यादें



वो यादें बचपन की

कितने खेले खेल बचपन में , याद आएंगे वो उम्र पचपन में। गिल्ली डंडा, लट्टू को घुमाना, गिलहरी में फिर साथी को सताना। खो खो बड़ा पसन्दीदा लगता, अंटी तो माँ को ही अच्छा न लगता। जमा करते बड़े भैया जब अंटी, माँ डाँट कर घर से बाहर फेंक देती। सांप सीडी में साँप से काटे जाते, लूडो में तो हम कभी न हारते। गुड़िया



यादें

"बहुत खूबसूरत होती है ये यादों की दुनियाँ , हमारे बीते हुये कल के छोटे छोटे टुकड़े हमारी यादों में हमेशा महफूज रहते हैं,



वो यादें..................

कागज़ की कश्ती बनाके समंदर में उतारा था हमने भी कभी ज़िंदगी बादशाहों सा गुजारा था,बर्तन में पानी रख के ,बैठ घंटों उसे निहारा था फ़लक के चाँद को जब



यादों के पन्ने से…..

यादों के पन्ने से…..हर शाम….नई सुबह का इंतेजारहर सुबह….वो ममता का दुलारना ख्वाहिश,ना आरज़ूना किसी आस पेज़िंदगी गुजरती थी…हर बात….पे वो जिद्द अपनीमिलने की….वो उम्मीद अपनीथा वक़्त हमारी मुठ्ठी मेमर्ज़ी के बादशाह थे हमथें लड़ते भी,थें रूठते भीफिर भी बे-गुनाह थें हमवो सादगी क



बरसों बाद लौटें हम...

बरसों बाद लौटें हम,जब उस,खंडहर से बिराने मे…जहाँ मीली थी बेसुमार,खुशियाँ,हमें किसी जमाने मे…कभी रौनके छाई थी जहाँ,आज वो बदल सा गया है…जो कभी खिला-खिला सा था,आज वो ढल सा गया है…लगे बरसों से किसी के,आने का उसे इंतेजार हो…न जाने कब से वो किसी,से मिलने को बेकरार हो…अकेला सा प



धुप

दौड़ भागकर सारा दिन थकी उचक्की धुपआँगन में आ पसर गई कच्ची पक्की धुप सारा दिन ना काम किया रही बजती झांझ लेने दिन भर का हिसाब आती होगी साँझ याद दिलाया तो रह गई हक्की-बक्की धुपआँगन में आ, पसर गई कच्ची पक्की धुप अम्मा ले के आ गई पापड़, बड़ी, अचार ले ना आये खिचड़ी, समझ के



रद्दी में फेंकी यादों को

रद्दी में फेंकी यादों को✒️रद्दी में फेंकी यादों को कुछ, छिपा-छिपा कर लाया हूँ।शालीन घटा की छावोंदो पल सोने को जीतासाँसों की धुंध नहानेबेसब्र, समय को सीता;रेशम करधन ललचाकरस्वप्निल आँखें ये झाँकेंछुपकर जूड़ों से बालीकी चमक दिखे जब काँधें।घाटों पर घुट घुट रहा नित्य पर मंजिल नहीं बनाया हूँ,रद्दी में फेंक



कुछ साल पहले दोस्तों यह बात हुई थी (Kuch Saal Pehle Doston Yeh Baat Hui Thi )- यादें

Lyrics of Kuch Saal Pehle Doston Yeh Baat Hui Thi song from Yaadein is an amazing composition of musician Anu Malik. Read Kuch Saal Pehle Doston Yeh Baat Hui Thi Lyrics which are well written by Anand Bakshiयादें (Yaadein )कुछ साल पहले दोस्तों यह बात हुई थी (Kuch Saal Pehle Doston Yeh Baat Hui Thi



ए दिल दिल की दुनिया में (Aye Dil Dil Ki Duniya Mein )- यादें

आये दिल दिल की डुनिया मीन गीत से गीत गीत स्नेहा पंत और के के द्वारा गाया जाता है, इसका संगीत अनु मलिक द्वारा रचित है और गीत आनंद बक्षी द्वारा लिखे गए हैं।यादें (Yaadein )ए दिल दिल की दुनिया में (Aye Dil Dil Ki Duniya Mein ) की लिरिक्स (Lyrics Of Aye Dil Dil Ki Duniya Mein )ए दिल दिल की दुनिया में



यादें (Yaadein )

