गीत”

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“भोजपुरी गीत” कइसे जईबू गोरी छलकत गगरिया, डगरिया में शोर हो गइल

“भोजपुरी गीत”कइसे जईबू गोरीछलकत गगरिया, डगरिया में शोर हो गइलकहीं बैठल होइहेंछुपि के साँवरिया, नजरिया में चोर हो गइल...... बरसी गजरा तुहार, भीगी अँचरा लिलार मति कर मन शृंगार, रार कजरा के धारपायल खनकी तेहोइहें गुलजार गोरिया मनन कर घर बार, जनि कर तूँ विहार,कइसे विसरी धनापलखत पहरिया, शहरिया अंजोर हो गइ



“देशज गीत” जिनगी में आइके दुलार कइले बाट

“देशज गीत” जिनगी में आइके दुलार कइले बाटगज़ब राग गाइके सुमार कइले बाटनीक लागे हमरा के अजबे ई छाँव बा कस बगिया खिलाइ के बहार कइले बाट॥......जिनगी में आइके दुलार कइले बाटफुलाइल विरान वन चम्पा चमेलीकान-फूंसी करतानी सखिया सहेलीमनवा डेरात मोरा पतझड़ पहारूरात-दिन सावन जस फुहार कइ



“गीत” बंद कर लो आँख तुम बेचैन दिल में आ बसे...... क्या सुनाऊँ आप को......

“गीत”क्या सुनाऊँ आप को जब आप दिल में आ बसेनैन तो कबसे विकल थे चैन दिल में आ बसे........ क्या सुनाऊँ आप को.....देखना जी इस गली में और भी गलियाँ बहुत रुक न जाना छोड़ राहें मोड़ भी मिलते बहुत क्या भला फरियाद होगी यह गली अंधेर मेंछाया न आती दिन बताने रैन दिल में आ बसे......क्या



“गीत” सुंदर शब्द खिले रचना प्रिय॥

छंद - मोदक (वार्णिक) शिल्प विधान --भगण ×४ मापनी २११ २११ २११ २११“गीत” भाव लिखो जब आप सभी जन मान गुमान विचार लियो मन ठेस लगे न कलेश भरे जियसुंदर शब्द खिले रचना प्रिय॥गागर सागर चातक नागरपातरि देह सबे गुण आगर सावध बोल हिया न लगे उठ आपुहि आप पिया न चले रुठ॥ गौतम पाहुन आय गया



“गीत” ऋतु बसंती रूठ कर जाने लगी

छंद- आनंदवर्धक (मापनीयुक्त) मापनी- २१२२ २१२२ २१२“गीत”ऋतु बसंती रूठ कर जाने लगी कंठ कोयल राग बिखराने लगीदेख री किसका बुलावा आ गया छाँव भी तप आग बरसाने लगी मोह लेती थी छलक छवि छाँव की लुप्त होती जा रही प्रति गाँव कीगा रहे थे गीत गुंजन सावनी अब कहाँ रंगत दिवाली ठाँव की॥हो च



कब प्रीतम मोरा आए॥ “गीत”

छंद - सखी/आँसू शिल्प विधान-१४ मात्रा (चार चरण) ३ चौकल गुरु अंत में मगण (२२२)अथवा यगण (१२२) आरम्भ में द्विकल अनिवार्य“गीत”सखि बसंत भौंरा आया मन मन फागुन बौरायानच माली महुवा कूँचा तक नैना झरना ऊँचा॥बौर आम डाली डाली है कोयल काली काली मतवाली गाए फागा जिय तरसा बैठा कागा॥ म



“सवैया गीत”

किरीट सवैया " वर्णिक छंद । मापनी -२११ २११ २११ २११ २११ २११ २११ २११ भगण×८ भानस भानस भानस भानस भानस भानस भानस भानस“सवैया गीत”नाहक पीर बढ़ाय गई मुरली नहिं बोलति प्रेम पुकारतघायल की गति घायल जानत पायल बाजत झूमर नाचत। खूब गले मह माल विराजत मोहत हैं लखि बैरन राचतरी सखि मोहन मोह ग



“गीत”

“गीत”चलो री हवा पाँव चेतक लिए उड़े जा वहाँ छाँव चंदन हिए जहाँ वास सैया सुनैनन भली प्रभा काल लाली हिमालय चली॥सुना है किसी से वहाँ है प्रभा बढ़ो आज देखूँ पिया की सभा प्रकृति है दिलों में प्रसूना भली- सजा लूँ गजारा सजा के चली॥ अनेकों भरी है वहाँ पै दवा नुरानी सुहानी जहाँ की हव



“बाल गीत” छंद- आल्हा

“बाल गीत”, छंद- आल्हाचूँ-चूँ करती चिड़िया रानी, डाली पर करती चकचार कौन ले गया निरा घोंसला, छीन गया उसका संसारलटक रहें डाली पर उसके, हैं चूँजे उसकी पहचान झूल रहे थे दृश्य मनोरम, हों मानों सावनी बहार॥ रोज रोज उड़ वह जाती थी, दाना चुँगती दूर दरार बच्चों को फुसलाते जाती, मत डरन



“गीत” (बिटिया बैठी है डोली ससुराल की)

“गीत” (बिटिया बैठी है डोली ससुराल की)बिटिया बैठी है डोली ससुराल की आए सज के बाराती खुशहाल की....... कभी बिंदियाँ हँसे कभी मेंहदी खिले कभी नयना झरे कभी सखियाँ मिलेताकी झांकी रे होली सु-गुलाल की बिटिया बैठी है डोली ससुराल की........कहीं मैया खड़ी कहीं भैया खड़े कहीं बाबू ढ़लें



“भोजपुरी लोकगीत” कइसे जईबू गोरी छलकत गगरिया, डगरिया में शोर हो गइल

“भोजपुरी लोकगीत”कइसे जईबू गोरी छलकत गगरिया, डगरिया में शोर हो गइलकहीं बैठल होइहें छुपि के साँवरिया, नजरिया में चोर हो गइल...... बरसी गजरा तुहार, भीगी अँचरा लिलार मति कर मन शृंगार, रार कजरा के धारपायल खनकी ते, होइहें गुलजार गोरिया मनन कर घर बार, जनि कर तूँ विहारकइसे विसरी



“दादरा गीत” जा रे बदरिया, सौतन घर जा जा रे

“दादरा गीत”जा रे बदरिया, सौतन घर जा जा रेसौतन घर जा रे, सौतन घर जा जा रे, जा रे बदरिया...........नाहक बरस गई मोर अंगनइयाँअगन लगी है सौतन घरे सइयाँजा रे तू वहिका डूबा रे, बैरन घर जा जा रे, जा रे बदरिया...........जा रे बिजुरिया सौतन घर जा जा रेकाहें चमक रही मोर दुवरइयाँलपट



“नवगीत” घटा घिरि आई सजनी

“नवगीत” सावन की पुरुवाई, घटा घिरि आई सजनी बादल की तरुनाई, अदा चित छाई सजनी साजन घर तरु ओरी, नदी उतिराई छलकी पाहुन की पहुनाई, निशा लहराई सजनी......सावन की पुरुवाई, घटा घिरि आई सजनी आपन मनन मिताई, नैन भिगाई सजनी चातक चहक चिराई, सुबा निराई सजनी सोहर सगुन सुनाई, ख





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