!



‘‘पर्रिकर’’ ‘‘वाद’’ को ढूँढता मेरा देश। ‘व’’ ‘‘गांधीवाद’’ से चलकर ‘‘पर्रिकरवाद’’ तक पहुंचने का सुखद अहसास!

देश के प्रथम आई.आईटी शिक्षा प्राप्त (गोवा के) मुख्यमंत्री एवं पूर्व रक्षामंत्री डॉ. मनोहर गोपाल कृष्ण प्रभु पर्रिकर लम्बी बीमारी से अदम्य आत्मबल के साथ लड़ते हुये अब इस दुनिया में नहीं रहे और ‘‘स्वर्गवासी’’ हो गये। याद कीजिये! विधानसभा में बजट प्रस्तुत करते समय उनका वह चेहरा, जो चिकित्सकीय उप



सब कुछ लागे नया-नया

सब कुछ लागे नया-नया ।दे-दो जो देना चाहते हो नये साल मे,यह नया साल हर ठंडी मे ही आता हैं।भारतीय रीत रिवाज मे नया साल हम तब मनाते हैं जब हमारे देश का किसान व जवान दोनों खुश होते हैं। गाँव के खुले मैदान व खेतो मे बहन बेटियों की शादियाँ हो रही होती हैं। पेड़ों की छाव मे बिस्तर लगे होते हैं। कुआँ का ठंडा



दीवाली की शुभकामनाएं !

सारादेश विदेश पावन दीवाली पर राममय है। इसी ६नवमबर ,१८ को अयोध्या में दीवाली परदीपोत्सव गिनीज बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ।अयोध्या में देश-विदेश से आये मेहमानों के रामसमर्पित भाव को देख ह्रदय में राम नाम की धुन बज उठी। त्रेता युग के राम से मिलने कीलालसा और तीव्र हो उठी। अयोध



संस्कृत हिंदी और विज्ञान

संस्कृत, हिंदी और विज्ञान स्वामी विवेकानन्दके अनुसार – दुनियाभर के वैज्ञानिक अपने नूतन परीक्षणों से जो परिणाम प्राप्त कररहे हैं, उनमें से अधिकांशहमारे ग्रंथों मे समाहित हैं। हमारी परम्परायें विकसित विज्ञान का पर्याय हैं ।हमारे ग्रंथ मूलत: संस्कृत भाषा में लिखे गये हैं ।



सर्वोच्च निर्णय! कोई सर्वोच्च नहीं!

माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्णय के विरूद्ध दिल्ली सरकार की अपील पर माननीय उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देकर जो व्यवस्था की, उसका घोषित प्रभाव यह हुआ कि संवैधानिक रूप से दिल्ली में न तो मुख्यमंत्री ही और न ही उपराज्यपाल सर्वोच्च है। उच्चतम न्यायालय ने चुनी हुई सरकार के महत्व को स्थाप



न भाई ! शादी न लड्डू

''शादी करके फंस गया यार , अच्छा खासा था कुंवारा .'' भले ही इस गाने को सुनकर हंसी आये किन्तु ये पंक्तियाँ आदमी की उस व्यथा का चित्रण करने को पर्याप्त हैं जो उसे शादी के बाद मिलती है .आज तक सभी शादी के बाद नारी के ही दुखों का रोना रोते आये हैं किन्तु क्या कभी गौर किया उस विपदा का जो आदमी के गले



हिंदी - एक अंतरराष्ट्रीय भाषा

<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedContent> <w:AlwaysShowPlaceh



तुम्हारे लिए !

वह सन्नाटाजो तुम्हारे दिल में नदी की तरह बहता हैउसके पानी से मैं हर दिनअपने एहसासों का घड़ा भरती हूँउस पानी की छुवन सेमिट्टी से एहसास नम होते हैंऔर तेरे चेहरे की सोंधी खुशबूउस घड़े से आती है ...दूर दूर तक खाली तैरतीतुम्हारी पुतलियों कोअक्सर मैंने छुआ है यह सोचकरकि कुछ ना सहीमेरे स्पर्श की लोरी तो तु



कत्तई नहीं ! :)

(आस पास कई लोग ऐसे भी मिल जाते हैं - )न तुम तबतब के थेन तुम आजआज के होतुम वह राजा भी नहीं होजिसके सिर पर सिंग थातुम तो बिना सिंग केसिंग होने की बात करते होऔर सोचते हो -कोई तुम्हारे सिंग की चर्चा कर रहा है ...:)दरअसल तुम एक पागल होजो कभी कपड़े में होता हैतो कभी नंगा ...ऐसे



अद्भुत शिक्षा !

