कवी

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जीवन की सच्चाई

आजा़द हुए हमे 73 साल हुए मगर हक़ीक़ी आजा़दी कोई दिलाए तो सही । नफ़रतो के इस दौर मे भी मुहब्बत को कोई जगाये तो सही । अविश्वासो की इन आँधियाँ मे भी विश्वास का कोई दीया जलाए तो सही । रिश्ते तो बहुत होते हैंं मगर इन रिश्तों को कोई निभाए तो सही । सपने तो बहुत लोग देखते हैं मगर इन सपनो को



बातें कुछ अनकही सी...........: अवसाद

"अवसाद" एक ऐसा शब्द जिससे हम सब वाकिफ़ हैं।बस वाकिफ़ नहीं है तो उसके होने से।एक बच्चा जब अपनी माँ-बाप की इच्छाओं के तले दबता है तो न ही इच्छाएँ रह जाती हैं ना ही बचपना।क्योंकि बचपना दुबक जाता है इन बड़ी मंज़िलों के भार तले जो उसे कुछ खास रास नहीं आते।मंज़िल उसे भी पसंद है पर र



कलम हमारी

कौन सुने अब व्यथा हमारी, आज अकेली कलम हमारी,जो थी कभी पहचान हमारी, आज अकेली कलम हमारी।हाथों के स्पर्श मात्र से, पढ़ लेती थी हृदय की बाते,नैनों के कोरे पन्नों को, बतलाती थी मेरी यादें।कभी साथ जो देती थी, तम में, गम में, शरद शीत में,आज वही अनजान खड़ी है, इंतजार के मधुर प्रीत में।अभी शांत हू, व्याकुल भ



वो पिता ही होता हे



वो पिता ही होता हे



तलबगार है कई पर

तलबगार है कई पर मतलब से मिलते हैं ये वो फूल हैं जो सिर्फ मतलबी मौसम में खिलते हैं रोक लगाती है दुनिया तमाम इन पर पर देखो मान ये इश्कबाज पक्के जो पाबंदियों में भी मिलते हैं मोहब्बत के रोगी को दुनिया बेहद बदनाम ये करती है जनाब क्यों फिर भी आधी दुनिया हाए इसी पे मरती है कहते हैं कई धोखेबाज भी लेन-देन द



कवि

जो और कोई कह ना पाए कर नापाए और कोईऐसा जज्बा लिए संग में चलताहै अकेला कोई। उसके पासअनूठी क्षमता और अनोखा ज्ञान है सदा हीकागज पर अपने रचता अलग जहाँ है।अनोखा अंदाज उसका लिखता जागृतदेश बन



जय भारत जय!

जय भारतीय रक्षक वीर,मत लेना विरोधियों का खीर-नीर,विरोधियों का सीना देना चीर,जैसे ही कर्तव्य पथ पर वे हों अधीर। तुम्हें देशभक्त शीश नवाते,तुम्हारी जीत के जश्न मनाते,तुम हम सभी क





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