कहानियाँ

पुस्तक-समीक्षा :आधुनिक युवा-मानसिकता एवम् उसके नैतिक पतन की कहानियाँ

पुस्तक: ग्यारहवीं –A के लड़के लेखक: गौरव सोलंकी वर्ष: दूसरा संस्करण, अप्रैल 2018प्रकाशक: राजकमल प्रकाशन प्रा. लि., नई दिल्ली.मूल्य : रू 125, पृष्ठ 144********************“ग्यारहवीं–A के लड़के” गौरव सोलंकी की छह कहानियों का संग्रह है जो व



शौचालय का प्रेत भाग - २

उस समय जोग्शवरी रेल्वे स्टेशन मे प्लेटफार्म के आगे की तरफ से उसके कुछ मध्य भाग तक कम रोशनी हुआ क



पाँच वर्ष

आज अखबार में विज्ञापन छपा था, विज्ञापन के साथ ही पूछताछ के एक सम्पर्क अंक (नम्बर) भी,नवनीत सुबह सुबह चाय की चुस्की ले अखबार पढ़ रहा, अचानक उसकी निगाह उस विज्ञापन पर गयी । चाय का कप टेबल पर रख कर दोनों हाथों में अखबार को ले विज्ञापन पढ़ने लगा । "कुशल इंजीनियर की की आवश्यकता वेतन अनुभव व योग्यता के आधार



माँ कहाँ गई

माँ कहाँ गई आज माँ को गुज़रे हुए साल होने को आया। धीरे-धीरे सबनॉर्मल होने लगा था।सब काम धंधे पहले की ही तरह चलने लगे थे। एक दिन गीता (मेरी पत्नी) सफाई करते समय माँ की अलमारीको भी जो अस्त व्यस्त पड़ी थी, ठीक करने लगी जिसमे माँके पुराने कपड़े रखे थे।मैं उस समय वहीं खड़ा था। गीता मां का वह पीला सूट तहाने ल



नालायक

शादी करके, घर में कलह करके, अलग होकर, मुझे रुलाकर आज चार साल बादघर से अलग होने के बाद बड़े बेटे का फ़ोन आया वह कुछ कहना ही चाहता था कि मैं आदतनशुरू हो गया, नालायक तेरी हिम्मत कैसेहुई, फ़ोन करने की तू तो उसी दिनही मर गया था हमारे लिए, जिस दिन ये घर छोड़ कर गयाथा, वो कुछ कहना ही चाहता था किमैंने फ़ोन पटक द



दिल का टुकड़ा

नाम : आलोक फोगाट जन्म स्थान : मेहरौली (दिल्ली)फ़ोन : 9953986953, 9958003160 दिल का टुकड़ा आज शादी को 23सालहो गए। याद आता है---शादी में पहली बार जब उससे परिचय हुआ ससुर जी ने बताया येमेरे भाई, जो गांव में रहते हैं, उनका बेटा राहुल, हमा



सबसे अच्छा पिता

नाम : आलोक फोगाट जन्म स्थान : मेहरौली (दिल्ली)फ़ोन : 9953986953, 9958003160 दोस्तो,मै, आलोक फोगाट, प्राचीन एतिहासिक शहर महरौली (दिल्ली) का रहने वालाहूँ | आपके सामने एक मार्मिक कहानियाँ, जो ‘फलक’, ‘लघुकथा के परिंदे’, ‘हिंदी प्रतिलिपि’,‘वर्जिन



बेटी अपने फर्ज को पूरा जरुर करती हैं ? एक बेटी के फर्ज की कहानी

शहर के अस्पताल में अजय का उपचार चलते-चलते 15-16 दिन हो गएँ थे|लेकिन उसकी तबीयत में कोई सुधार देखने को मिल रहा था| आईसीयू वार्ड के सामने परेशान दीपक लगातार इधर से उधर चक्कर पर चक्कर लगा रहे थे |कभी बेचैनी में आसमान की तरफ दोनों हाथ जोड़ कर भगवान से अपने बेटे की जिन्दगी की भ





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