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" गीतिका "

सावन का श्याम झूला, डारी कदमा डारी इक बार फिर झूला दों, श्यामल रास बिहारी सखियां विवस खड़ी हैं, चितवत राह तुम्हारी देखों भी श्याम आओं, आओं तनिक मझारी ||मुरली की तान कान्हा, तरसत महल अटारी सुध बुध बिसर रही है, तक गोवर्धन गिरधारी ||महा माया मन-मन राचे, बोझिल जीवन धारी पग पग नाचे ताता थैया, नाचे घर नर



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