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प्रश्नों पर प्रतिक्रिया दीजिये

शब्द बनाओ मत कोई पर्वत कभी विकराल शब्दों का न ही व्यवहार में खोदो कि गहरा ताल शब्दों का ।1। हमेशा ध्यान ये रखना हो निश्छल बात ही केवल निगल पाए न रिश्तों को कुटिल इक जाल शब्दों का।2। चयन संदर्भगत हो तो तना रहता है हर हालत नहीं तो झुक ही जाता है हमेशा भाल शब्दों का।3। सहेजो पर चलन में भी हमेशा उनको रखो तुम महज कोषों में अच्छा तो न होगा हाल शब्दों का।4। जो भागा करते थे अब तक निडर वो हो नहीं पाए समझ बचपन में पुस्तक को बड़ा जंजाल शब्दों का।5। जिसे भी चाहिए जैसा कि चुनकर वैसा ले जाए लगा मेला दुखी पीड़ित जवाँ खुशहाल शब्दों का।6। कभी खामोशियाँ भी यूँ मचल के बोल देती हैं तभी दिखता है बौनापन सहज वाचाल शब्दों का।7। सँभल कर संत कहते हैं चलाना बीच रिश्तों के कभी खुद को ही काटे है दुधारी फाल शब्दों का।8। उदासी या चुभन देखे तो है दुत्कार देती नित भरा हो प्यार तो चूमे सनम झट गाल शब्दों का।9। कभी चमके फलक पे तो कभी माटी में मिल जाते बदल जाता है हम जैसा मुसाफिर काल शब्दों का।10। © लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

अगर हनुमान जी ब्रह्मचारी थे तो उन्होंने आज के ब्रह्मचारियों की तरह श्रीराम को क्यों नहीं कहा प्रभु कोई और मिल जाएगी | छोड़ो ये प्यार व्यार का चक्कर क्यों रावण से पन्गा लेना | लेकिन हनुमान ने दो प्रेमियों को मिलाने का काम किया | मुझे लगता है हनुमान ब्रह्मचारी और लव गुरु थे उन्होंने दो प्यार करने वालो को मिलाया | उन्होंने विप्पति में श्रीराम और माँ सीता को धीर बंधाया और विश्वास दिलाया | आप जरूर मिलोगे |

सचिन_महराज
मृत्यु इस वजह से हुई क्योंकि उन्होंने मानव अवतार लिया था...........

आज इस एप से जुड़कर बहुत ही गर्व महसूस क्र रहा हूँ..... मुझे गर्व हैं क़ि हमारे देश के लोग भी इस तरीके के एप तैयार कर रहे हैं......... बधाई इस आप के निर्माता को...💐💐💐 और कोशिश रहेगी ज्यादा से ज्यादा लोगो को जोड़ने की पुनः बधाई...🙏🙏🙏

(1) काव्य विधाओं के बारे में विस्तार से बताइए| कहीं तो कविता को ही विधा कहा जाता है और कहीं कविता के प्रकारों को, जैसे मुक्तक, दोहा, गीत, नवगीत, छंद इत्यादि| इस प्रकार से क्या विभिन्न प्रकार के छंद अलग-अलग विधा माने जाते हैं जैसे, दोहा, चौपाई, सवैया, गीतिका, हरिगीतिका इत्यादि | इसके अतिरिक्त "छंद" यदि विधा है तो इसके अंतर्गत क्या-क्या आता है क्योंकि इस प्रकार की सभी शिल्पबद्ध कविताएं छंद की श्रेणी में ही आती हैं|

(2) घनाक्षरी छंद की विधा को क्या कहेंगे - कविता, छंद या घनाक्षरी अथवा स्वतंत्र रूप से मनहरण घनाक्षरी, रूप घनाक्षरी, देव घनाक्षरी इत्यादि?

सादर.....

मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा है की शब्दनगरी पर हलचल काफी कम हो गयी है l क्या यह सत्य है ?

पूनम शर्मा
तो  हम  सब  मिलके  शुरू  कर  सकते  है  

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राहुल चौरसिया
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