सब पूछते हैं-आपका शुभ नाम?शिक्षा? क्या लिखती हैं?हमने सोचा - आप स्नातक की छात्रा हैंमैं उत्तर देती तो हूँ,परन्तु ज्ञात नहीं,वे मस्तिष्क के किस कोने से उभरते हैं!मैं?मैं वह तो हूँ ही नहीं।मैं तो बहुत पहलेअपने तथाकथित पति द्वारा मार दी गई फिर भी,मेरी भटकती रूह ने तीन जीवन स



मैं उदाहरण होना नहीं चाहती !

मैं उदाहरण न थी न हूँ ...होना भी नहीं चाहती ! उदाहरण बनने की चाह में कई बार मरी हूँ ! कभी उंचाई से गिरी कभी अग्नि के बीच जली कभी विश्वास के चक्रव्यूह में घुट घुट कर अर्धजीवित रही .... उदाहरण होने के लिए सिर्फ देना होता है सामनेवाला कितना भी दुखद मज़ाक करे मुस्कुराना होता है एक मज़ाक अपनी तरफ से किया



पाप मानो या नियति !!!

किसी के लिए कुछ करना आसान नहीं तुम्हें बढ़ना ही होगा आगे हर हाल में !!!दुर्घटना,मृत्यु,गरीबी-अमीरी … रोते हुए उपहास करते हुए आलोचना करते हुए घृणा से देखते हुए अंततः तुम्हें बढ़ ही जाना होगा क्योंकि तुम्हारे साथ जो घटना-दुर्घटना है उसे भी तो तुम्हें ही जीना है उनकी व्यवस्था भी तो करनी है … तुम कर्म से



पुष्टि असम्भव है !!

न विश्वास मिटता है, न अविश्वास की जड़ें खत्म होती हैं - एक ही व्यक्ति के कई रूप होते हैं, सौंदर्य के पीछे कुरूपता, कुरूपता के पीछे सौंदर्य मिल ही जाता है - पर, न हर सौंदर्य कुरूप है न हर कुरूप सुन्दर है शरीर से असमर्थ भी कुशल कारीगर होता है तो कहीं शरीर



क्यूँ मुझे होड़ में खड़ा करना

कभी कुछ कभी कुछ सवालों का चक्रव्यूह आखिर क्यूँ ? मेरी होड़ तो न ज़िन्दगी से है न मौत से फिर क्यूँ मुझे होड़ में खड़ा करना ! मेरी खुद्दारी किसी मंशा को सफलीभूत होने नहीं देगी !! मत बनाओ झूठ की लम्बी चादर नींद उसे बनाते हुए भी उड़ेगी बन जाने के बाद मेरा और



माफ़ कीजियेगा….. कुछ भी लिखता हूँ !!

माफ़ कीजियेगा….. कुछ भी लिखता हूँ !! एक दिन राह चलते मुलाक़ात हुई एक नेताजी से मैंने पूछा,ये बदनामी का ताज तुहारे हिस्से क्यों है, प्रसन्न मुद्रा से बोला जिसे तुम बदनामी कहते हो इससे मैं अपनी सात पुश्तो का इंतजाम करता हूँ !! माफ़ कीजियेगा….. कुछ भी लिखता हूँ



खग! उड़ते रहना जीवन भर!

भूल गया है तू अपना पथ,और नहीं पंखों में भी गति,किंतु लौटना पीछे पथ पर अरे, मौत से भी है बदतर।खग! उड़ते रहना जीवन भर!मत डर प्रलय झकोरों से तू,बढ आशा हलकोरों से तू,क्षण में यह अरि-दल मिट जायेगा तेरे पंखों से पिस कर।खग! उड़ते रहना जीवन भर!यदि तू लौट पड़ेगा थक कर,अंधड़ काल बवंडर से डर,प्यार तुझे करने वाले ह



आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x