लेख



भारत में “मी टू” आंदोलन की प्रासंगिकता

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अब महिला सम्मान को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए ।

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खेसारी लाल यादव का यह गाना हुआ हिट | Khesari Lal Yadav New Song Hit | Ghat Ye Raja

खेसारी लाल यादव का यह गाना हो गया हिट | Khesari Lal Yadav New Song Hit | Ghat Ye Rajaभोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार खेसारी लाल यादव का एक और सुपरहिट गाना.....khesari videokhesari lalkhesaribhojpuri



दिल तो बच्चा है जी

ज़िंदगी हर पल एक चलचित्र की तरह अपना रंग रूप बदलती रहती है।है न , जैसे चलचित्र में एक पल सुख का होता है तो दुसरा पल दुःख का ,फिर अगले ही पल कुछ ऐसा जो हमे अचम्भित कर जाता है और एक पल के लिए हम सोचने पर मजबूर हो जाते है कि "क्या



" बृद्धाआश्रम "बनाम "सेकेण्ड इनिंग होम "

" बृद्धाआश्रम "ये शब्द सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते है। कितना डरावना है ये शब्द और कितनी डरावनी है इस घर यानि "आश्रम" की कल्पना। अपनी भागती दौड़ती ज़िन्दगी में दो पल ढहरे और सोचे, आप भी 60 -65 साल के हो चुके है ,अपनी नौकरी और घर की ज़िम्मेदारियों से आज़ाद हो चुके है। आप के



हमारी प्यारी बेटियाँ

"बेटियाँ "कहते है बेटियाँ लक्ष्मी का रूप होती है ,घर की रौनक होती है। ये बात सतप्रतिस्त सही है। इसमें कोई दो मत नहीं हो सकता कि बेटियाँ ही इस संसार का मूल स्त



नूतन बनाम पुरातन

नूतन को पुरातन से हमेशा शिकायत रही है, आज भी है। इसके बावजूद कि पुरातन से ही नूतन का उद्भव हुआ है। मजेदार बात यह है कि नूतन को यह बात पता है, इसके बावजूद भी..। बात अगर केवल शिकायत तक सीमित रहती तो भी ठीक था, बात अब दोषारोपण तक पहुंच चुकी है। दोषारोपण इसलिए क्योंक



प्रकृति और इंसान

नदी,सागर ,झील या झरने ये सारे जल के स्त्रोत है. यही हमारे जीवन के आधार भी है. ये सब जानते और मानते भी है कि " जल ही जीवन है." जीवन से हमारा तातपर्य सिर्फ मानव जीवन से नहीं है. जीवन अर्थात " प्रकृति " अगर प्रकृति है तो हम है .लेकिन सोचने वाली बात है कि क्या हम है



टूटते - बिखरते रिश्ते

आज कल के दौड के टूटते बिखरते रिश्तो को देख दिल बहुत वय्थित हो जाता है और सोचने पे मज़बूर हो जाता है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है?आखिर क्या थी पहले के रिश्तो की खुबिया और क्या है आज के टूटते बिखरते रिश्तो की वज़ह ? आज के इस व्यवसायिकता के दौड में रिश्ते



सवा लाख से एक लड़ावाँ ताँ गोविंद सिंह नाम धरावाँ

सवा लाख से एक लड़ावाँ ताँ गोविंद सिंह नाम धरावाँ "चिड़ियाँ नाल मैं बाज लड़ावाँ गिदरां नुं मैं शेर बनावाँ सवा लाख से एक लड़ावाँ ताँ गोविंद सिंह नाम धरावाँ" सिखों के दसवें गुरु श्री गोविंद सिंह द्वारा 17 वीं शताब्दी में कहे गए ये शब्द आज भी सुनने या पढ़ने वाले की आत्मा को



आखिर क्यों हम अपने बच्चों को नहीं बचा पा रहे

आखिर क्यों हम अपने बच्चों को नहीं बचा पा रहे 1 दिसंबर 2017,कोलकाता के जीडी बिरला सेन्टर फाँर एजुकेशन में एक चार साल की बच्ची के साथ उसी के स्कूल के पी टी टीचर द्वारा दुष्कर्म। 31 अक्तूबर को मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कोचिंग से लौट रही एक युवती के साथ सामूहिक बलात्कार। इसी साल सितंबर में रेहान



देश बिका तो खरीददार कौन ?