'Yaadein' 2001 की एक हिंदी फिल्म है जिसमें जैकी श्रॉफ, रती अग्निहोत्री, ऋतिक रोशन, करीना कपूर, सुप्रिया कर्णिक, अमृष पुरी, किरण राठोड, अवनी वासा, हिमानी रावत, अनांग देसाई, मदन जोशी, सुहास खंडके, डॉली बिंद्रा, सुभाष मुख्य भूमिका में घई, राजेन कपूर, राहुल सिंह, गर्गी पटेल, सुमन दत्ता, जेनिफर कोटवाल, क



सन्तु जीजी -२

कल की सोलह साल की दुल्हन आज बीस बरस की विधवा हो चुकी थी ।एक औरत का विधवा होना ही एक बहुत बडा अभिशाप माना जाता हैं और पश्चिमी राजस्थान में त



सन्तु जीजी

पापा की सरकारी नोकरी के कारण पापा का दो- चार साल में तबादला होता रहता था इसलिए हमें भी उनके साथ नयी - नयी जगहो पर जाना पडता था।इस बार हम सन्तु जीजी के मोहल्ले में थे ।एक आवाज घर केपीछे वाले घर में बार- बार गुँजती थी 'सन



मन्जुला

बारिश की पहली फुहार के साथ ही अपने बचपन की खट्टी-मिठी यादे ताजा हो गई। बचपन के वो झूले, वोनीम का पेड ,वो जानी -पहचानी गलियाँ और वो गुड्डे- गुडियो का खेल।मेरे लिए मानो ये कल की ही बात हो।इतनी ज



कुमुद -एक अधूरी कहानी

मेरी बहुत ही अच्छी सहेली थी कुमुद। हम दोनो नवीं कक्षा में साथ ही पढा करती थी। वो एक पास के गाँव से पढने के लिएआया करती थी। हँसती, खेलती एक जिन्दादिल लडकी थी कुमुद।डर और झिझक तो उसमे थी ही नही।



बचपन की स्मृतियों

मामूली हैं मगर बहुत खास है...बचपन से जुड़ी वे यादेंवो छिप छिप कर फिल्मों के पोस्टर देखनामगर मोहल्ले के किसी भी बड़े को देखते ही भाग निकलनासिनेमा के टिकट बेचने वालों का वह कोलाहलऔर कड़ी मशक्कत से हासिल टिकट लेकरकिसी विजेता की तरह पहली पंक्ति में बैठ कर फिल्में देखनाबचपन की भीषण गर्मियों में शाम होने



" नोटबंदी जयंती "

....वो पुरानी यादें .... ??? Er Bairwa N R - वर्ष 2016 की विदाई ....



रे दरपन .....

रे दरपनरे दरपन, तू फिर इतना उदास क्यों है,ऋतु बदली है, पगले निराश क्यों है,फिर पुरवाई महकी बासंती आ गई ,फिर थकी –थकी सी यह सांस क्यों है,चेहरे पर गुलाबी गंध महकी-महकी है,मयूर संग आम्रपाली फिर प्यास क्यों है ,झुरमुट मालती के , रात-रानी संग,अश्क यह मुरझाया सा पलास क्यों ह



भूल सा चुका था मैं

भूल सा चुका था मैं, न गया था मैं मुड़कर उन्हे देखने..किताबों में दबी उन सूखी सी पत्तियों को...वर्जनाओं की झूठी सी परत में दबी उन बंदिशों को,समय की धूल खा चुकी मृत ख्वाहिशों को,क्षण भर को मन में हूक उठाती अभिलाषाओं को.....वो ख़्वाब, उम्मीद, तमन्नाएँ, ताल्लुक, रिश्ते, सपने,भूल सा चुका था मैं, न गया था



"यादें, आज मित्र दिन है

"यादें"आज मित्र दिन है, यादों की फहरिस्त चलचित्र बन प्रतिपल सामने आ जा रही है। झलकियाँ झकझोर रहीं हैंबचपन के घरौंदे, कंचे और गुल्लियां उछल रही हैं। हर मोड़ पर मिले मित्रों के मुलायम हाथ खूब सहला रहें हैं, मानों बिना मौसम की बहार आ गई है सब अपने अपने हवाओं के साथ उड़ रहें है



साक्षात्कार - सुपरफैन सुप्रतिम साहा

नागपुर में रह रहे सुप्रतिम साहा का नाम भारतीय कॉमिक्स प्रेमियों के लिए नया नहीं है। सुप्रतिम भारत के बड़े कॉमिक्स कलेक्टर्स में से एक हैं, जो अपने शौक के लिए जगह-जगह घूम चुके हैं। कहना अतिश्योक्ति नहीं, ऐसे सूपरफैंस की वजह से ही भारतीय कॉमिक्स उद्योग अभी तक चल रहा है। पहले कुछ कॉमिक कम्युनिटीज़ में इन



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