यादों का पागलखाना

जब भी तेरी वफाओं का वह ज़माना याद आता है,सच कहूं तो तेरी यादों का पागलखाना याद आता है।कसमों की जंजीर जहां पर, वादों से बनी दीवारें हैंझूठ किया है खंज़र से तेरे नाम की उन पर दरारें है।टूट चुका सपनों का बिस्तर, अफ़सोसों की चादर हैतकियों को गीला करती अश्क़ों की जहां फुहारें हैं।जलती शमा में कैद वहां, परवान



सड़क पर प्रसव

वक़्त का विप्लव सड़क पर प्रसव राजधानी में पथरीला ज़मीर कराहती बेघर नारी झेलती जनवरी की ठण्ड और प्रसव-पीर प्रसवोपराँत जच्चा-बच्चा 18 घँटे तड़पे सड़क पर ज़माने से लड़ने पहुँचाये गये अस्पताल के बिस्तर परहालात प्रतिकूल फिर भी नहीं टूटी साँसेंकरतीं वक़्त से दो-दो हाथ जिजीविषा की फाँसें जब एनजीओ उठाते हैं दीन



16 जनवरी 2019

निर्भीकता: खालीपन से भागना कैसे रोकें।

हम अपने हर उपलब्ध स्थान को भरने, अधिक कार्यों में व्यस्त रहने, संदेशों का जवाब देने, सोशल मीडिया और ऑनलाइन साइटों की जाँच करने, वीडियो देखने में बिताते हैं।हम अपने जीवन में खाली जगह से डरते हैं।परिणाम अक्सर एक निरंतर व्यस्तता, निरंतर व्याकुलता और परिहार, ध्यान की कमी, हमारे जीवन से संतुष्टि की कमी ह



"छंद दुर्मिल सवैया" चित भावत नाहिं दुवार सखी प्रिय साजन छोड़ गए बखरी। अकुलात जिया मन लागत का छड़ राजन काहुँ गए बहरी।

दुर्मिल सवैया ( वर्णिक )शिल्प - आठ सगण, सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा सलगा 112 112 112 112 112 112 112 112, दुर्मिल सवैया छंद लघु से शुरू होता है ।छंद मे चारों पंक्तियों में तुकांत होता है"छंद दुर्मिल सवैया" चित भावत नाहिं दुवार सखी प्रिय साजन छोड़ गए बखरी।अकुलात



सामाजिक एकता

2018 समाप्त हुवा । बदलाव , परिवर्तन निसर्ग का एक नियम है । आज विश्व काफी तीव्रगति से चल रहा है । और परिवर्तन की दौड़ मैं कई पीछे छुट रहे है तो कई काफी तेजीसे आगे भी बढ़ रहे है । समाज की एकता और प्रेम तभी आपसे में एक रूप हो सकते है जब हम इस बढ़ती तेज रफ़्तार में एक दूजे के सहायक बन एक दूजे को भी साथ लेकर



सिरदर्द दूर करने के लिए दवाई नहीं, करें यह योगासन

आज के समय में लोग हर छोटी-बड़ी बीमारी के उपचार के लिए दवाईयों पर निर्भर रहते हैं लेकिन वास्तव में जरूरत से ज्यादा दवाईयों का सेवन स्वास्थ्य को हानि पहुंचाता है। ऐसी बहुत सी स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जिनका उपचार बिना दवाईयों के भी किया जा सकता है। ऐसी ही एक स्वास्थ्य समस्या है, सिरदर्द की समस्या। वर्तमा



अभिनेता नसीरूद्दीन शाह अपने देश में डरे हुये हैं

अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अपने देश में डरे हुए हैं ?डॉ शोभा भारद्वाज वह आज के भारत में अपने बच्चों को लेकर बहुत डरे हुए हैं. ''मुझे इस बात का डर लगता है कि कहीं मेरेबच्चों को भीड़ ने घेर लिया और उनसे पूछा कि तुम हिंदू हो या मुसलमान? मेरे बच्चों के पास इसका कोई जवाब नहीं होगा. क्योंकि मैंने मेरेअनुसार अ



