शोध

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इस समय बहुजन (दलित) शोधार्थियों को तटस्थ होकर शोध करने आवश्यकता है ?

शोध करना साहित्य, समाज अथवा उन सभी के लिए के लिए जरूरी है जो कुछ नया दिखना चाहते हैं, अपने इतिहास से प्रेरणा लेते हैं । आज हमारे सामने जितनी भी पुस्तके या रिपोर्ट या ऐसी सामग्री जिससे समाज के सभी वर्गों की वास्तविकता का पता चलता है वह सभी शोध से ही संभव हो पाया है ।



हिंदी साहित्य को सैयद गुलाम नबी ‘रसलीन’ का प्रदेय

[1] भारतीय संस्कृति की आत्मा इस देश की विविध भाषाओं के माध्यम से अभिव्यक्ति प्राप्त करती है। भारत की सभी भाषाएँ और उनकी साहित्यिक विरासत सबकी साझी संपदा है और उसे सभी देशवासियों ने समृद्ध किया है, चाहे वे हिंदू हों या मुसलमान या किसी अन्य धर्म-संप्रदाय के अनुयायी। इनमें





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