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शब्द नगरी पर मित्र कैसे बनाए जा सकते हैं?

Seema   |   19 अप्रैल 2018

Resume kya h ye kitne prkar k hote h

हिंदी में बनाये गए इस पोर्टल का हिंदी प्रेमियों के जगत में किया जा रहा प्रयास सराहनीय है .

कविता, स्वास्थय आदि वर्टिकलों के साथ साथ इस समय के समसामयिक विषयों में आध्यात्म और योग को भी यदि शामिल किया जाये तो पाठकों की संख्या कही अधिक हो सकती है . धन्यवाद


प्रियंवदा

Pramod Thite
हाँ क्योकिं योग साधना है।

अगर हम भारत के आज के आर्थिक माहौल का अवलोकन करे तो हम यह कह सकते हैं .. अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए "विमुद्रिकरण" सभी तीन चरणों (विमुद्रिकरण डिजिटल लेनदेन जीएसटी) का पहला कदम था। बिना जीएसटी ओर डिजिटल लेनदेनों के विमुद्रिकरण किसी प्रकार से अर्थव्यवस्था में योगदान नही कर सकता था। हाँ ! हम कह सकते हैं कि विमुद्रिकरण बहुत सफल नहीं था लेकिन यह अभी भी अप्रत्यक्ष अर्थ में अर्थव्यवस्था की मदद कर रहा है विमुद्रिकरण सिर्फ लोगों को कर परिदृश्य में लाने का एक तरीका था। हमने देखा है कि विमुद्रिकरण के बाद सरकार ने एक सीमा के बाद नकद लेनदेन पर प्रतिबंध लगा दिया है और अब व्यवसायिक या साधारण व्यक्तियों को लेन-देन के हर स्तर पर डिजिटल लेनदेन के प्रयोग के लिए उत्साहित कर रही है, अब आपके सभी लेनदेन पर सरकार की नजर है। कुल मिलाकर हम यह कह सकते हैं कि विमुद्रिकरण हमारी अर्थव्यवस्था की मदद नहीं कर सकता यदि जीएसटी और डिजिटल लेनदेन विमुद्रिकरण के तुरंत बाद लागू नही किये गए होते। विमुद्रिकरण के बारे में रिज़र्वें बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने भी असंतोष व्यक्त किया कहा कि विमुद्रिकरण बिना तैयारी ओर बिना सोचे समझे लागू किया गया था जिसके कम समय मे परिणाम भारतीय अर्थव्यवस्था में देखने को मिल चुके है जैसेकि: बेरोजगारी दर का बढ़ना, लघु इकाइयों के पूरी तरह से बंद हो जाना, देश के आर्थिक विकास की दर में कामी आना, रही बात दीर्घगामी परिणामो के जो भविष्य में देखने को मिलेंगे। आशा है लेख आपने समझा होगा।

ms   |   26 फरवरी 2018

आज के समाज में लाज नाम का कोई महत्व नहीं

pravesh vaishnav
नहीं

कोई अच्छा सा व्यापार बताओ

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pravesh vaishnav
राजनिति

उत्पीड़न क्या है? इस पर हमारी सोच बस कुछ विशेष मुद्दो तक ही सीमित है जैसे पुरुषद दुवारा नारी का उत्पीडन सास तथा स सुरालियों दुवारा बहू का उतपीड़न ।ऐसे मे हमारे देश में महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कई कानून बने है।हमारे देश मै महिलाओं की दशा काफी सुधार हुआ है।लैकिन इन कानूनो की वजह से कई बार बहुत सारे निर्दोष लोगों को उत्पीड़न सहना पड़ता है।ऐसा भी देखा गया हैै कि कोई महिला शिकायत दर्ज कराती है कि दहेज के लिए पृताड़ित किया जा रहा है तो उसकी शिकायत के आधार पर पूरे परिवार को हवालात की हवा खानी पड़ती हैै।ऐसे मे उस परिवार के युवाओं का कैरियर ही समाप्त हो जाता है ओर वरिष्ठ नागरिकों को अपमान सहना पड़ता है।ऐसे मे पश्न यह उठता है कि महिलाओं द्ा रा पुरुष के उत्पीड़न को तथा बहुओं द्ारा ससुरालिओं के उत्पीड़न को कैसे रोका जाए।

नमस्कार मित्रों

मैं जानना चाहता हूं की अंग्रेजो ने सच में आजादी दी है । या सिर्फ हमें धोखा दिया गया है । क्योंकि आज जो भी हमारा कानून है वह सब अंग्रेजों का बनाया हुआ है भारत सरकार में हू बहू उसी को अपना कानून बना दिया है । आज भी ब्रिटेन पार्लियामेंट के द्वारा भारत सरकार को नियंत्रण किया जा रहा है । जो भी संसोधन या कानून में बदलाव होता है वह ब्रिटेन की सांसद के द्वारा हस्ताक्षर किया जाता है ।


👉मित्रों 1800 ई मैं एक east india company व्यापार करने के लिए आई थी और देश को गुलाम बना लिया । और आज हजारों विदेशी कंपनी भारत को बर्बाद करने में लगे हुई है ।

👉आपका क्या विचार है स्पष्ट रुप से लिखे । और किस तरह सुधारा जा सकता है