"गज़ल" जिंदगी के दिन बहुत आए हँसा चलते बने थे नैन सूखे कब रहे की तुम रुला चलते बने थे

बह्र- 2122 2122 2122 2122 रदीफ़- चलते बने थे, काफ़िया- आ स्वर"गज़ल" जिंदगी के दिन बहुत आए हँसा चलते बने थेनैन सूखे कब रहे की तुम रुला चलते बने थेदिन-रात की परछाइयाँ थी घूरती घर को पलटकरदिन उगा कब रात में किस्सा सुना चलते बने थे।।मौन रहना ठीक था तो बोलने की जिद किये क्योंकाठ न था आदमी फिर क्यों बना चलते



द एक्सीडेंटल प्राईम मिनिस्टर

द एक्सीडेंटल प्राईम मिनिस्टर ? डॉ शोभा भारद्वाज डॉ मनमोहन सिंह जी परबनी फिल्म एक्सीडेंटल प्राईम मिनिस्टर का टेलर रिलीज किया गया है विवाद होनास्वाभाविक है डॉ मनमोहन सिंह की छवि एक ईमानदार व्यक्ति की रही रही है उनकी ईमानदारी पर किसी को शक नहीं है लेकिन आलोचक एवं विपक्ष उनकेकाल को घोटालों का काल



एकादशी व्रत २०१९

एकादशी व्रत 2019आने वाले तीनदिन बाद सन् 2018 को विदा करके सन् 2019 में विश्व प्रवेश करेगा | नववर्ष कीअग्रिम शुभकामनाओं सहित प्रस्तुत है वर्ष 2019 में आने वाले हिन्दू पर्व औरत्योहारों की तिथियाँ… सबसे पहले एकादशी…हिन्दू धर्म में एकादशी का विशेष महत्त्व है | पद्मपुराण के अनुसार भगवान् श्री कृष्ण नेधर्



"गज़ल" पास आती न हसरत बिखरते रहे चाहतों के लिए शोर करते रहे

वज़्न--212 212 212 212, अर्कान-- फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन फ़ाइलुन, बह्रे- मुतदारिक मुसम्मन सालिम, क़ाफ़िया— करते, (अते की बंदिश) रदीफ़ --- रहे"गज़ल" पास आती न हसरत बिखरते रहेचाहतों के लिए शोर करते रहेकारवाँ अपनी मंजिल गया की रुकाकुछ सरकते रहे कुछ फिसलते रहे।।चंद लम्हों की खातिर मिले थे कभीकुछ भटकते रहे कु



कहीं भाजपा का ‘‘कमल’’(भगवा) एजेंडा’’ कांग्रेस के ‘‘नाथ’’ ने चुरा तो नहीं लिया है?

मध्यप्रदेश के 18वें मुख्यमंत्री के रूप में ‘‘कमल’’ को अनाथ न होने देने वाले हमारे पडोसी जिले छिंदवाडा के कमलनाथ द्वारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ली गई जिसके लिये उन्हे हार्दिक बधाईयाँ, वंदन व अभिनंदन। सम्पन्न शपथ ग्रहण समारोह में वास्तव में ऐसा लगा ही नहीं कि वह किसी कांग्रेसी मुख्यमंत्री का शपथ ग्रहण स



"मुक्तक" देखिए तो कैसे वो हालात बने हैं। क्या पटरियों पै सिर रख आघात बने हैं।

"मुक्तक" देखिए तो कैसे वो हालात बने हैं।क्या पटरियों पै सिर रख आघात बने हैं।रावण का जलाना भी नासूर बन गया-दृश्य आँखों में जख़्म जल प्रपात बने हैं।।-1देखन आए जो रावण सन्निपात बने हैं।कुलदीपक थे घर के अब रात बने हैं।त्योहारों में ये मातम सा क्यूँ हो गया-क्या रावण के मन के सौगात बने हैं।।-2महातम मिश्र,



