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मुक्त काव्य

"मुक्त काव्य"पेड़ आम का शाहीन बाग में खड़ा हूँफलूँगा इसी उम्मीद में तो बढ़ा हूँजहाँ बौर आना चाहिएफल लटकना चाहिएवहाँ गिर रही हैं पत्तियाँबढ़ रही है विपत्तियांशायद पतझड़ आ गयाअचानक बसंत कुम्हिला गयाफिर से जलना होगा गर्मियों मेंऔर भीगना होगा बरसातियों मेंफलदार होकर भी जीवन से कुढ़ा हूँपेड़ आम का शाहीन बाग में



दोहा गीतिका

"दोहा गीतिका"मुट्ठी भर चावल सखी, कर दे जाकर दानगंगा घाट प्रयाग में, कर ले पावन स्नानसुमन भाव पुष्पित करो, माँ गंगा के तीरसंगम की डुबकी मिले, मिलते संत सुजान।।पंडित पंडा हर घड़ी, रहते हैं तैयारहरिकीर्तन हर पल श्रवण, हरि चर्चा चित ध्यान।।कष्ट अनेकों भूलकर, पहुँचें भक्त अपारबैसाखी की क्या कहें, बुढ़ऊ जस



जज़्बात

जज़्बात किसी के भी हो,रहते दिल की गहराई में,बहुत श्रम करना पड़ता है,उन्हें जीवन पटल पे लाने में।एक चित्रकार उकेर देता है,जज्बातों को अपनी पेंटिग में,एक कवि उतार लेता है,जज्बातों को कुछ पंक्तियों में।एक कहानी में जज्बातों को,कहानीकार समे



"पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक"(पीपीआई डी) के कार्यकर्ताओं की टीम,पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आर के विद्यार्थी के नेतृत्व में ग्राम सभा भीटा ब्लॉक

कल दिनांक 29 जून को "पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक"(पीपीआई डी) के कार्यकर्ताओं की टीम,पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आर के विद्यार्थी के नेतृत्व में ग्राम सभा भीटा ब्लॉक जसरा जिला प्रयागराज मे जनसंपर्क किया! जनसंपर्क के दौरान यह बात निकल कर के आई कि गांव के मनरेगा के मजदूरों को उनकी मेहनत का आधा पै



ग्राम सभा में मनरेगा के मजदूरों को उनकी पूरा मजदूरी नहीं दी जा रही है।

अब तक हिंदी न्यूज़ /प्रजागराज कल दिनांक 29 जून 2020 को "पीपल्स पार्टी ऑफ इंडिया डेमोक्रेटिक"(पीपीआई डी) के कार्यकर्ताओं द्वारा ग्राम सभा रामपुर खौरिया ,ब्लॉक जसरा, तहसील बारा, जिला प्रयागराज में जनसंपर्क किया गया! जनसंपर्क के दौरान यह बात स्पष्ट हुई की इस ग्राम सभा में मनरेगा के मजदूरों को उनकी पूरा



गुरुपूर्णिमा पर विशेष

*जय श्रीमन्नारायण* *श्रीमते गोदाम्बाय नमः*🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺 *गुरुपूर्णिमा विशेष* *भाग तृतीय*🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 वैष्णव के चिन्ह स्वयं व्यक्ति को देव तुल्य बना देते हैं वैष्णव दीक्षा लेने के बाद पंच संस्कार युक्त मनुष्य स्वयं एक दिव्य यंत्र अर्थात दिव्य पुरुष के रूप में इस धरा धाम को आलोकित करता है



भारतीय राजनीति में ‘सवालों’ के ‘जवाब’ के ‘उत्तर’ में क्या सिर्फ ‘सवाल’ ही रह गए हैं?

भारतीय राजनीति का एक स्वर्णिम युग रहा है। जब राजनीति के धूमकेतु डॉ राम मनोहर लोहिया, अटल बिहारी बाजपेई, बलराम मधोक, के. कामराज, भाई अशोक मेहता, आचार्य कृपलानी, जॉर्ज फर्नांडिस, हरकिशन सिंह सुरजीत, ई. नमबुरूदीपाद, मोरारजी भाई देसाई, ज्योति बसु, चंद्रशेखर, तारकेश्वरी सिन्हा जैसे अनेक हस्तियां रही है।



क़िस्सा गिलहरी और कोरोना का - दिनेश डाक्टर

फुदकती फुदकतीमेरी खिड़की परफिर आ बैठी गिलहरीछोटी सी लीची कोकुतर कुतर छीलाफिर मुझसे पूछाक्या हुआ सब खैरियत तो हैदेखती हूँ कई महीनों सेकैद हो महज घर में न बाहर जाते होन किसी को बुलाते होबस उलझे उलझे उदास नज़र आते हो ? मैंने देखा उसकीचौकन्नी आंखों कोसफेद भूरीचमकती धारियों कोछोटे छोटे सुंदर पंजो कोपल पल ल



28 जून 2020 को नये कपड़े खरीदने के फायदे

🌹आज नए कपड़े खरीदकर पहनना धन देने वाला होगा! जी हाँ आज दिनांक 28 जून 2020 दिन रविवार आषाढ़ मास शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि को नये कपड़े खरीदकर पहनने से आमदनी में बढ़ोत्तरी होगी, यदि रोग ग्रसित हैं तो रोगों से छुटकारा मिलेगा शिक्षा, नौकरी, व्यापार आदि में लाभ की स्थिति बनेगी, कुल मिलाकर देखा जाए तो सफल



