"छंदमुक्त

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"छंदमुक्त काव्य" कूप में धूप मौसम का रूप

"छंदमुक्त काव्य"कूप में धूपमौसम का रूप चिलमिलाती सुबहठिठुरती शाम है सिकुड़ते खेत, भटकती नौकरीकर्ज, कुर्सी, माफ़ी एक नया सरजाम हैसिर चढ़े पानी का यह कैसा पैगाम है।।तलाश है बाली कीझुके धान डाली कीसूखता किसान रोजगुजरती हुई शाम है कुर्सी के इर्द गिर्द छाया किसान हैखेत खाद बीज का भ्रामक अंजाम हैसिर चढ़े पानी





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