नवज्योति इंडिया फाउंडेशन “एक कदम आत्मनिर्भरता की ओर” - NAVJYOTI INDIA FOUNDATION NGO IN DELHI

नवज्योति इंडिया फाउंडेशन (Navjyoti India Foundation) एक गैर-लाभकारी संगठन है। जिसकी शुरुआत 1988 में प्रथम महिला आईपीएस (IPS) डॉ. किरण बेदी और दिल्ली पुलिस के 16 पुलिस अधिकारियों की टीम के द्वारा भारत में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध, निरक्षरता, भेद-भाव, जैसी समाज में फ़ैली विकृतियों को एक जुट होकर साम



aids kaise hota hai in hindi- ऐड्स कैसे होता है

एड्स रोग की पहचान होने के बाद, दशकों में नैदानिक परीक्षण और उपचार में काफी सुधार हुआ है, जो जीवन की सीमा और गुणवत्ता को बढ़ाता है। हालांकि, कुछ समुदायों में उच्च जोखिम वाला व्यवहार अभी भी प्रचलित है और निरंतर परीक्षण, निदान और उपचार एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य उद्देश्य बना हुआ है।



साईकृपा ने मुझे सिखाया “दूसरों की ज़िंदगी बेहतर करने के लिए शुरुआत खुद से करनी पड़ती है” - SAIKRIPA NGO IN DELHI

Saikripa-Home for Homeless“साईंकृपा ( SaiKripa) - Saikripa-Home for Homeless दिल्ली एनसीआर में स्थित एक NGO (गैर-सरकारी संगठन ) है, जो कि वंचित बच्चों को पढ़ाने और उन्हें जीवन को नई दिशा देने का कार्य करता है।” बच्चे मानव जाति का भविष्य हैं। “Saikripa-Home for Homeles



बाल यौन शोषण: अपनों की दरिंदगी का शिकार होता बचपन - Child Abuse in Hindi

बाल यौन शोषण हमारे समाज की सबसे जटिल समस्याओं में से एक है।भारत में दिन पर दिन बाल यौन शोषण की समस्याएं तेज़ी से बढ़ती जा रहीं है। जिसके चलते न जाने कितने मासूम आज एक सुरक्षित समाज में साँस नहीं ले पा रहे।उनके मन में असुरक्षा का डर भर गया



राहुल गांधी का ‘एप’ के माध्यम से मुख्यमंत्री चुनना! जनादेश का अपमान नहीं?

पाँच प्रदेशों में हुये विधानसभा चुनावों में तीन विधानसभाओं में कांग्रेस सरकारें बनने जा रही है। कांग्रेस पार्टी द्वारा तीन प्रदेशों में मुख्यमंत्री चुनने की प्रक्रिया की औपचारिकताओं की (औपचारिक) पूर्ती की जाकर विधायक दल द्वारा अंतिम निर्णय लेने का अधिकार परम्परा अनुसार हाई कमान अर्थात राहुल गांधी को



ज़िंदगी पिंजरे में बंद पंछी की तरह थी “लाइट दे लिट्रेसी” ने हमें उड़ना सिखाया -Light de Literacy NGO IN DELHI

कहा जाता है की बच्चे गीली मिट्टी की तरह होते हैं अगर इन्हें सही समय पर सही आकार न दिया जाये तो ये बिखर जाते हैं। “लाइट दे लिट्रेसी” संगठन ने लाखों बच्चों को एक भविष्य दिया है। बता दें लाइट दे लिट्रेसी- "एक आशा नवनिर्माण की” एक प्रयास है उन बच्चों के लिए जो शिक्षा से



दिल्ली में बच्चों की रगों में खून नहीं बल्कि दौड़ता है नशा, हर तीन में से एक बच्चा नशे का शिकार - Children drug addiction

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में फुटपाथ पर एक अलग ही दुनिया बसती है।जिसमें अधिकतर बसेरा बच्चों का हैं।ये बच्चे न जाने रोज़ कितने समस्याओं से झुझते हैं जिसमें नशे की लत, अभद्र व्यवहार और हिंसा का शिकार तो जैसे



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