुनिया कीदिखलाता है सच्चाई।जिन शहरों को अपना मानाउनमें ही ठोकर खाई।ऐसे उसने पैर पसारेकाम-धाम सब बंद हुएलोगों ने तेवर दिखलाएरिश्ते सारे मंद हुए।और गांव के कच्चे घर कीहूक हृदय में लहराई।जिन शहरों को अपना मानाउनमें ही ठोकर खाई।प्रेम फला-फूला करता थागाँव गली-घर-आँ



सुरक्षा कवच

बचपन में खेलते, दौड़ते ठोकर लग कर गिर जाने पर भैया का मुझे हाथ पकड़ कर उठाना,भीड़ भरे रास्तों पर, फूल-सा सहेज कर अँगुली पकड़ स्कूल तक ले जाना,और आधी छुट्टी में माँ का दिया खानामिल-बाँट कर खाना, याद आता है। बहुत-बहुत याद आता है। सर्कस और सिनेमा देखते समय हँसना - खिलखिलाना,बे-बात रूठना-मनाना,फिर देर रात त



बचपन

साथ घूमते थे नंगे पांव दूर तक बाग में खेत मेंऔर सड़क परकभी नहर के किनारेपूरे एक-एक प्रहर तकनहाते थे डुबकियां लगातेधूल फेंकते दोस्तों परगम ना था फिक्र न थीमां से पिटने कीन था पिता से डांट खाने का डरमगर फिर भी एक भय व्याप्त थाबड़े भाई केहाँथ उठ जाने परगम न था फिक्र न थीसूखी रोटी भीभर पेट खाते थेकभी अपन



Sketches from Life: बॉल पॉइंट पेन

बॉल पॉइंट पेन बैंक में प्रमोशन मिली तो उसके बाद दो साल के लिए किसी गाँव में जा कर नौकरी करनी जरूरी थी. चिट्ठी ले कर दिल्ली से पहुंचे मेरठ रीजनल ऑफिस. बॉस से मुलाकात हुई, - दिल्ली के नज़दीक ब्रांच दे रहा हूँ क्यूंकि दिल्ली वालों की नाक दिल्ली की तरफ ही रहती है. दिल्ली मत भ



आइये कुछ बदलें -2

मित्रों , मैंने पहले एक लेख में बदलाव के कुछ सरल विषय लिखे थे जिनमें हमारे समाज को बदलने की आवश्यकता है. फिर मैंने ट्रैफिक के केवल तीन बिंदुओं पर आप सब का ध्यान आकर्षित किया था-फालतू हॉर्न बजाना; वाहन ठीक से पार्क करना एवं द



विजयादशमी और अपराजिता देवी

विजयादशमी और अपराजिता देवीचितिरूपेण या कृत्स्नमेतद्व्याप्य स्थिता जगत् ।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥ॐसर्वविजयेश्वरी विद्महे शक्तिः धीमहि अपराजितायै प्रचोदयातआज तक समस्त हिन्दू समाज माँ भगवती के नौ रूपों – शैलपुत्री,ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कन्दमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महा



राजपाल यादव ने बिग बॉस में शामिल होने की अफवाहों का खंडन किया | आई डब्लयू एम बज

कलर्स टीवी का लोकप्रिय रियलिटी शो बिग बॉस सीजन 13 के साथ वापसी करने के लिए बिल्कुल तैयार है। इस बार होस्ट सलमान खान को चैनल द्वारा जारी किए गए प्रोमो में एक स्टेशन मास्टर अवतार में देखा गया था। मेकर्स बिग बॉस 13 को स्पाइसीयर और पेसियर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ लोकप्र



मैं ही सही हूँ, सबसे बड़ा भ्रम

मैं ही सही हूँ, सबसे बड़ा भ्रम : I'm right, The biggest fallacyमैं ही सही हूँ ""तस्वीरें दीवारों से ही नहीं, दिल से भी उतर जाती हैं उनकी , जिन्हें अपने पर खुदा होने का गुरुर होता है। बस जाती हैं यादें दिलों में उनकी , जिन्होंने दिलों को फ़तेह किया होता है। न रहता है ता



करीना कपूर को कुछ नहीं कहा बैकलेस होने पर और जब मैं योगा करते वक्त बैकलेस हुई तो मुझे उसी के लिए ट्रोल किया गया:अबिगेल पांडे | आई डब्लयू एम बज

सुंदर और टैलेंटेड टीवी अभिनेत्री अबिगेल पांडे, जिन्हें आखरी बार कलर्स के शो शक्ति अस्तित्व के एहसास की में कैमियो किरदार में देखा गया था उन्हें योगा में काफी रुचि है।“मैं पिछले चार वर्षों से व्यायाम के इस पारंपरिक भारतीय रूप का अनुसरण कर रही हूं। मैंने पहली बार वजन कम करन



Sketches from Life: राष्ट्रीयकृत बैंक की नौकरी की

बैंकों का राष्ट्रीयकरण 19 जुलाई 1969 को हुआ जो उस वक़्त की एक धमाकेदार खबर थी. बैंक धन्ना सेठों के थे और सेठ लोग राजनैतिक पार्टियों को चंदा देते थे. अब भी देते हैं. ऐसी स्थिति में सरमायेदारों से पंगा लेना आसान नहीं था. फिर भी तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गाँधी ने साहसी कद



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