हिन्दुस्तानी सैनिक

पंद्रह जून की वह अंधेरी रात, सुकून से सो रहा था हर हिन्दुस्तानी।क्योंकि सीमा पे चीनियों को, सबक सिखा रहे थेजांबाज़ हिन्दुस्तानी।वो थे चीनी हजारों में,केवल पैंतीस सैनिकों के साथ थासंतोष हिन्दुस्तानी ।संयम और धैर्य के साथ, गया समझाने चीनियों को थावह वीर हिन्दुस्तानी।धोख



अपना घर

वो आई थी मेरे घर, अपना घर बनाने को.. तांक झांक कर देख गई, उठ बैठ कर देख गई, अपना घर बसाने को, वो आई थी मेरे घर, अपना घर बनाने को.. तिनका तिनका बीनने को, दिन पूरा जोड़ दिया, कुछ कम पड़ा तो कुछ और जोड़ लिया। वो आई थी मेरे घर, अपना घर बनाने को.. मेरे घर की आंखें, उसको देखें, उसकी आंखें उनको देखें, थोड़



भारत ने दुनिया को क्या दिया ।

भारत दुनिया की सबसे पुरानी जीवित सभ्यता है। भारतीय भूमि आरंभ से ही अविष्कारों की भूमि रही है और गर्व करने के लिए हम भारतीयों के पास बहुत सी खोज हैं। आइये जानते है की भारत ने दुनिया को क्या दिया |तक्षशिला - पहला विश्वविद्यालय ( Takshashila - World's First University) लगभग



भारत में प्रकाशित सबसे पहला अख़बार |

आज हम संचार क्रांति के युग में जी रहे हैं । संचार साधनों ने इतनी प्रगति कर ली है कि संसार का कोई भी कोना हमारी पहुंच से दूर नहीं रहा । चाहे वह दुनिया के दूसरे छोर पर बैठे किसी व्यक्ति से बात करनी हो या फिर दुनिया के किसी हिस्से की खबर लेनी हो, केवल कुछ सेकंड्स में ही आप यह काम अपने मोबाइल या लैपटॉप



Education Minister के बारे में जाने काम की बात

Education Minister (शिक्षा मंत्रियों) के बारे में जाने। ये जानकारी आपके एग्जाम में जरूर काम आएगी। Education minister ke bare me jane kaam ki baatदेश में पढ़ाई को सुचारू रूप से चलाने के लिए एक education minister की जरूरत पड़ती है। तभी हमारे देश मे शिक्षा का विकास होता है और



अलस का मौसम - दिनेश डाक्टर

अलस का मौसम हवा थी गीलीसीली सीली कुछ नशीलीमौसम की खुमारीबदन में थी भारीसोता ही रहाफिर जिस्म को बड़ी मुश्किल सेउठाया, समेटाशाल खींच करबदन से लपेटाउठूं या वापस लेट जाऊंइसी में जीती सुबह की खुमारीफिर लुढका तकिये पेलिए अलसाया जिस्म भारीस्लो मोशन में भोर का शोर हुआधीरे धीरे आँख खुलीकमरे में थी फैलीरोशनी ध



गांधार राज शकुनी की नीति

गांधार राज शकुनी की नीतिडॉ शोभा भारद्वाजयह उन दिनों की कहानी है जब राजधर्म में राजनीति को मान्यता दी गयी थी लेकिन कूटनीति का स्थान नहीं था शकुनी पहला कुटिल कूटनीतिकार था छलनीति उसका हथियार था माना हुआ षड्यंत्र कारी था |समय का प्रचलित खेल चौसर राजा महाराजों के प्रिय खे



क्या परिपक्व होते लोकतंत्र में ‘‘सरकारे’’ ‘‘गिराई’’ जाती है? अथवा ‘‘बनाई’’ जाती है?

राजस्थान में राज्य सभा के हो रहे चुनाव के संदर्भ में कांग्रेस का यह बयान आया है कि, राजस्थान में भी भाजपा ने मध्य प्रदेश के समान ही‘ ऑपरेशन कमल‘ पर अमल करना शुरू कर दिया है। भाजपा खरीद फरोख्त के द्वारा लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को गिराने का प्रयास कर रही है। विधायक दल के सचेतक द्वारा इसकी भ्



रहिमन धागा प्रेम का

रहिमन धागा प्रेम का मत तोड़ो चटकाय टूटे से फिर ना जुड़े जुड़े तो गांठ पड़ जाए



विकास की दौड़

विकास की दौड़ में,हो गया हूं मै अंधा, प्रतियोगिता के इस चरम पर, पहुंच गया ये बंदा।बुद्धि का हुआ जैसे जैसे विकास,प्रकृति का किया वैसे वैसे सत्यानाश।विकास की दौड़ में ,हो गया हूं मैं अंधा ।रास्ता बदलने को किया मजबुर,खिलखिलाती इन नदियों को किया,बहुतों से दूर।जंगल काटे ,शहर बस



सफाई कर्मचारियों के हक और अधिकारों की दास्तां को बयां करती हुई नरेंद्र वाल्मीकि की कविता 'आखिर कब तक'

आखिर कब तकआखिर कब तककरते रहोगे अमानवीय कामढोते रहोगे मलमूत्रमरते रहोगे सीवरों मेंनिकालते रहोगे गंदी नालियाँढोते रहोगे लाशेंआखिर कब तकसहोगे ये जुल्मकब तक रहोगेखामोश ?सुनो सफाईकर्मियों !अब बजा दोबिगुलइन गंद



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