बचपन में अपने स्कूली पाठ्यक्रम में एक कहानी पढ़ी थी .जिसमे जंगल में एक जीव भागा जा रहा है और उससे जब अन्य जानवर ये पूछते हैं कि वह क्यों भागा जा रहा है तब वह कहता है ''कि आसमान गिर रहा है ,आसमान गिर रहा है ,पहले कोई यकीन नहीं करता पर



हाफिज तेरे पाकिस्तान की खैर नहीं

२००८ के मुंबई हमलों की नौवीं बरसी आ गयी है और अभी तक इसके मास्टर माइंड सजा से बहुत दूर हैं दुःख होता है जब भी अपने शहीदों को याद करते हैं और सबसे ज्यादा दुःख तब होता है जब हमारे कर्मठ व् युवा अधिकारियों के असमय काल का ग्रास बन जाने के जिम्मेदार लोगों के सिर



लो फिर बिक गया .........

कल से उत्तर-प्रदेश में नगरपालिका चुनावों में पहले चरण का मतदान आरम्भ होने जा रहा है .सभी मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए निष्पक्ष एवं स्वतंत्र मतदान करेंगे.इससे बड़ा झूठ इस भारतीय लोकतंत्र में नहीं हो सकता. निष्पक्ष एवं स्वतंत्र मतदान की हामी भरने वाला भारत



डी.जे. बंद.............

अभी पिछले दिनों की बात है घर के पीछे स्थित एक धर्मशाला में विवाह समारोह था और जैसा कि आजकल का प्रचलन है वहाँ डी.जे. बज रहा था और शायद full volume में बज रहा था और जैसा कि डी.जे. का प्रभाव होता है वही हो रहा था ,उथल-पुथल मचा रहा था ,मानसिक शांति भंग कर रहा था औ



नारी तो चुभती ही है .

नहटौर में एक चुनावी सभा में ''आप''नेता अलका लम्बा पर पत्थर से हमला ,कोई नई बात नहीं है .राजनीति के क्षेत्र में उतरने वाली महिलाएं आये दिन कभी शब्द भेदी बाणों का तो कभी पत्थरों आदि के हमलों का शिकार होती रहती हैं .ममता बनर्जी तो पश्चिमी बंगाल में इसका जीता-जागता उदाह



और वो चला गया. ..

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अरे ! घर तो छोड़ दो .

''सियासत को लहू पीने की लत है , वर्ना मुल्क में सब खैरियत है .'' महज शेर नहीं है ये ,असलियत है हमारी सियासत की ,जिसे दुनिया के किसी भी कोने में हो ,लहू पीने की ऐसी बुरी लत है कि उसके लिए यह सड़कों से लेकर चौराहों तक, राजमहलों से लेकर साधारण घरों



अपनी वास्तविक इच्छाओं को जांचे और परखे

इच्छा, आकांक्षा मनुष्य की प्रेरणा स्त्रोत है इच्छाएं है तो मनुष्य कर्म की और अग्रसर होता है | इच्छाएं नया जोश नई प्रेरणा का संचार मनुष्य के अंदर करने के साथ-साथ समाज में उसका स्थान भी निश्चित करती है लेकिन जब ये इच्छाएं आकाँक्षायें विकृत हो जाती हैं तो सम्पूर्ण जीवन को अशाँति तथा असन्तोष की आग में ज



कामकाजी महिलाएं और कानून

. आज यदि देखा जाये तो महिलाओं के लिए घर से बाहर जाकर काम करना ज़रूरी हो गया है और इसका एक परिणाम तो ये हुआ है कि स्त्री सशक्तिकरण के कार्य बढ़ गए है और स्त्री का आगे बढ़ने में भी तेज़ी आई है किन्तु इसके दुष्परिणाम भी कम नहीं हुए हैं जहाँ एक तरफ महिलाओं को कार्यस्थल



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