मौलिक

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विश्व मानवाधिकार दिवस (10 दिसम्बर)

विश्व मानव अधिकार दिवस (10 दिसम्बर) भगवान ने इंसान को इंसान बनाते समय कोई फर्क नहीं रखा लेकिन इंसान ने खुद अपने लिए कई सीमाएं, बाधाएं और वर्ग बना लिए । नतीजन आज विश्व में इंसानियत के बीच एक बहुत बड़ी दरा



क्रासिंग की परिचित बाला !

नीर भरे नयनों का प्याला, रुधी ज़बान, पैरों में छाला,अपलक देख रही क्रासिंग पे,कोई सेठ, कोई ठेठ, कोई बनता हुआ दिवाला,क्या आज मिल सकेगा मुझे पेट भर निवाला?एक आम आदमी का आम सच, सोच रही,सुस्त सी, कुछ पस्त सी, सिसकी लिए सकुचा रही,इक दबी आवाज़ में, अपनी दुआ का मोल मांग रही....अनायास पड़ी जो दृष्टि मेरी, उस भा





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